CIDSCON 2026 का आयोजन 20 से 23 अगस्त तक गांधीनगर में होगा। 950 से अधिक विशेषज्ञ और प्रतिनिधि संक्रामक रोग, AMR, TB, HIV, AI, फंगल इंफेक्शन और नई मेडिकल टेक्नोलॉजी पर चर्चा करेंगे। जानें सम्मेलन की खास बातें।

संक्रामक रोगों की बदलती चुनौती के बीच डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए गांधीनगर में एक बड़ा मंच तैयार हो रहा है। Clinical Infectious Diseases Society की 16वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस CIDSCON 2026 में भारत और विदेशों से संक्रामक रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता और माइक्रोबायोलॉजिस्ट एक जगह जुटेंगे। चार दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में इलाज से लेकर नई मेडिकल टेक्नोलॉजी तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

CIDSCON 2026 का आयोजन 20 से 23 अगस्त 2026 तक गांधीनगर के महात्मा मंदिर स्थित कन्वेंशन एंड एग्जीबिशन सेंटर में होगा। आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन में 950 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

22 अगस्त को होगा सम्मेलन का उद्घाटन

सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन 22 अगस्त को गुजरात के स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया करेंगे। इस दौरान एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR और एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप पर विशेषज्ञों द्वारा लिखी गई पुस्तक का भी अनावरण किया जाएगा। कार्यक्रम में भारत के अलावा अमेरिका और सिंगापुर समेत अन्य देशों के विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी भी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य संक्रामक रोगों के निदान, रोकथाम और उपचार में हो रही प्रगति को साझा करने के साथ नई चुनौतियों पर विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाना है।

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20 अगस्त से शुरू होंगी विशेष वर्कशॉप

CIDSCON 2026 की शुरुआत 20 अगस्त को विशेष वर्कशॉप की श्रृंखला के साथ होगी। इनमें संक्रामक रोगों की मेडिकल प्रैक्टिस से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर विशेषज्ञों के सत्र, केस आधारित चर्चाएं और प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। इस बार सम्मेलन में Artificial Intelligence यानी AI को भी विशेष जगह दी गई है। AI पर होने वाली वर्कशॉप में Large Language Models यानी LLMs से आगे इसके संभावित इस्तेमाल पर चर्चा होगी। खास तौर पर यह समझने की कोशिश की जाएगी कि संक्रामक रोगों की मेडिकल प्रैक्टिस में AI का व्यावहारिक इस्तेमाल कहां और किस तरह किया जा सकता है।

वर्कशॉप में प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स और समस्या समाधान से जुड़ी गतिविधियों में भी शामिल किया जाएगा। मानव चिकित्सकीय निर्णय और AI की संभावित भूमिका के बीच तुलना भी चर्चा का हिस्सा होगी।

AMR, TB, HIV से लेकर फंगल संक्रमण तक पर चर्चा

मुख्य सम्मेलन में संक्रामक रोगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इनमें Antimicrobial Resistance, Tropical Infections, Tuberculosis, HIV, Fungal Infections, Virology और Infection Control प्रमुख हैं। इसके अलावा एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप और कम प्रतिरक्षा क्षमता वाले मरीजों में होने वाले संक्रमणों पर भी विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। सम्मेलन में Next Generation Sequencing, Phage Therapy और AI-Based Clinical Practice जैसी उभरती तकनीकों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

गुजरात में AMR से निपटने की रणनीति पर खास सत्र

22 अगस्त को होने वाला एक विशेष सत्र गुजरात में Antimicrobial Resistance को नियंत्रित करने के प्रयासों पर केंद्रित रहेगा। इसमें राज्य की पहल, Gujarat State AMR Surveillance Network यानी GUJSAR-N, एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप कार्यक्रम की मॉनिटरिंग और AMR Dashboard के जरिए लैबोरेटरी डेटा आधारित रोग निगरानी पर चर्चा होगी। यह सत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने लगातार उभरती चुनौतियों में शामिल है। ऐसे में संक्रमणों की निगरानी, एंटीबायोटिक के उचित इस्तेमाल और डेटा आधारित रणनीति पर विशेषज्ञों का फोकस रहेगा।

युवा डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के लिए भी खास कार्यक्रम

CIDSCON 2026 में सिर्फ विशेषज्ञों के व्याख्यान ही नहीं होंगे। वैज्ञानिकों और युवा मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए चुनौतीपूर्ण मामलों पर चर्चा, विशेषज्ञों के साथ संवाद, अवॉर्ड प्रेजेंटेशन और पोस्टर राउंड आयोजित किए जाएंगे। स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और फेलोज के लिए भी विशेष सत्र रखे गए हैं। इससे उन्हें संक्रामक रोगों के क्षेत्र में हो रहे नए शोध और क्लिनिकल प्रैक्टिस से जुड़े अनुभवों को समझने का अवसर मिलेगा।

23 अगस्त को वैलेडिक्टरी सेशन के साथ CIDSCON 2026 का समापन होगा, जिसके बाद लंच का आयोजन किया जाएगा। आयोजक समिति की अध्यक्षता डॉ. अतुल के. पटेल कर रहे हैं, जबकि डॉ. हर्ष तोशनीवाल सह-आयोजक अध्यक्ष और डॉ. सुरभि मदन आयोजक सचिव की भूमिका में हैं। आयोजकों के मुताबिक, CIDSCON 2026 का उद्देश्य संक्रामक रोगों के क्षेत्र में वैज्ञानिक संवाद को मजबूत करना और उपचार, शोध तथा पेशेवर सहयोग के लिए नए अवसर तैयार करना है।

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