8th Pay Commission: 8वां वेतन आयोग पर NC-JCM, AIDEF, FNPO, BPS और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने बहाली अवधि 15 से 11 साल करने की सिफारिश की; AINPSEF 10 और IRTSA 12 साल चाहते हैं। ₹35,000 पेंशन के 40% कम्यूटेशन पर 132 बनाम 180 महीने से ₹6.72 लाख का फर्क; NC-JCM ने 61 वर्ष/8.194 फैक्टर, BPS ने 1986–2023 बदलाव गिनाए।

8th Pay Commission Latest News: 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए कम्यूटेड पेंशन को लेकर एक अहम मांग सामने आई है। कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने सरकार से कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने की सिफारिश की है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कम्यूटेशन का विकल्प चुनने वाले पेंशनर्स को चार साल पहले पूरी मूल पेंशन वापस मिल सकेगी। ज्यादा मूल पेंशन पाने वालों को इसका लाभ और अधिक हो सकता है।

15 साल की जगह 11 साल की मांग क्यों?

मौजूदा नियमों के तहत पेंशन का एक हिस्सा कम्यूट कराने पर उस हिस्से की कटौती 15 साल तक जारी रहती है। इसके बाद कम्यूट की गई पेंशन बहाल होती है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जिस समय यह व्यवस्था बनाई गई थी, उस समय की ब्याज दर, जीवन प्रत्याशा और आर्थिक परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं। इसलिए अब बहाली की अवधि की दोबारा समीक्षा जरूरी है।

ज्यादातर संगठन 11 साल के पक्ष में

कम्यूटेड पेंशन की अवधि घटाने की मांग कई कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने उठाई है। NC-JCM, AIDEF, FNPO और भारत पेंशनर्स समाज समेत कई संगठन 11 साल में पेंशन बहाल करने के पक्ष में हैं। वहीं AINPSEF ने 10 साल की अवधि का सुझाव दिया है, जबकि IRTSA ने 12 साल में बहाली का प्रस्ताव रखा है।

₹35 हजार पेंशन वाले को कितना फायदा?

इस प्रस्ताव को एक उदाहरण से समझें। अगर किसी पेंशनर की मूल पेंशन ₹35,000 महीने है और वह 40 फीसदी पेंशन कम्यूट करता है, तो कम्यूट किया गया हिस्सा ₹14,000 होगा। मौजूदा व्यवस्था में इस रकम की कटौती 180 महीने यानी 15 साल तक होती है। इस दौरान कुल कटौती ₹25.20 लाख बैठती है।

अगर बहाली की अवधि 11 साल कर दी जाती है, तो कटौती 132 महीने तक होगी। इस तरह कुल कटौती ₹18.48 लाख रह जाएगी। दोनों रकम के बीच ₹6.72 लाख का अंतर है। यानी प्रस्ताव लागू होने पर इस उदाहरण में पेंशनर को चार साल पहले पूरी पेंशन मिलने लगेगी।

NC-JCM ने कम्यूटेशन फैक्टर से समझाया हिसाब

NC-JCM ने भी कम्यूटेशन के मूल्य और पेंशन कटौती के आधार पर अपनी गणना पेश की है। संगठन के अनुसार, 61 साल की उम्र में कम्यूटेशन करने वाले पेंशनर के उदाहरण में कम्यूटेशन राशि और लगातार होने वाली मासिक कटौती को देखते हुए करीब 10 साल में रकम की भरपाई हो जाती है। इसी आधार पर संगठन का मानना है कि 11वें साल में कम्यूटेड पेंशन बहाल करना उचित होगा।

1986 की व्यवस्था में बदलाव की मांग

भारत पेंशनर्स समाज का कहना है कि 15 साल की बहाली व्यवस्था करीब चार दशक पहले की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। तब से ब्याज दरों, जीवन प्रत्याशा और आर्थिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। संगठन इसी बदलाव को आधार बनाकर 11 साल की बहाली की मांग कर रहा है।

8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स को उम्मीद

अब पेंशनर्स की नजर 8वें वेतन आयोग से जुड़ी सिफारिशों पर है। हालांकि, 11 साल में कम्यूटेड पेंशन बहाली का प्रस्ताव अभी मांग और सिफारिश के स्तर पर है। इसे लागू करने का अंतिम फैसला सरकार और संबंधित प्रक्रिया के तहत ही होगा। अगर यह मांग स्वीकार होती है, तो कम्यूटेशन का विकल्प चुनने वाले लाखों पेंशनर्स के लिए यह लंबे समय में महत्वपूर्ण आर्थिक राहत साबित हो सकती है।