मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा चिंतन संगोष्ठी में कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण और जल संचयन के कार्यों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण और जनजागरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पानी के बेहतर उपयोग को लेकर सरकार के साथ आम लोग भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित जल संरक्षण और जन संचयन के कार्यों में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी विभाग मिलकर जल स्रोतों के संरक्षण और उनके पुनर्जीवन के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

नर्मदा चिंतन संगोष्ठी में सीएम मोहन यादव का संबोधन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में आयोजित नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में दादा गुरु भगवान ने अपने प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और दादा गुरु ने स्मित अपराजिता द्वारा लिखित पुस्तक “समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर” का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में समाजसेवा और जनहित के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को “समर्थ नर्मदा अलंकरण” से सम्मानित किया गया।
जल गंगा संवर्धन अभियान से जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कुएं, बावड़ियां, तालाब, नहर और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने बताया कि गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान आगामी 30 जून तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस लंबे अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं को फिर से उपयोगी बनाना और लोगों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शासन-प्रशासन के सहयोग से आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के विकास और विरासत संरक्षण विजन पर काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए विकास और विरासत संरक्षण के संदेश को मध्यप्रदेश गंभीरता से अमल में ला रहा है। राज्य सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
पंचायत विभाग कर रहा नदी उद्गम स्थलों पर काम
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि विभाग प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों में आम जनता की भागीदारी भी सराहनीय है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज और शासन को साथ आने की जरूरत
वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक गोपाल आर्य ने कहा कि भारत की परंपरा में प्रकृति संरक्षण का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने अमृता देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे देश में ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि जब शासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तब बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
दादा गुरु बोले- नदियां हमारी शक्ति का प्रतीक
कार्यक्रम में दादा गुरु ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने पूरी दुनिया को जीवन दर्शन दिया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति लगातार यह संदेश दे रही है कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी नदियों को देश की शक्ति बताते हुए कहा कि नर्मदा पथ केवल यात्रा नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का मार्ग भी है। दादा गुरु ने मध्यप्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान की सराहना की।
जनसहयोग से जल संरचनाओं के संरक्षण पर जोर
मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन नागर ने प्रदेश में जनभागीदारी के माध्यम से किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। बाल चित्रकार विक्रम लोधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को मां नर्मदा का चित्र भेंट किया। कार्यक्रम स्थल पर जैविक उत्पादों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने अवलोकन किया।


