आने वाले त्योहारों से ठीक पहले चीनी के दाम बढ़ गए हैं, जिससे आम आदमी की चिंता बढ़ गई है. पिछले एक महीने में कीमतों में 7% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ राज्यों में यह उछाल 15% तक है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए 30 नवंबर 2026 तक स्टॉक लिमिट लागू कर दी है.

त्योहारों का मौसम दरवाजे पर है और इससे ठीक पहले आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ाने वाली खबर आई है. देश में चीनी की कीमतें अचानक चढ़ने लगी हैं, जिससे मिठाइयों की मिठास फीकी पड़ सकती है. पिछले सिर्फ एक महीने के अंदर ही चीनी के औसत खुदरा दाम में करीब 7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

यह मूल्य वृद्धि पूरे देश में एक समान नहीं है, कुछ राज्यों में तो हालात और भी चिंताजनक हैं. आंकड़ों के मुताबिक, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चीनी की कीमतों में 15% तक का भारी उछाल देखा गया है. इस तेज बढ़ोतरी के पीछे त्योहारी मांग के साथ-साथ जमाखोरी की आशंका भी जताई जा रही है.

सरकार ने उठाया बड़ा कदम

कीमतों में इस अप्रत्याशित तेजी को काबू में करने और बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है. सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी पर स्टॉक लिमिट लगाने का फैसला किया है. इस कदम का मुख्य मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है, ताकि कृत्रिम किल्लत पैदा कर कीमतों को और न बढ़ाया जा सके.

यह कोई छोटा-मोटा फैसला नहीं है, बल्कि सरकार इस मसले पर लंबी तैयारी कर रही है. केंद्र द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, यह स्टॉक लिमिट 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी. यानी अगले दो साल से भी ज्यादा समय तक थोक और खुदरा व्यापारियों को तय सीमा से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने की इजाजत नहीं होगी, जो अपने आप में एक बड़ी बात है.