रिंकू चौधरी की ‘A Soliloquist’s Journal’ प्रदर्शनी 4-9 सितंबर तक दिल्ली में होगी। पेंटिंग्स में घर, स्मृति, पहचान और अनकही भावनाओं की कहानी दिखेगी।
नई दिल्ली। घर की रोजमर्रा की जिंदगी बाहर से जितनी सामान्य दिखाई देती है, उसके भीतर भावनाओं, रिश्तों, यादों और दबे हुए सवालों की एक अलग दुनिया चलती रहती है। कलाकार रिंकू चौधरी की नई एकल प्रदर्शनी A Soliloquist’s Journal इसी अनकही दुनिया को सामने लाने की कोशिश करती है।
Art Incept की ओर से प्रस्तुत और Prima Kurien द्वारा क्यूरेट की गई यह प्रदर्शनी 4 से 9 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के Shridharani Gallery, Tansen Marg में आयोजित होगी। प्रदर्शनी में रिंकू चौधरी की ऐसी पेंटिंग्स शामिल हैं, जिनमें घरेलू जीवन, स्मृति, पहचान, भावनात्मक दबाव और रोजमर्रा में दोहराए जाने वाले अनुभवों को केंद्र में रखा गया है।
रिंकू का काम घर को सिर्फ एक जगह या इंटीरियर के रूप में नहीं देखता। उनके लिए घर एक ऐसा मनोवैज्ञानिक स्पेस है, जहां रिश्ते, चुप्पियां, आदतें और दबे हुए भाव लगातार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं।
Rinku Choudhary Art: घर की जिंदगी में छिपे भावों की पड़ताल
रिंकू चौधरी कैनवास और कागज पर काम करती हैं। उनकी पेंटिंग्स कई परतों में तैयार होती हैं। अलग-अलग माध्यमों से सतह पर रंग और आकृतियां बनाई जाती हैं, फिर कहीं उन्हें ढका जाता है और कहीं जानबूझकर तोड़ा या बाधित किया जाता है। इस प्रक्रिया में घरेलू कमरों या परिवार के दृश्यों की सीधी तस्वीर सामने नहीं आती। इसके बजाय दर्शक उस मानसिक दुनिया में पहुंचता है, जहां दिनचर्या, चुप्पी, याद और भावनाएं एक साथ मौजूद हैं।
उनकी कई रचनाओं में पुरुष और महिला आकृतियों को अलग-अलग रखा गया है। यह दूरी सिर्फ रचना का हिस्सा नहीं लगती, बल्कि इसके जरिए लैंगिक भूमिका, वर्चस्व, पहचान और अपने भीतर की आवाज को दबाने जैसे सवाल भी सामने आते हैं। Art Incept की फाउंडर Gayatri Singh के मुताबिक, रिंकू का काम घरेलू जीवन को केवल चित्रित नहीं करता, बल्कि उसके भीतर मौजूद मनोवैज्ञानिक स्पेस को सामने लाता है।
Joint Family में बीता बचपन बना कला की बड़ी प्रेरणा
रिंकू चौधरी की कला को समझने के लिए उनके बचपन की तरफ देखना जरूरी है। वह एक बड़े संयुक्त परिवार में पली-बढ़ीं। घर में रहते हुए उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही यह महसूस किया कि लड़की होने के कारण उनके लिए कुछ सीमाएं तय थीं। उन्हें शाम के बाद घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। ऐसी पाबंदियां उनके लिए धीरे-धीरे निरीक्षण का विषय बन गईं। परिवार के लोग, घर का माहौल और रोजमर्रा की घटनाएं उनकी कला में आने लगीं।
समय के साथ घर उनके लिए सिर्फ यादों की जगह नहीं रहा। वह घरेलू रिश्तों के भीतर काम करने वाली भावनात्मक संरचनाओं को समझने का माध्यम बन गया। उनकी पेंटिंग्स में इसी अनुभव की छाप दिखाई देती है—बिना किसी बड़े शोर या सीधे बयान के।
