राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मध्यप्रदेश दौरे पर CM मोहन यादव ने कई बड़े दावे किए। क्या चीता प्रोजेक्ट ने MP को वैश्विक पहचान दिलाई? नक्सलवाद पर कैसी मिली सफलता? भोजशाला विवाद में क्या हुआ ऐतिहासिक फैसला? प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने का क्या है लक्ष्य? आखिर राष्ट्रपति के इस दौरे को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?

भोपाल/इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को इंदौर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की पवित्र भूमि और मां अहिल्याबाई होल्कर की नगरी में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति का आगमन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधियों के साथ उन्हें राष्ट्रपति के स्वागत का अवसर मिला।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मध्यप्रदेश दौरा क्यों है खास?

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राष्ट्रपति का यह दौरा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। इस दौरान वे कूनो क्षेत्र में चल रहे चीता प्रोजेक्ट का अवलोकन करेंगी और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए संचालित कार्यक्रमों में भी भाग लेंगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ब्रह्मकुमारी कार्यक्रम में भी होंगी शामिल

डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ईश्वरीय प्रजापति ब्रह्मकुमारी संस्था के कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रति सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता की ओर से राष्ट्रपति का स्वागत और अभिनंदन करते हुए विश्वास जताया कि उनका यह दौरा प्रदेशवासियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा।

CM मोहन यादव का नक्सलवाद पर बड़ी सफलता का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के दौर को समाप्त करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास कार्यों को गति मिली है और वहां शांति तथा प्रगति का नया माहौल बना है।

भोपाल गैस त्रासदी और यूनियन कार्बाइड कचरा निस्तारण पर बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड दुर्घटना से जुड़े लगभग चार दशक पुराने कचरे के सुरक्षित निपटान का कार्य पूरा किया गया है। इससे भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रदेश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।

नदी जोड़ो अभियान और चीता प्रोजेक्ट से मिली वैश्विक पहचान

डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में नदी जोड़ो अभियान सहित कई बड़े विकास कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं, जिनकी चर्चा देश और विदेश में हो रही है। उन्होंने कहा कि चीता प्रोजेक्ट के सफल संचालन ने मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

भोजशाला विवाद समाधान को बताया ऐतिहासिक फैसला

मुख्यमंत्री ने कहा कि बसंत पंचमी के अवसर पर धार स्थित भोजशाला में शांतिपूर्ण माहौल में पूजा और नमाज दोनों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि लगभग 700 वर्ष पुराने भोजशाला विवाद के समाधान की दिशा में जो निर्णय लिए गए हैं, वे ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।

मेडिकल कॉलेज, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ा विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों, पीएम एक्सीलेंस कॉलेजों तथा स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा से जुड़ी कई संस्थाओं की स्थापना की गई है। उन्होंने दावा किया कि देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश प्रमुख राज्यों में शामिल है। पीएम एक्सीलेंस कॉलेज की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू करने वाला मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में है।

सिंचाई, रोजगार और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

डॉ. यादव ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि आने वाले ढाई वर्षों में सिंचित क्षेत्र को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उनकी सरकार बनने से पहले प्रति व्यक्ति आय करीब 11 हजार रुपये थी, जो समय के साथ बढ़कर 1.30 लाख रुपये और अब 1.70 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों की आय और समृद्धि बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। अमृतकाल 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रति व्यक्ति आय को लगभग 22.50 लाख रुपये वार्षिक तक पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएंगे।