दुनियाभर में इंडियन प्रीमियर लीग एक सबसे बड़ी लीक है। जिसमें दुनिया भर के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। लेकिन अब इस लीग में एक बड़ा फेरबदल होने वाला है। आइए हम आपको बताते हैं।

स्पोर्ट्स डेस्क : क्रिकेट तो आप देखते ही होंगे या इसके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते होंगे कि एक क्रिकेट टीम में 11 खिलाड़ी खेलते हैं। लेकिन अब फुटबॉल की तरह क्रिकेट में भी प्लेयर सब्सीट्यूशन देखने को मिल सकता है। जी हां, भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आईपीएल के 16वें सीजन से टैक्टिकल सब्सीट्यूशन का कांसेप्ट लागू करने पर विचार किया है। लेकिन क्या होता है यह टैक्टिकल सब्सीट्यूशन आइए हम आपको बताते हैं।

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एक मैच में खेलेंगे 12 खिलाड़ी 
जी हां टैक्टिकल सब्सीट्यूशन का मतलब होता है कि क्रिकेट के एक मैच में एक टीम की ओर से 12 खिलाड़ी खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं। लेकिन विकेटों की संख्या 10 ही रहेगी। इस नियम के अनुसार एक टीम में 11 खिलाड़ी खेलने वाले होंगे। साथ ही चार सब्सीट्यूट प्लेयर भी होंगे। 14वें ओवर तक आप किसी भी एक प्लेयर को सब्सीट्यूट प्लेयर के साथ रिप्लेस कर सकते हैं। ऐसा ही नियम फुटबॉल में भी लागू होता है। हालांकि, आईपीएल ऐसी पहली लीग नहीं है जहां यह रूल लागू किया गया है। ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग में इसी तरह का X-फैक्टर रूल लागू है। जिसमें पहली पारी के 10 ओवर तक दोनों टीम एक-एक सब्सीट्यूट प्लेयर को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर सकती है। लेकिन जिस खिलाड़ी ने बैटिंग या कोई भी ओवर नहीं फेंका हो उसे ही रिप्लेस किया जा सकता है। 16 साल पहले 2005-06 के दौरान ODI में सुपरसब नियम था। जिसके तहत मैच के दौरान प्लेयर रिप्लेस कर सकते थे। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी ये नियम लागू हो चुका है।

कैसे काम करेगा सब्सीट्यूट रूल 
टैक्टिकल सब्सीट्यूट रूल लागू करने के लिए बीसीसीआई ने सभी फ्रेंचाइजिंग को एक नोट भेजा है। अगर ये नियम लागू होता है तो आईपीएल मैच के दौरान जब टॉस होगा तब दोनों टीमों को अपनी टीम के चार-चार सब्सीट्यूट प्लेयर्स के नाम भी देने होंगे। मैच की पहली पारी में 14 ओवर तक दोनों टीम अपने एक खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर सकती है। लेकिन इसके लिए उसे दूसरे खिलाड़ी को रिप्लेस करना होगा। ये फैसला पूरी तरह से टीमों पर होता है वह चाहे तो खिलाड़ी को रिप्लेस कर सकते है या नहीं। लेकिन विकेट गिरने की संख्या 10 ही होगी। यानी कि अगर किसी आउट हो चुके बल्लेबाज की जगह कोई सब्सीट्यूट खिलाड़ी आता है, तो उसके लिए बाकी बचे किसी खिलाड़ी को बैटिंग छोड़नी पड़ेगी।

क्या कर सकेगा सब्सीट्यूट प्लेयर 
अब सब्सीट्यूट प्लेयर के काम की बात की जाए तो वह सब्सीट्यूट होने के बाद पूरे मैच में बैटिंग कर सकता है। बॉलिंग के दौरान पूरे मैच में फील्डिंग कर सकता है और अगर वह बॉलर है तो चारों ओवर भी डाल सकता है।

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