D.W. Winnicott के ‘True Self’ और ‘False Self’ का असर
रिंकू चौधरी की कला पर ब्रिटिश मनोविश्लेषक D. W. Winnicott के विचारों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव है। Winnicott ने व्यक्ति के ‘True Self’ और ‘False Self’ के बीच अंतर की बात की थी। रिंकू के काम में यह विचार सहज और कई बार बहुत सूक्ष्म तरीके से दिखाई देता है। उनके चित्रों में अचानक किए गए ब्रश स्ट्रोक, एक-दूसरे के ऊपर आती आकृतियां और बिखरे हुए निशान किसी व्यवस्थित कहानी के बजाय भीतर चल रही हलचल का एहसास देते हैं।
एक महिला का कुर्सी पर सहज ढंग से बैठा हुआ बार-बार दिखाई देने वाला रूप भी उनके काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसके आसपास बिखरे हुए निशान कई बार ऐसे लगते हैं जैसे किसी के विचार कागज या कैनवास पर अचानक फैल गए हों। यह उस अंदरूनी संघर्ष की तरफ इशारा करता है, जहां व्यक्ति खुद को व्यक्त करना चाहता है, लेकिन परिस्थितियां उसे लगातार रोकती भी हैं।
Mary Cassatt से Arpita Singh तक, कई कलाकारों से मिली दृश्य भाषा
रिंकू चौधरी की कला पर अलग-अलग कलाकारों और कला परंपराओं का प्रभाव रहा है। इनमें Mary Cassatt की महिलाओं और घरेलू जीवन की अंतरंग प्रस्तुतियां, Arpita Singh की figurative और folkloric visual language तथा Paul Klee, Wassily Kandinsky और Tyeb Mehta के रंग और रूप के प्रयोग शामिल हैं।
लेकिन इन प्रभावों का इस्तेमाल किसी एक शैली की नकल के तौर पर नहीं होता। रिंकू इन्हें अपनी निजी स्मृतियों और अनुभवों के साथ मिलाकर एक अलग दृश्य भाषा तैयार करती हैं। उनकी पेंटिंग्स में व्यक्तिगत यादें भी लगातार लौटती रहती हैं। दिल्ली-6 में बचपन के घर की छत से दिखाई देने वाले पक्षी और उनका प्यारा कुत्ता ऐसी ही स्मृतियों के प्रतीक हैं। ये चीजें सिर्फ बीते समय की याद नहीं हैं। इनके जरिए समय, अपनापन, जुड़ाव और खो चुकी चीजों का भाव सामने आता है।
Coronavirus Pandemic ने घर को देखने का नजरिया और बदला
कोरोना महामारी के दौरान जब घर लंबे समय तक लोगों के लिए रहने, काम करने और सोचने की एकमात्र जगह बन गया, तब रिंकू चौधरी का घरेलू जीवन को लेकर जुड़ाव और गहरा हुआ। उन्होंने अपने आसपास की महिलाओं को देखा—पत्नी, मां और देखभाल करने वाली महिलाओं को, जिनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां अक्सर दिखाई तो देती हैं, लेकिन उनसे जुड़ा भावनात्मक श्रम नजरअंदाज कर दिया जाता है।
महामारी के दौरान वही दिनचर्याएं और ज्यादा स्पष्ट हो गईं। एक जैसे काम, लगातार जिम्मेदारियां और लंबे समय तक घर के भीतर रहना उनके लिए सिर्फ सामाजिक स्थिति नहीं थी, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक अनुभव भी था। इन्हीं अनुभवों ने उनकी कला को प्रभावित किया। हालांकि उनकी पेंटिंग्स इन घटनाओं की सीधी कहानी नहीं सुनातीं। इसके बजाय वे घरेलू जीवन के मनोवैज्ञानिक निशानों को दर्ज करती हैं।
Contemporary Feminism: बिना नारे के उठते हैं बड़े सवाल
