राजस्थान के भरतपुर जिले में इन दिनों एक अनोखी शख्सियत चर्चा में हैं। जिनकी चर्चा लोग भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से करते हैं, जो ना तो सेना में और ना ही कोई डॉक्टर फिर भी 2 हजार से ज्यादा लोगों की जान बचा चुके हैं। 

भरतपुर. 23 मार्च यानी शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का बलिदान दिवस.… देश भर में क्रांतिकारियों को याद किया जा रहा है। लेकिन इस बीच राजस्थान का एक शख्स ऐसा है जो भगत सिंह को हर रोज, हर पल याद ही नहीं करता वह उनके जैसा ही हो गया है। भगत सिंह ने भी देश के दुश्मनों से देश की रक्षा की थी और लोगों की जान बचाई थी। ये शख्स भी लोगों की जान बचाने का काम कर रहा है। यह न तो डॉक्टर है और न ही सेना में कोई अधिकारी.... फिर भी अभी तक दो हजार से ज्यादा लोगों की जान बचा चुका है। दरअसल हम बात कर रहे हैं राजस्थान के भरतपुर जिले में रहने वाले ..... भगत सिंह की।

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भरतपुर की यह अनोखी शख्सियत चर्चा में

राजस्थान के भरतपुर जिले में इन दिनों एक अनोखी शख्सियत चर्चा में है। जब वह सड़क पर निकलते हैं, तो लोग उन्हें देखकर चौंक जाते हैं। लंबी मूंछें, भगत सिंह जैसी टोपी और चेहरे पर वही क्रांतिकारी तेज—लोग कहते हैं, "अरे, भगत सिंह लौट आया!" लेकिन असल में यह कोई और नहीं, बल्कि लाखन सिंह हैं, जिन्होंने भगत सिंह की विचारधारा को अपने जीवन का मिशन बना लिया है।

रक्तदान को बनाया जीवन का मकसद

 भरतपुर के नदबई के पास चैनपुरा गगवाना गांव के रहने वाले लाखन सिंह अब तक 47 बार रक्तदान कर चुके हैं और 32 से अधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन कर चुके हैं। उनका मानना है कि "खून देने से किसी की जान बच सकती है, तो यह किसी भी देशभक्ति से कम नहीं।" वे राजस्थान के भरतपुर, अलवर और जयपुर जिलों में लगातार रक्तदान शिविर लगवाते हैं ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर रक्त मिल सके।

क्यों कहते हैं लोग उन्हें ‘राजस्थान का भगत सिंह’? 

  • लाखन सिंह का हुलिया बिल्कुल भगत सिंह जैसा है। यही वजह है कि जब वे बाजार में निकलते हैं, तो लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं। वे केवल भगत सिंह जैसे दिखने की कोशिश नहीं करते, बल्कि उनके विचारों को भी आत्मसात कर चुके हैं। लाखन सिंह कहते हैं, "भगत सिंह ने देश के लिए जान दी थी, मैं लोगों को रक्त देकर उनकी जान बचा रहा हूं।"
  • मेडिकल कैंप और समाज सेवा रक्तदान के अलावा लाखन सिंह ने अब तक तीन ईएनटी (कान, नाक और गला) चिकित्सा शिविर भी लगाए हैं। इन शिविरों में 4,000 से अधिक मरीजों की जांच की गई और 250 लोगों के ऑपरेशन भी किए गए। यह सब कुछ वे ‘शहीद आज़ाद भगत बोस’ नाम की संस्था के जरिए कर रहे हैं, जिसे उन्होंने खुद शुरू किया है।

एथलीट और रोडवेज कंडक्टर—हर जगह दिखाया दम! 

लाखन सिंह सिर्फ समाजसेवा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक बेहतरीन एथलीट भी हैं। उन्होंने अब तक 39 गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर अपने जिले का नाम रोशन किया है। इतना ही नहीं, वे राजस्थान रोडवेज में बतौर कंडक्टर काम करते हैं, जहां उनकी सेवा भावना के लिए उन्हें ‘यात्री मित्र’ पुरस्कार भी दिया गया।

"रक्त की एक बूंद से बच सकती है जान"

 लाखन सिंह का संदेश साफ है—"रक्तदान महादान है। एक इंसान ही दूसरे इंसान की जान बचा सकता है।" वे चाहते हैं कि हर व्यक्ति साल में कम से कम एक बार रक्तदान जरूर करे ताकि किसी को भी रक्त के अभाव में जान न गंवानी पड़े।