PM Modi ने मंगलवार को ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर देते हुए गैर-जरूरी सोना खरीदने और विदेशी छुट्टियों/डेस्टिनेशन वेडिंग से परहेज की अपील दोहराई। 7.8% तिमाही वृद्धि के बीच सोने के आयात में 32.4% उछाल से चिंता; सरकार ने 13 May को ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% की थी।

PM Modi Gold Appeal: वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में फिर गहराते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर दिया है। मंगलवार को एक वीडियो संदेश में उन्होंने देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने और विदेशी छुट्टियों के बजाय भारत में घूमने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने यह अपील ऐसे समय में की है जब भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। मोदी ने इस आर्थिक रफ्तार पर खुशी जताते हुए कहा कि अब इसे बनाए रखना ही नहीं, बल्कि आगे और तेज करना भी जरूरी है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए मोदी ने दिया स्वदेशी का मंत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसके लिए उन्होंने ‘स्वदेशी का मंत्र’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने की अपील की।

मोदी ने लोगों से विदेशी छुट्टियों और विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे खर्चों पर पुनर्विचार करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि देश के भीतर खर्च बढ़े, जिससे घरेलू कारोबार और पर्यटन को फायदा मिले।

इसी कड़ी में उन्होंने लोगों से जरूरत नहीं होने पर सोना नहीं खरीदने की भी अपील की। इससे पहले 10 मई को भी प्रधानमंत्री गैर-जरूरी विदेशी यात्रा टालने और कुछ समय के लिए सोने की खरीद से बचने की अपील कर चुके हैं।

सोने का आयात तेजी से बढ़ा, बढ़ी चिंता

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में भारत का सोना आयात 32.4 फीसदी बढ़कर 15.17 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले वित्तवर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 11.46 अरब डॉलर था।

रुपये के लिहाज से देखें तो अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान सोने का आयात 1.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो एक साल पहले करीब 98,239 करोड़ रुपये था।

सोने के आयात में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब भारत को अन्य जरूरी आयातों के लिए भी विदेशी मुद्रा की जरूरत है। यही वजह है कि सरकार गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करने पर जोर दे रही है।

बढ़ा व्यापार घाटा, जुलाई में भी दबाव

जुलाई के आंकड़े भी व्यापार के मोर्चे पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करते हैं। इस महीने भारत का माल निर्यात 19.63 फीसदी बढ़कर 44.24 अरब डॉलर रहा, लेकिन आयात इससे कहीं अधिक 17.52 फीसदी बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पहुंच गया।

इसके चलते जुलाई में भारत का माल व्यापार घाटा 31.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो छह महीने का उच्च स्तर बताया गया है।

ऐसे में सोने जैसे गैर-जरूरी आयात में तेजी सरकार और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

सरकार पहले भी उठा चुकी है कदम

कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार पहले भी कदम उठा चुकी है। 13 मई को सोना-चांदी समेत कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया था।

इसका उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को हतोत्साहित करना और विदेशी मुद्रा को ऊर्जा तथा उर्वरक जैसे जरूरी आयातों के लिए सुरक्षित रखना था।

2025-26 में भी कीमती धातुओं के आयात में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इस दौरान सोने का आयात करीब 24.08 फीसदी बढ़कर 71.98 अरब डॉलर, जबकि चांदी का आयात लगभग 149.48 फीसदी उछलकर 12.05 अरब डॉलर पहुंच गया था।

विशेषज्ञ बोले- गैर-जरूरी आयात पर लगाम जरूरी

Federation of Indian Export Organisations (FIEO) के डायरेक्टर जनरल और CEO Ajay Sahai के मुताबिक, देश के निर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल और जरूरी इंटरमीडिएट सामान का आयात आवश्यक है। हालांकि, गैर-जरूरी आयात पर संयम जरूरी है।

उन्होंने सोने को ऐसी संपत्ति बताया जिसका आर्थिक योगदान तभी अधिक हो सकता है जब उसका उत्पादक इस्तेमाल किया जाए। उनके मुताबिक, सोने को केवल निष्क्रिय संपत्ति के तौर पर रखने से अर्थव्यवस्था को सीमित फायदा मिलता है।

विदेशी ट्रिप के बजाय घरेलू पर्यटन पर जोर

प्रधानमंत्री की अपील का एक दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा घरेलू पर्यटन से जुड़ा है। भारत में अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, इतिहास और पर्यटन स्थलों की विविधता को देखते हुए विशेषज्ञ भी देश के भीतर यात्रा को बढ़ावा देने को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानते हैं।

अगर भारतीय पर्यटक विदेशी गंतव्यों के बजाय घरेलू पर्यटन पर खर्च करते हैं, तो इसका लाभ होटल, परिवहन, स्थानीय दुकानदारों, रेस्तरां और छोटे कारोबारों तक पहुंच सकता है।

यानी ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संदेश सिर्फ उत्पाद खरीदने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद घरेलू मांग, पर्यटन और कारोबार को मजबूत करके देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देना भी है।