क्यूरेटर Prima Kurien के मुताबिक, रिंकू चौधरी का काम समकालीन नारीवाद का एक शांत लेकिन प्रभावी रूप सामने रखता है। उनकी पेंटिंग्स में सीधे सामाजिक बयान या बड़े नारे नहीं मिलते। इसके बजाय जेस्चर, रंग, संरचना और खाली जगहों के जरिए घरेलू जीवन की संरचनाएं बोलती हैं।
यही उनकी कला की खासियत भी है। दर्शक किसी सामान्य घरेलू दृश्य को देखकर आगे बढ़ सकता है, लेकिन थोड़ी देर रुकने पर उसी दृश्य में मौजूद तनाव, चुप्पी, याद और भावनात्मक दूरी दिखाई देने लगती है। रिंकू का काम दर्शक को परिचित चीजों के पीछे देखने के लिए मजबूर करता है—उन भावनाओं तक, जो रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर कही नहीं जातीं।
Rinku Choudhary की कला शिक्षा और प्रमुख प्रदर्शनियां
रिंकू चौधरी का जन्म 1992 में नई दिल्ली में हुआ। उन्होंने नई दिल्ली के College of Art से Painting की पढ़ाई की और 2018 में वहीं से MFA पूरा किया। उनकी कला में रोजमर्रा के जीवन में लगातार दोहराए जाने वाले विचारों और भावनाओं की पड़ताल होती है। घर उनके लिए एक साथ विषय भी है और रूपक भी।
वह मुख्य रूप से कैनवास और कागज पर काम करती हैं। कई परतों वाले माध्यमों के जरिए वह ऐसी सतहें तैयार करती हैं, जो घरेलू इंटीरियर को सीधे दिखाने के बजाय उसके भीतर मौजूद अनकहे संबंधों और मनोवैज्ञानिक स्थितियों को सामने लाती हैं।
उनकी प्रमुख संस्थागत और बिएनाले प्रदर्शनियों में 2023 में Red Fort, New Delhi में India Art, Architecture & Design Biennale, 2022 में MOMUS Museum of Contemporary Art, Thessaloniki की Group Exhibition, 2019 में इसी संग्रहालय की Selected Exhibition और 2018 में Total Arts Gallery, Dubai International Financial Centre में प्रदर्शनी शामिल हैं।
Awards and Grants: रिंकू को मिले कई सम्मान
रिंकू चौधरी को उनके काम के लिए कई पुरस्कार और ग्रांट भी मिल चुके हैं। इनमें शामिल हैं-
- Shrishti Art Grant (AIF) 2020
- Delhi State Award
- Prafulla Dahanukar Art Foundation 2018
- Women Artist Award
- Prafulla Dahanukar Art Foundation 2017
उन्हें 62nd National Exhibition, Lalit Kala Akademi, 2020–21 के लिए भी चुना गया था।
इसके अलावा उनके चयनित कार्यक्रमों और रेजिडेंसी में Sold Out Young Collectors Programme, India Art Fair Parallel, 2024, 1Shantiroad Extended Residency Programme, Bengaluru, 2022 और India–Korea Cultural Exchange (Hyundai), 2017 शामिल हैं।
Rinku Choudhary Paintings कई प्रतिष्ठित Collections में शामिल
रिंकू चौधरी की कलाकृतियां कई निजी और संस्थागत संग्रहों का हिस्सा हैं। इनमें Kumar Mangalam Birla, Sidharth Somaiya, G.R. Iranna, MOMUS Museum of Contemporary Art, Thessaloniki, Boston Consulting Group, Sunmax Collections और All India Fine Arts and Crafts Society शामिल हैं।
Art Incept का फोकस उभरते कलाकारों पर
