अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब ‘चीता स्टेट’ बन चुका है। कूनो में चीतों की संख्या 53 पहुंच गई है। राज्य सरकार अब किंग कोबरा और गैंडा लाने की तैयारी भी कर रही है।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण मध्यप्रदेश को आज “चीता स्टेट” के रूप में पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि दुनिया में वन्यजीवों की पुनर्स्थापना के सबसे सफल उदाहरणों में प्रोजेक्ट चीता शामिल हो चुका है।

भोपाल स्थित Indian Institute of Forest Management (IIFM) में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर आयोजित इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) प्री-समिट कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि श्योपुर के Kuno National Park में चीतों को दोबारा बसाना आसान नहीं था, लेकिन प्रदेश के वन विभाग ने लगातार प्रयास कर चीतों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार किया।
Kuno National Park Cheetah Project: भारत में अब 53 चीते
कार्यक्रम में कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि वर्ष 2022 में पहली बार नामीबिया से चीते भारत लाए गए थे। इसके बाद प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ा और इस वर्ष 18 नए शावकों का जन्म हुआ। इनमें से 14 शावक स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि भारत में जन्मी पहली मादा चीता ‘मुखी’ भी अब शावकों को जन्म दे चुकी है। वर्तमान में देश में कुल 53 चीते हैं, जिनमें 33 भारत में जन्मे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 100 साल बाद प्रदेश में 8 जंगली भैंसों की वापसी भी कराई गई है, जिससे Kanha National Park की जैव विविधता और मजबूत हुई है।
MP Wildlife Conservation: अब किंग कोबरा और गैंडा लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरीसृपों के संरक्षण और पुनर्वास पर भी तेजी से काम हो रहा है। राज्य सरकार अब प्रदेश में किंग कोबरा लाने की दिशा में तैयारी कर रही है। साथ ही गैंडा संरक्षण की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नेशनल पार्कों के आसपास वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि घायल या बीमार वन्यजीवों को तुरंत उपचार मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 33 दुर्लभ प्रजातियों के कछुए, घड़ियाल और गिद्धों का संरक्षण किया गया है। भोपाल से छोड़ा गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक पहुंच चुका है, जो संरक्षण कार्यों की सफलता को दर्शाता है।
Chambal और Kuno में घड़ियाल संरक्षण पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश “घड़ियाल स्टेट” के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखता है। चंबल और कूनो क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि मगरमच्छों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए भी उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं। इसके अलावा हाथियों के प्रबंधन के लिए वन विभाग विशेष बुलेटिन जारी करने जैसे नए प्रयोग कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हाथियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
MP Water Conservation Campaign: 56 हजार जल स्रोतों का निर्माण और जीर्णोद्धार
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण को लेकर भी बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक तीन महीने का जल संरक्षण महाअभियान जारी है। उन्होंने बताया कि अब तक 3000 करोड़ रुपए की लागत से 56 हजार जल स्रोतों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया जा चुका है। इसके अलावा 827 बावड़ियां, 1200 से अधिक तालाब और 212 नदियों में सफाई कार्य किए गए हैं। इस अभियान में करीब 18 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।
Bhupendra Yadav on Biodiversity: “जिसे बना नहीं सकते, उसे बिगाड़ें नहीं”
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि जिसे हम बना नहीं सकते, कम से कम उसे नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता से ही भोजन, दवाइयां और जीवन संभव है। दुनिया में मशीनीकरण कितना भी बढ़ जाए, लेकिन प्रकृति पर हमारी निर्भरता कभी खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत हासिल कर चुका है और 2030 तक लक्ष्य पूरी तरह पूरा कर लिया जाएगा।
Mission LiFE और Biodiversity Parks पर जोर
केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मिशन लाइफ’ पहल को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर में 2 लाख से अधिक जैव विविधता समितियां बनाई गई हैं। लोगों को अपनी बालकनी और घरों में छोटे जैव विविधता पार्क विकसित करने चाहिए ताकि पक्षियों और छोटे जीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
कार्यक्रम में लॉन्च हुए कई विशेष प्रोजेक्ट
कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए 20 बाइक और एक रेस्क्यू ट्रक को हरी झंडी दिखाई गई। इसके साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस की उपलब्धियों, मध्यप्रदेश के जैव विविधता विरासत स्थलों और राज्य जैव विविधता बोर्ड की ओर से संरक्षित तपोवन भूमि पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में डाक विभाग के ‘माय स्टैंप’, चीता संरक्षण ब्रोशर, भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट 2026 का विमोचन भी हुआ। साथ ही ABS एंड टू एंड पोर्टल और IIFM की डेटा ड्रिवन लैब का भी लोकार्पण किया गया।


