UP Diwas : निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन बनाने हेतु 24 जनवरी को हर न्याय पंचायत में 'शिक्षा चौपाल' होगी। इसका उद्देश्य अभिभावकों व समुदाय को जोड़कर बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है। इसमें शिक्षकों व मेधावी बच्चों को सम्मानित भी किया जाएगा।

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से प्राप्त करने और शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश की सभी न्याय पंचायतों में 24 जनवरी, 2026 को यूपी दिवस के अवसर पर ‘शिक्षा चौपाल’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों (SMC), शिक्षकों और स्थानीय जनसमुदाय को निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों से जोड़ते हुए बच्चों की बुनियादी भाषायी और गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ करना है।

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बालवाटिका से बुनियादी शिक्षा तक जागरूकता 

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि शिक्षा चौपाल के माध्यम से बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष जोर दिया जाएगा। चौपाल में विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री, प्रिंट-रिच सामग्री, गणित किट, क्रियाशील पुस्तकालय, खेल सामग्री सहित डिजिटल संसाधनों जैसे स्मार्ट क्लास, ICT लैब, दीक्षा, खान अकादमी और टीचर्स ऐप की जानकारी भी साझा की जाएगी।

सम्मान और सहभागिता से बढ़ेगा उत्साह

 शिक्षा चौपाल के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, नामांकन व उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार करने वाले विद्यालयों, तथा मेधावी बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, अभिभावकों और SMC सदस्यों के योगदान के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्धजन और मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

₹10 हजार प्रति न्याय पंचायत

 सख्त वित्तीय दिशा-निर्देश शिक्षा चौपाल के आयोजन के लिए ₹10,000 प्रति न्याय पंचायत की दर से धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि टेंट, कुर्सी, साउंड सिस्टम, बैनर, जलपान, स्टेशनरी, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी आदि व्यवस्थाओं पर व्यय की जाएगी। व्यय का विवरण निर्धारित समयसीमा में प्रबंध पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।जिला और मंडलीय स्तर के अधिकारी कार्यक्रम का सतत अनुश्रवण करेंगे।