President Droupadi Murmu Visits Omkareshwar: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में क्या विशेष पूजा की? राष्ट्रपति ने भगवान शिव के समक्ष देशवासियों के लिए क्या कामना की? ओंकारेश्वर दौरे के दौरान राष्ट्रपति को कौन-कौन से स्मृति चिन्ह भेंट किए गए?

मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व वाले तीर्थस्थल ओंकारेश्वर में गुरुवार को एक विशेष अवसर देखने को मिला। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने मध्य प्रदेश दौरे के दौरान तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर पहुंचीं, जहां उन्होंने भगवान शिव के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन कर देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। उनके दौरे को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखने को मिला।

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नंदी प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर लिया आशीर्वाद

मंदिर परंपराओं के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सबसे पहले नंदी महाराज की प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान शिव का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विशेष पूजा संपन्न कराई। इस दौरान राष्ट्रपति ने देशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और राष्ट्र की प्रगति के लिए प्रार्थना की।

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है ममलेश्वर

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर देश के प्रमुख शिव धामों में गिने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष महत्व रखता है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राष्ट्रपति के इस दौरे को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताकर वहां की आध्यात्मिक परंपराओं की जानकारी भी ली।

जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत

ओंकारेश्वर पहुंचने पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रपति का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मंदिर प्रबंधन की ओर से राष्ट्रपति को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। उन्हें नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और भगवान ओंकारेश्वर तीर्थ का छायाचित्र स्मृति स्वरूप प्रदान किया गया। राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह धार्मिक दौरा न केवल आस्था से जुड़ा रहा, बल्कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी नई पहचान देने वाला माना जा रहा है।