US President Donald Trump Powers: अमेरिका में मध्यावधि चुनावी हार के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प की ताकत खत्म नहीं होती। जानिए अमेरिकी राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियां, वीटो, माफी और कमांडर-इन-चीफ के अधिकार यानी अमेरिकी राष्ट्रपति की वो शक्तियां, जिसके आगे कई बार संसद भी कमजोर पड़ जाती है।

Donald Trump Power: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजे हैरान करने वाले रहे। नतीजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिससे माना जा रहा है कि अब आगे के सालों में डोनाल्ड ट्रंप के लिए राजनीति की राह आसान नहीं होगी। संसद में उन्हें बार-बार विरोध का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन क्या सच में अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में हार का मतलब राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित होना है? जवाब है पूरी तरह नहीं! अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में हार का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति की सारी ताकत खत्म हो गई। डोनाल्ड ट्रम्प की राजनीति को समझने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकारों को समझना जरूरी है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास कुछ ऐसी शक्तियां हैं, जिनका इस्तेमाल वह संसद में विरोध बढ़ने या चुनाव में झटका लगने के बावजूद कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि राष्ट्रपति कानून से ऊपर है या उसे मनमानी करने की खुली छूट मिली हुई है। जानिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कौन से पावर हैं, जो उन्हें कमजोर नहीं पड़ने देते।

वीटो पावर: अमेरिकी राष्ट्रपति की सबसे बड़ी ढाल

ट्रम्प ने 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले CBS News को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति की वीटो पावर को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया था। इसका मतलब है कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदन किसी बिल को पास कर दें, तब भी राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर सकता है। राष्ट्रपति के वीटो को खत्म करने के लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। यानी साधारण बहुमत से डेमोक्रेट्स ट्रम्प की मर्जी के खिलाफ कानून नहीं बना पाएंगे।

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एग्जीक्यूटिव ऑर्डर: बिना संसद के भी फैसले

अमेरिकी राष्ट्रपति एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर सकता है। इसके जरिए वह सरकारी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दे सकता है कि मौजूदा कानूनों को कैसे लागू करना है। ट्रम्प इसका इस्तेमाल अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में कर सकते हैं। लेकिन एग्जीक्यूटिव ऑर्डर कोई नया कानून नहीं होता। इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है और अगला राष्ट्रपति इसे बदल या रद्द भी कर सकता है।

सेना की कमान सीधे राष्ट्रपति के हाथ में

अमेरिकी राष्ट्रपति देश की सेना का कमांडर-इन-चीफ होता है। यानी सेना की सर्वोच्च कमान उसके पास होती है। वह सैन्य अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले ले सकता है। हालांकि, युद्ध घोषित करने का संवैधानिक अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है। इसलिए राष्ट्रपति की सैन्य ताकत भी पूरी तरह असीमित नहीं है।

अपराधियों को माफी देने का अधिकार

राष्ट्रपति के पास संघीय यानी फेडरल अपराधों में दोषी लोगों को माफी देने और सजा कम करने का अधिकार है। इस मामले में उसकी शक्ति काफी व्यापक है। लेकिन वह राज्य के कानूनों के तहत हुई सजा को माफ नहीं कर सकता और न ही महाभियोग के मामलों में इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है।

बड़े अधिकारियों की नियुक्ति

ट्रम्प अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्रियों, राजदूतों, संघीय एजेंसियों के प्रमुखों और जजों की नियुक्ति कर सकते हैं। हालांकि, कई अहम नियुक्तियों के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। डेमोक्रेट्स के पास सीनेट का नियंत्रण होने से ट्रम्प के लिए अपनी पसंद के अधिकारियों को नियुक्त करना मुश्किल हो सकता है।

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तो क्या चुनाव में हार के बाद भी ट्रम्प का कुछ नहीं बिगड़ेगा?

बिल्कुल ऐसा नहीं है। 2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में जीत दर्ज कर ट्रम्प को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। जनवरी 2027 में नया कांग्रेस सत्र शुरू होने के बाद डेमोक्रेट्स सरकारी फैसलों की जांच कर सकते हैं, अधिकारियों को जवाबदेह बना सकते हैं, बजट पर दबाव डाल सकते हैं और महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई समर्थन चाहिए।

यानी असली बात यह है कि चुनाव में हारने से ट्रम्प की राष्ट्रपति वाली शक्तियां खत्म नहीं होंगी। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक है। लेकिन अब उन्हें हर बड़े फैसले पर राजनीतिक विरोध, संसदीय जांच और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके पास वीटो का हथियार जरूर है, लेकिन अमेरिकी लोकतंत्र में राष्ट्रपति भी संविधान और कानून से बंधा होता है।