8th CPC Pension Calculation: 8वें वेतन आयोग में नई मांग से पेंशन ₹38,710 से ₹93,900 होने की चर्चा है। 2016 और 2026 के रिटायरमेंट गैप और यूनियनों के प्रस्ताव का गणित समझें।
8th Pay Commission Pension: 8वें वेतन आयोग को बने 10 महीने पूरे हो गए हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुआ यह आयोग अब कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी मांगों पर चर्चा के दौर में है। सबसे ज्यादा चर्चा इस समय पेंशन को लेकर है। खास बात यह है कि अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठन पुराने और नए रिटायर होने वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन के अंतर को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि 3.833 फिटमेंट फैक्टर, पेंशन पैरिटी और सिविलियन कर्मचारियों के लिए OROP (One Rank One Pension) जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। कहा जा रहा है कि अगर कर्मचारी संगठनों का सुझाया 3.833 फिटमेंट फैक्टर मान लिया गया, तो पेंशन ₹38,710 से उछलकर ₹93,900 तक पहुंच सकती है। सवाल यह है कि यह फॉर्मूला काम कैसे करता है और क्या इसका फायदा सभी पेंशनर्स को बराबर मिलेगा? आइए समझते हैं...
8वें वेतन आयोग में पेंशन का नया गणित क्या है?
इस पूरे मामले को समझने के लिए लेवल 6 जैसे सीनियर क्लर्क या सुपरवाइजर रैंक के दो कर्मचारियों का उदाहरण लेते हैं जिन्होंने एक बराबर नौकरी की। कर्मचारी 'A' जो 2016 में रिटायर हुआ। 7वें वेतन आयोग के तहत इसकी बेसिक पेंशन ₹24,500 तय हुई। 58% महंगाई राहत (DR) जोड़कर इसे आज हर महीने करीब ₹38,710 मिलते हैं। कर्मचारी 'B' जो 2026 में रिटायर होगा, अगर 8वें वेतन आयोग में 3.833 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो इसी पद से रिटायर होने वाले नए कर्मचारी की पेंशन सीधे लगभग ₹93,900 के आसपास बैठ सकती है। यही वह जगह है जहां ₹55,000 से ज्यादा का भारी अंतर पैदा हो रहा है। पद एक, काम एक, लेकिन रिटायरमेंट का साल अलग होने की वजह से पुराने पेंशनर्स काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं।
पेंशनर्स यूनियनों की 4 बड़ी मांगें क्या हैं?
NCJCM (नेशनल काउंसिल)
मुख्य मांग: कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए और वेतन-पेंशन संशोधन का चक्र 10 साल से घटाकर हर 5 साल किया जाए।
पेंशनर्स को क्या फायदा होगा: बेसिक पेंशन में सीधे भारी उछाल आएगा और कर्मचारियों को नए वेतन आयोग के लिए एक दशक लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
भारत पेंशनर्स समाज (BPS)
मुख्य मांग: 1 जनवरी 2026 से पहले और बाद के रिटायर कर्मचारियों में समानता लाई जाए, पेंशन आखिरी बेसिक सैलरी का 67% हो और न्यूनतम पेंशन ₹45,000 तय की जाए।
पेंशनर्स को क्या फायदा होगा: रिटायरमेंट के बाद जीवन स्तर में गिरावट नहीं आएगी और फैमिली पेंशन 50% होने से आश्रितों को भी मजबूत आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
रेलवे सीनियर सिटिजन्स (RSCWS)
मुख्य मांग: सेना की तर्ज पर सिविल और रेलवे कर्मचारियों के लिए भी 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) व्यवस्था लागू की जाए।
पेंशनर्स को क्या फायदा होगा: रिटायरमेंट की तारीख चाहे जो भी हो, एक ही पद और एक समान सेवा अवधि वाले सभी पेंशनर्स को बराबर पेंशन मिलेगी।
मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन, सर्वे ऑफ इंडिया (MSA)
मुख्य मांग: 8वें वेतन आयोग के नए पे-मैट्रिक्स में पुराने पेंशनर्स की पेंशन को वर्तमान रिटायर कर्मचारियों के समान स्टेज पर 'नोशनल' रूप से फिक्स किया जाए।
पेंशनर्स को क्या फायदा होगा: अलग-अलग पे-कमीशन के दौर में रिटायर हुए कर्मचारियों के बीच पेंशन की खाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
सिविलियन OROP और नोशनल फिक्सेशनक्यों जरूरी है?
जिस तरह सेना के जवानों के लिए 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) लागू है, ठीक वैसी ही मांग अब रेलवे, पोस्टल और सिविल विभागों के कर्मचारी भी कर रहे हैं। अगर सरकार सिर्फ 3.833 फिटमेंट फैक्टर देकर नए कर्मचारियों की पेंशन ₹93,900 कर देती है और पुराने कर्मचारियों के लिए नोशनल फिक्सेशन (कागजी तौर पर पुराने वेतन को नए स्केल के बराबर लाना) लागू नहीं करती, तो पुराने बुजुर्ग पेंशनर्स भारी नुकसान में रहेंगे। इसीलिए यूनियनों का कहना है कि नए वेतन आयोग का फायदा 2026 से पहले रिटायर हुए लोगों को भी उसी अनुपात में मिलना चाहिए।
8वें वेतन आयोग में आगे क्या होगा?
- सरकार ने इस आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का वक्त दिया है।
- 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ में और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में यूनियनों के साथ अहम बातचीत होनी है।
- जस्टिस रंजना देसाई पैनल की फाइनल रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंपी जा सकती है।


