MP के 27 जिलों पर आफत बनकर टूट सकता है मानसून! बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात और अरब सागर की नमी बना रही है 'परफेक्ट स्टॉर्म'। ग्वालियर से जबलपुर तक रेड अलर्ट जारी-क्या आपका इलाका भी खतरे में है? जानिए पूरी चेतावनी!

Heavy Rain Alert MP: मध्य प्रदेश के आसमान में इन दिनों बादल ही नहीं, बल्कि खतरे की गहराती परछाईं भी छाई हुई है। मौसम विभाग ने राज्य के 27 जिलों में आज और कल भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती सिस्टम और अरब सागर से आई नमी ने मिलकर प्रदेश के कई हिस्सों को जलमग्न करने की तैयारी कर ली है।

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मानसून ने बदला रुख, बना "डेडली कॉम्बिनेशन" 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की द्रोणिका रेखा (Monsoon Trough) अब श्रीगंगानगर से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गई है। इसके साथ ही, दक्षिण छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश तट पर हवा के ऊपरी भागों में चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है। यह सिस्टम अब कम दबाव वाले क्षेत्र में तब्दील होता दिख रहा है, जो प्रदेश में भारी वर्षा की मुख्य वजह बनेगा।

इन 27 जिलों में रेड अलर्ट-कहां बरसेंगे बादल, कहां बहेंगे रास्ते? 

भारी बारिश की चेतावनी वाले जिले: ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर। इन जिलों में आगामी 48 घंटों में 100 से 150 मिमी तक बारिश हो सकती है। बिजली गिरने, जलभराव, फसलों को नुकसान और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं की संभावना है।

कहां-कितनी हुई बारिश-पिछले 24 घंटे का स्कोरकार्ड?

  • सिवनी: 19.4 मिमी
  • इंदौर: 19 मिमी
  • खजुराहो: 17.4 मिमी
  • सीधी: 16.2 मिमी
  • मंडला: 13.2 मिमी
  • भोपाल: 10 मिमी
  • मलाजखंड: 11 मिमी
  • उज्जैन: 6.8 मिमी
  • रायसेन: 4 मिमी

और खतरनाक हो सकती है मूसलाधार बारिश

विशेषज्ञों के अनुसार, तीन दिन बाद एक और सक्रिय सिस्टम प्रदेश में दाखिल हो सकता है, जिससे रुक-रुककर तेज बारिश का सिलसिला और तेज़ हो जाएगा। खासकर नर्मदापुरम, भोपाल, राजगढ़, शहडोल, ग्वालियर और चंबल संभाग में अगले दो दिन अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता है।

क्या करें, क्या न करें-सावधानी ही बचाव 

  • मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।
  • निचले इलाकों से वाहन हटाएं।
  • खेतों की निगरानी करें, सिंचाई रोकें।
  • खुले मैदानों और पेड़ों से दूर रहें।
  • बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखें।