मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में नामीबिया से लाई गई चीता ने चार शावकों को जन्म दिया है। शावकों के जन्म की खबर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्विटर पर वीडियो और फोटो शेयर कर दी है।

भोपाल। मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से अच्छी खबर आई है। यहां नामीबिया से लाई गई चीता ने चार शावकों को जन्म दिया है। शावकों के जन्म की खबर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्विटर पर वीडियो और फोटो शेयर कर दी है।

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तीन दिन पहले कुनो नेशनल पार्क में साशा नाम की चीता की मौत हो गई थी। उसे किडनी संबंधी बीमारी थी। साशा नामीबिया से लाई गए आठ चीतों में शामिल थी। उसकी उम्र साढ़े चार साल से अधिक थी। साशा की मौत से प्रोजेक्ट चीता को बड़ा धक्का लगा था। हालांकि चार शावकों के जन्म से उम्मीद की नई किरण दिखी है। इससे उम्मीद बंधी है कि भारत में चीतों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है। विलुप्त घोषित किए जाने के सात दशक बाद पहली बार हुआ है कि किसी चीता ने भारत के जंगल में बच्चों को जन्म दिया है।

खुले जंगल में छोड़े गए गए चार चीते
पिछले साल प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी देश नामीबिया से आठ चीतों को लाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कुनो नेशनल पार्क के बाड़े में छोड़ा था। साशा की मौत के बाद अब नामीबिया से लाए गए सात चीते बचे हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने कहा है कि इनमें से तीन नर और एक मादा चीता को पार्क के खुले जंगल में छोड़ा गया है। वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं और शिकार कर रहे हैं।

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पिछले महीने दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को कुनो नेशनल पार्क लाया गया था। इन्हें फिलहाल क्वारंटीन में रखा गया है। सभी स्वस्थ और सक्रिय हैं। बता दें कि भारत में आखिरी चीता वर्तमान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में 1947 में मरा था। इसके बाद 1952 में चीता को भारत से विलुप्त घोषित किया गया था।

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