Aja Ekadashi 2026 Date: धर्म ग्रंथों में अजा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। ये एकादशी भाद्रपद मास में आती है। इसे जया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

Aja Ekadashi 2026 Kab Hai: ज्योतिष शास्त्र में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं। इनमें से सबसे पवित्र तिथि है एकादशी। ये तिथि एक महीने में 2 बार आती है। इस तरह साल में कुल 24 एकादशी होती है। इन सभी के नाम, महत्व, पूजा विधि और कथा अलग-अलग है। इनमें से भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। इसका एक और नाम जया भी है। इस बार अजा एकादशी की व्रत सितंबर 2026 में किया जाएगा। जानें इस एकादशी की सही डेट, पूजा विधि, मुहूर्त व अन्य खास बातें…

कब है अजा एकादशी 2026? (Aja Ekadashi Kab Hai)

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर, रविवार की शाम को 07 बजकर 29 मिनिट से शुरू होगी जो 7 सितंबर, सोमवार की शाम 05 बजकर 04 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 7 सितंबर, सोमवार को होगा, इसलिए इस दिन अजा एकादशी का व्रत किया जाएगा। व्रत का पारणा 8 सितंबर, मंगलवार को किया जाएगा।

ये भी पढ़ें-
Hartalika Teej 2026 Date: 13 या 14 सितंबर, कब करें हरतालिका तीज व्रत? जानें पूजा के मुहूर्त

अजा एकादशी 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त (Aja Ekadashi 2026 Shubh Muhurat)

सुबह 06:14 से 07:47 तक
सुबह 09:19 से 10:52 तक
दोपहर 12:00 से 12:49 तक (अभिजीत मुहूर्त)
सुबह 01:57 से 03:30 तक
शाम 05:02 से 06:35 तक

ये भी पढ़ें-
Neem Karoli Baba: बाबा नीम करौली की समाधि कहां है? बहुत कम लोग जानते हैं ये बात

अजा एकादशी व्रत-पूजा विधि (Aja Ekadashi Vrat-Puja Vidhi)

- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत के नियम एक दिन पहले से ही शुरू हो जाते हैं। इसलिए 6 सितंबर, रविवार की शाम सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- 7 सितंबर, सोमवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें। अगर कोई मनोकामना है तो संकल्प के समय उसे भी बोल सकते हैं।
- व्रत के दौरान मन और वाणी पर संयम रखें। किसी से झगड़ा न करें, गुस्सा करने से बचें और मन में नकारात्मक विचार न आने दें। अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।
- पूजा के लिए घर के साफ स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को तिलक लगाकर फूल और माला चढ़ाएं।
- घी का दीपक जलाएं और फल, फूल, अक्षत, रोली आदि पूजा सामग्री अर्पित करें। पूजा के समय 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः' मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान विष्णु को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं।
- भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें। पूजा पूरी होने के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और अजा एकादशी की कथा सुनें। संभव हो तो रात में जागकर भजन-कीर्तन या मंत्र जाप करें।
- 8 सितंबर, मंगलवार को ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दें। इसके बाद स्वयं भोजन करके व्रत का पारण करें। मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

अजा एकादशी व्रत कथा (Aja Ekadashi Katha)

सतयुग में इक्ष्वाकु वंश के राजा हरिश्चंद्र बहुत सत्यवादी और दानवीर थे। एक समय परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें अपना राज-पाट छोड़ना पड़ा और परिवार सहित कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को भी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाद में राजा हरिश्चंद्र ने ऋषि गौतम को अपनी परेशानी बताई। ऋषि ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत किया। धार्मिक मान्यता है कि इसके प्रभाव से उनकी सभी परेशानियां दूर हो गईं और उन्हें अपना खोया हुआ राज-पाट वापस मिल गया।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।