रामनवमी 2026 पर अयोध्या में भव्य उत्सव मनाया गया। रामलला का सूर्य तिलक आकर्षण का केंद्र रहा। लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, मंदिरों में पूजा, भजन-कीर्तन और भंडारों का आयोजन हुआ। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए।
अयोध्या। पावन नगरी अयोध्या में शुक्रवार को रामनवमी का पर्व भक्ति, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। भगवान राम के जन्म के पावन क्षण पर पूरा वातावरण “भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला” के जयघोष से गूंज उठा। यह दिव्य ध्वनि न केवल कानों को आनंदित कर रही थी, बल्कि हर श्रद्धालु के मन को भी भावविभोर कर रही थी।
सूर्य तिलक का अद्भुत दृश्य: आस्था और विज्ञान का संगम
राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के जन्मोत्सव पर एक विशेष क्षण देखने को मिला, जब सूर्य की किरणों से भगवान का ‘सूर्य तिलक’ किया गया। ठीक दोपहर 12 बजे सूर्य की स्वर्णिम किरणें वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से गर्भगृह में पहुंचीं और लगभग चार मिनट तक रामलला के मस्तक पर विराजमान रहीं। यह दृश्य आस्था और आधुनिक विज्ञान के अनोखे मेल का प्रतीक बना, जिसे लाखों श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष और लाइव प्रसारण के जरिए देखा।
मंदिरों में सजावट, भजन-कीर्तन और अभिषेक का माहौल
रामनवमी के अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर को फूलों, रोशनी और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था। सुबह से ही मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन चलता रहा। रामलला का विधिवत अभिषेक किया गया और दोपहर 12 बजे प्रकट उत्सव के साथ सूर्य तिलक का मुख्य कार्यक्रम संपन्न हुआ।
वैज्ञानिक तकनीक से सटीक समय पर सूर्य तिलक
इस विशेष सूर्य तिलक प्रणाली को बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इसमें सूर्य की किरणों को इस तरह निर्देशित किया जाता है कि वे ठीक 12 बजे भगवान के मस्तक पर तिलक करें। यह परंपरा हर वर्ष रामनवमी पर निभाई जाती है और यह भारत की प्राचीन ज्योतिष, वास्तु ज्ञान और आधुनिक ऑप्टिकल साइंस का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रसाद वितरण और भंडारों में उमड़ी भीड़
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच जगह-जगह भंडारे आयोजित किए गए। मथुरा से लाई गई लगभग 5 क्विंटल पंजीरी और लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किए गए। राम पथ, सरयू घाट और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं का सैलाब देखने को मिला।
56 भोग और हजारों मंदिरों में उत्सव
रामलला को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इसके अलावा दशरथ महल, कनक भवन और हनुमान गढ़ी सहित अयोध्या के करीब 8,000 मंदिरों में विशेष पूजा, कीर्तन और सत्संग का आयोजन हुआ।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। शहर को कई जोन और सेक्टर में बांटा गया। ड्रोन निगरानी, एंटी-ड्रोन सिस्टम, अतिरिक्त पुलिस बल, ट्रैफिक प्लान और होल्डिंग एरिया जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इस सख्त व्यवस्था के चलते पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश: आस्था और आत्मगौरव का प्रतीक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनवमी के अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रामलला का सूर्य तिलक आस्था, आत्मगौरव और अध्यात्म का प्रतीक है। उनके अनुसार यह आयोजन सनातन संस्कृति की चेतना को जागृत करता है और भारत को उसकी मूल आत्मा से जोड़ता है।
श्रद्धालुओं की भावनाएं: आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव
देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने इस क्षण को जीवन का यादगार अनुभव बताया। प्रयागराज से आई एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि यह सूर्य तिलक प्रभु राम की दिव्य ज्योति का प्रतीक है, जो पूरे विश्व को प्रकाशित करती है। वहीं अन्य श्रद्धालुओं का मानना है कि इस आयोजन ने समाज में नई ऊर्जा और एकता का संचार किया है।
35 लाख श्रद्धालुओं का आगमन: आस्था का महासागर
रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। जिला प्रशासन के अनुसार 26 और 27 मार्च को लगभग 35 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। राम मंदिर में दोपहर तक करीब 3.5 लाख लोगों ने दर्शन किए, जबकि देर रात तक यह संख्या 4 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं कीं, जिससे दर्शन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रही।


