Rapist Akku Yadav : नागपुर में, रेपिस्ट अक्कू यादव बार-बार जमानत पर छूटकर आतंक मचाता रहा। न्याय में देरी से तंग आकर, 2004 में 200 महिलाओं ने अदालत परिसर में ही उसकी हत्या कर दी। बाद में, अदालत ने सभी महिलाओं को बरी कर दिया।

एक मशहूर कहावत है- 'इंसाफ में देरी, इंसाफ से इनकार जैसा है'। लेकिन अदालतों में कई मामले दशकों तक लटके रहते हैं और पीड़ितों की हालत बदतर हो जाती है। ऊपर से, जब हत्यारे और बलात्कारी बार-बार जमानत पर बाहर आ जाते हैं, तो पीड़ितों को डर के साए में जीना पड़ता है। जमानत पर बाहर घूम रहे ये अपराधी अक्सर शिकायत करने वालों को मार डालते हैं, एसिड फेंकते हैं या जानलेवा हमला करते हैं। उनकी सोच होती है कि एक और खून करने से क्या होगा, सज़ा तो एक ही मिलनी है। इसके बावजूद, अदालतों का बिना सोचे-समझे ऐसे आरोपियों को जमानत देना एक बड़ी त्रासदी बनी हुई है।

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रेपिस्ट अक्कू यादव की कहानी

ऐसा ही एक मामला रेपिस्ट अक्कू यादव की बर्बर हत्या का है। यह घटना महाराष्ट्र के नागपुर में हुई थी। साल 2004 की यह घटना आज भी वायरल होती रहती है। इस दरिंदे ने झुग्गी में रहने वाली एक लड़की से रेप कर उसकी हत्या कर दी थी। 10 साल तक जब भी कोर्ट में सुनवाई होती, उसे आसानी से जमानत मिल जाती थी। इससे पहले जब लड़की के घरवाले उसके खिलाफ रेप का केस दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने हंसकर उन्हें ही बेइज्जत कर दिया था। इसी वजह से अक्कू यादव और उसके गैंग की हिम्मत बढ़ गई थी। उनका काम इलाके की महिलाओं को परेशान करना, लोगों को डरा-धमका कर पैसे वसूलना और लड़कियों से छेड़छाड़ करना बन गया था। इस वहशी ने छोटी-छोटी बच्चियों को भी नहीं बख्शा। जो भी इस गैंग का विरोध करता, उसकी हत्या कर दी जाती थी और लाश रेलवे ट्रैक पर फेंक दी जाती थी। जब लोगों का दबाव बढ़ता, तो पुलिस उसे गिरफ्तार करने का नाटक करती, लेकिन वह बार-बार जमानत पर बाहर आ जाता और उसका आतंक फिर से शुरू हो जाता।

महिलाओं ने कानून हाथ में लिया

आखिरकार, वहां की महिलाओं को एहसास हुआ कि अब कानून को अपने हाथ में लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने सोचा कि अगर इंसाफ का इंतजार किया, तो और लाशें गिरेंगी। पुलिस से तो उस रेपिस्ट को सुरक्षा मिली हुई थी। महिलाओं ने ठान लिया कि अब चुप नहीं बैठना है। एक केस की सुनवाई के दौरान जब पुलिस अक्कू को कोर्ट ले जा रही थी, तभी 200 महिलाओं ने अपना प्लान बना लिया। 13 अगस्त 2004 को दोपहर 3 बजे, वहां जमा महिलाओं की भीड़ ने उसके चेहरे पर मिर्च पाउडर फेंका और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। पुलिस भी भीड़ को काबू नहीं कर पाई और वहां से भाग खड़ी हुई। महिलाओं ने उसकी पैंट उतारकर उसका प्राइवेट पार्ट काट दिया और चाकुओं से उस पर अनगिनत वार किए। दशकों के दर्द का हिसाब इन महिलाओं ने सिर्फ 15 मिनट में पूरा कर दिया था!

महिलाओं के हक में एकजुट हुए लोग

हत्या के बाद ये महिलाएं खुद पुलिस के पास गईं और बोलीं, 'चलो, हम कातिल हैं, हमें गिरफ्तार करो'। उन्हें देखकर पुलिस भी डर गई थी। अक्कू की मौत के बाद, पूरा समाज इन महिलाओं के समर्थन में एक सुर में खड़ा हो गया। वकीलों ने भी आवाज उठाई कि इन महिलाओं को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए। बाद में, कोर्ट ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए, सालों बाद फैसला सुनाया और सभी महिलाओं को बरी कर दिया।