पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी आतंकियों के निशाने पर! पाकिस्तानी ISI हनी-ट्रैप नेटवर्क और जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में गड़बड़ी की साजिश का सनसनीखेज खुलासा। जानिए क्या है गर्लफ्रेंड का टेरर कनेक्शन?
कोलकाता: पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसे खतरनाक पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके निशाने पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी समेत कई वीआईपी थे। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संदिग्ध ऑपरेटिव मोहम्मद हमिम मंडल की गिरफ्तारी के बाद हुए इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन में गड़बड़ी फैलाने की कोशिशों से भी जुड़े हुए हैं।
VIP निगरानी और गर्लफ्रेंड के जरिए नेटवर्क! कैसे खुली 'हनी-ट्रैप' की खौफनाक साजिश?
इस पूरे मामले ने तब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया जब STF ने झारखंड के साहिबगंज जिले से अर्पिता सरकार नाम की एक महिला को दबोचा। अधिकारियों के मुताबिक, अर्पिता इस पूरे मॉड्यूल में एक बेहद शातिर 'हनी-ट्रैप' हथियार के रूप में काम कर रही थी।

- प्रभावशाली नेताओं से संपर्क: गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद हमिम मंडल कथित तौर पर व्हाट्सएप के जरिए अर्पिता के नियमित संपर्क में था।
- संवेदनशील डेटा की चोरी: मंडल ने पश्चिम बंगाल के रसूखदार राजनीतिक नेताओं के करीब पहुंचने और उनकी बेहद निजी व संवेदनशील जानकारियां जुटाने के लिए अर्पिता का इस्तेमाल किया।
- व्हाट्सएप चैट से खुलासा: पुलिस ने दोनों के बीच हुई एन्क्रिप्टेड बातचीत को रिकवर कर लिया है, जिससे साफ होता है कि यह नेटवर्क टारगेट को फंसाकर खुफिया जानकारी सीमा पार भेजने में जुटा था।
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ISI और शहजाद भट्टी नेटवर्क: सोशल मीडिया से शुरू हुआ खेल

जांचकर्ताओं का मानना है कि आरोपी मोहम्मद हमिम मंडल करीब एक साल पहले सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के जाल में फंसा था। पूछताछ में उसने कुबूल किया है कि उसके कुछ ऑनलाइन कॉन्टैक्ट्स ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और कुख्यात शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े होने का दावा किया था।
- कट्टरपंथ का पाठ: ऑनलाइन बातचीत के जरिए मंडल का ब्रेनवॉश किया गया और उसे बंगाल में एक नया जासूसी मॉड्यूल खड़ा करने का जिम्मा सौंपा गया।
- रेकी और सुरक्षा का अध्ययन: उसे वीआईपी नेताओं, नौकरशाहों और सुरक्षित ठिकानों की निगरानी करने, उनकी सुरक्षा व्यवस्था की कमियां ढूंढने और सीमा पार रिपोर्ट भेजने का काम मिला था।
- हथियारों का इंतजाम: एसटीएफ इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या मंडल को भविष्य में किसी बड़े हमले को अंजाम देने के लिए हथियार जुटाने के निर्देश मिले थे।

जंतर-मंतर कनेक्शन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा
एसटीएफ के आईजी गौरव शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि यह मॉड्यूल सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश की राजधानी दिल्ली से भी जुड़े थे। इसी नेटवर्क ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान माहौल बिगाड़ने की साजिश रची थी।
खुद सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले को देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बताया है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि राज्य मंत्री उमेश राय समेत कई अन्य नेता भी इस खूफिया निगरानी के दायरे में थे। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों की 14 दिनों की कस्टडी ली है और मंडल के आईफोन समेत अन्य डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि इस पूरे इंटरनेशनल टेरर सिंडिकेट की आखिरी कड़ी तक पहुंचा जा सके।
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