योगी सरकार की पहल से यूपी के आंगनवाड़ी केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मजबूत केंद्र बन रहे हैं। पोषण ट्रैकर, संभव अभियान और सरकारी योजनाओं के जरिए करोड़ों महिलाओं और बच्चों को लाभ मिला है।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है। प्रदेश के करीब एक लाख 90 हजार आंगनवाड़ी केंद्र अब केवल पोषाहार वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और धात्री माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित मातृत्व के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।

प्रदेश में अब तक 2 करोड़ 12 लाख बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को अनुपूरक पुष्टाहार योजनाओं का लाभ मिल चुका है। इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में पांच प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। वहीं संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 84 से ऊपर पहुंच गया है, जिसे मातृ सुरक्षा अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
तकनीक से मजबूत हुए आंगनवाड़ी केंद्र और पोषण सेवाएं
योगी सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए पोषाहार वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। अब अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बायोमीट्रिक प्रणाली लागू की गई है, जिससे लाभार्थियों तक सही तरीके से सेवाएं पहुंच रही हैं।
कुपोषण और पोषण स्तर की सही पहचान के लिए सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को चार प्रकार के ग्रोथ मॉनीटरिंग उपकरण और मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही पोषण ट्रैकर के जरिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।
पोषण ट्रैकर और प्रशिक्षण से बढ़ी निगरानी व्यवस्था
पोषण ट्रैकर के सफल संचालन के लिए एक लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस अभियान में कार्यकुशलता मापन के तहत 98 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है, जिसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रदेश में 23 हजार से अधिक सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 266 नए आंगनवाड़ी केंद्रों को भी स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में सेवाएं और मजबूत होंगी।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से लाखों माताओं को लाभ
प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 60 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। वहीं जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार की इन योजनाओं का असर मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी के रूप में दिखाई दे रहा है। इससे महिलाओं में सुरक्षित मातृत्व को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।
जनप्रतिनिधियों ने गोद लिए हजारों आंगनवाड़ी केंद्र
प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा साढ़े छह हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र गोद लिए गए हैं। इससे इन केंद्रों की निगरानी, संसाधनों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं में सुधार आया है। योगी सरकार का मानना है कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव होती है। मातृ दिवस के अवसर पर प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था इसी सोच को और मजबूत करती दिखाई दे रही है।
'संभव अभियान' से कुपोषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
प्रदेश में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए चलाया जा रहा “संभव अभियान” भी प्रभावी साबित हो रहा है। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। इसके अलावा 2.5 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों का पंजीकरण कर उन्हें विशेष पोषण सेवाओं से जोड़ा गया है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिल रहा हॉट कुक्ड मील
प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर 03 से 06 वर्ष आयु वर्ग के 35 लाख से अधिक बच्चों को प्रतिदिन हॉट कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलने के साथ उनके शारीरिक विकास में भी मदद मिल रही है। इस योजना के संचालन के लिए 60 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है। इसके माध्यम से महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा जा रहा है।