रिंकू चौधरी की इस प्रदर्शनी को प्रस्तुत करने वाला Art Incept ऐसे कलाकारों को सामने लाने पर जोर देता है, जिनका काम वास्तविक जीवन, जगह, स्मृति और रोजमर्रा के अनुभवों से निकलता है। संस्था की सोच है कि कला सिर्फ महानगरों में मौजूद चर्चित आवाजों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन कलाकारों और समुदायों की कहानियां भी सामने आनी चाहिए, जिनकी आवाज अक्सर शोर में दब जाती है।
Art Incept के अनुसार, वह ऐसी कला को महत्व देता है जो बाजार की मांग के हिसाब से तैयार होने के बजाय कलाकार के अनुभव से पैदा होती है। पिछले पांच वर्षों से Art Incept दक्षिण एशिया के उभरते कलाकारों के साथ काम कर रहा है। संस्था कलाकारों के साथ लंबे समय तक जुड़ने और उनके काम को अपनी गति से विकसित होने देने पर जोर देती है।
गैलरी स्पेस से लेकर छोटे और घरेलू वातावरण तक, उसका उद्देश्य कला को बिना अनावश्यक फिल्टर के दर्शकों तक पहुंचाना और कलाकार की आवाज को उसकी अपनी शर्तों पर सामने रखना है।
Prima Kurien: कला और Exhibition Design की लंबी यात्रा
इस प्रदर्शनी की क्यूरेटर Prima Kurien Exhibition Designer और Art Evaluator हैं। उन्होंने 1989 में विज्ञापन की एक छोटी पारी के बाद कला के क्षेत्र में काम शुरू किया। 1995 से 2003 के बीच उन्होंने प्रयोगधर्मी गैलरी Art Inc चलाई। इस दौरान उन्होंने कई कलाकारों के करियर को आगे बढ़ाने और उन्हें प्रदर्शित करने में भूमिका निभाई। इनमें Himmat Shah, Valsan Kolleri, Anita Dube, Shilpa Gupta, A. Balasubramaniam, Anjum Singh, Surendran Nair और Shukla Sawant जैसे नाम शामिल हैं। 1997 में उन्होंने Roobina Karode द्वारा लिखी गई ‘Living on the Edge’ प्रकाशित की। उन्होंने कई अन्य प्रकाशनों पर भी काम किया है।
Prima Kurien ने Zarina Hashmi, J. Swaminathan और Sonia Khurana सहित कई महत्वपूर्ण कलाकारों की प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों के Exhibition Design पर भी काम किया है। इसमें KNMA project और Gallery Espace की Silver Anniversary के अवसर पर आयोजित Drawing Show भी शामिल हैं।
वह अब भी Exhibition Designer और Art Evaluator के रूप में काम कर रही हैं। कला के अलावा वह पारंपरिक Kerala Cuisine की विशेषज्ञ शेफ भी हैं।
कब और कहां होगी Rinku Choudhary की ‘A Soliloquist’s Journal’ प्रदर्शनी?
रिंकू चौधरी की एकल प्रदर्शनी A Soliloquist’s Journal 4 से 9 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होगी।
प्रदर्शनी से जुड़ी प्रमुख जानकारी:
- Artist: Rinku Choudhary
- Title: A Soliloquist’s Journal
- Presented by: Art Incept
- Curated by: Prima Kurien
- Dates: 4-9 सितंबर 2026
- Venue: Shridharani Gallery, Tansen Marg, New Delhi
यह प्रदर्शनी घरेलू जिंदगी के उन हिस्सों को देखने का मौका देती है, जिन्हें हम रोज देखते हैं, लेकिन अक्सर महसूस नहीं करते। रिंकू चौधरी की पेंटिंग्स में घर सिर्फ दीवारों और कमरों का नाम नहीं है। वहां यादें हैं, रिश्ते हैं, सीमाएं हैं, चुप्पियां हैं और अपनी पहचान तलाशता हुआ एक ‘मैं’ भी है।

