गुलाम नबी आजाद ने खारिज किया कि वह कोई नयी पार्टी बना रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा, "कोई नहीं कह सकता कि राजनीति में आगे क्या होगा, जैसे कोई नहीं जानता कि वह कब मर जाएगा।

श्रीनगर। कांग्रेस (Congress) के असंतुष्ट नेताओं (rebel leaders) द्वारा पार्टी तोड़ने की अटकलों पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के गुट जी-23 (G-23) के गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में नई पार्टी (new party) बनाने को खारिज कर दिया है। हालांकि, उन्होंने दार्शनिक अंदाज में यह भी कहा कि राजनीति में कब-क्या हो जाए, कोई नहीं कह सकता।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

दरअसल, पूर्व सीएम गुलाम नबी आज़ाद द्वारा जम्मू-कश्मीर में लगातार कई मीटिंग्स किए जाने के बाद यह अटकलें लगाई जाने लगी थी कि वह एक नई पार्टी बना रहे हैं। उनके 20 वफादारों ने कांग्रेस के विभिन्न पदों से इस्तीफा दे दिया है। इन इस्तीफों के बाद राजनीतिक कयास तेज हो गए थे।

आजाद ने दिया जवाब

जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद ने कहा कि रैलियां उन राजनीतिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए हैं जो जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा और विशेष दर्जा छीन लिए जाने के बाद रुक गई थीं। चार दशकों से अधिक समय तक कांग्रेस में प्रमुख पदों पर रहे आजाद ने कहा कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय के विपरीत आज आलोचना के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी नेतृत्व को चुनौती नहीं दे रहा है। शायद, इंदिरा गांधी और राजीव जी ने मुझे बहुत अधिक स्वतंत्रता दी थी जब चीजें गलत हो रही थीं। वे आलोचना को कभी नहीं मानेंगे। वे इसे आक्रामक के रूप में नहीं देखेंगे। आज नेतृत्व इसे आक्रामक के रूप में देखता है।

आजाद ने इंदिरा गांधी के आदेश को जब नहीं माना

आजाद ने बताया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी रही है। इंदिरा जी व राजीव जी के जमाने में भी नेताओं को कभी सच कहने से रोका नहीं गया था। अपनी बात को कहना कभी आलोचना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि एक बार इंदिरा जी की सिफारिश को उनको इनकार कर दिया था। इंदिराजी ने स्वयं कहा था कि इसे बनाए रखें। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी ने उनसे कहा था कि "इसे बनाए रखें" जब उन्होंने दो लोगों को नियुक्त करने से इनकार कर दिया, जिनकी सिफारिश उन्होंने युवा कांग्रेस (Youth Congress) में महासचिव के रूप में की थी।
उन्होंने कहा कि जब राजीव जी राजनीति में आए, तो इंदिरा गांधी ने हम दोनों को बुलाया और राजीव जी से कहा कि गुलाम नबी मुझे ना भी कह सकते हैं, लेकिन ना का मतलब अवज्ञा या अनादर नहीं है, यह पार्टी की भलाई के लिए है। आज की तारीख में नहीं सुनने को कोई तैयार नहीं है।

राजनीति में आगे क्या होगा कौन जानें?

गुलाम नबी आजाद ने खारिज किया कि वह कोई नयी पार्टी बना रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा, "कोई नहीं कह सकता कि राजनीति में आगे क्या होगा, जैसे कोई नहीं जानता कि वह कब मर जाएगा। राजनीति में, कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि आगे क्या होगा, लेकिन मेरे पास है पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है।''

वह राजनीति छोड़ना चाहते लेकिन समर्थक नहीं चाह रहे

उन्होंने कहा कि वह राजनीति छोड़ना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने समर्थक ऐसा करने से मना कर रहे हैं। जनसभाओं को किए जाने पर श्री आजाद ने कहा कि वह केवल राजनीतिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करना चाहते हैं। पिछले दो वर्षों से लोगों और नेतृत्व के बीच एक डिस्कनेक्ट है। 5 अगस्त, 2019 से, जब राज्य को डाउनग्रेड किया गया था, (अनुच्छेद) 370 को निरस्त कर दिया गया था और सभी राजनीतिक गतिविधियों को रोक दिया गया था, हजारों को जेल हो गई थी। जेलों के बाहर की अनुमति नहीं थी। 

मैं कछुए की तरह नहीं चल सकता

कांग्रेस में इस्तीफे और अपनी बैठकों में जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर (Ghulam Ahmad Mir) की अनुपस्थिति पर, श्री आज़ाद ने कहा कि शायद वह अपनी गति से चल रहे हैं। लेकिन मेरे लिए, हर कोई एक कांग्रेसी है, जब मैं जम्मू-कश्मीर में हूं, मैं केवल कांग्रेस पार्टी या लोगों के एक विशेष वर्ग के बारे में बात नहीं करता हूं। कुछ ऐसे हैं जो कम काम करते हैं। मुझे अधिक काम करने की आदत है। मैं कछुए की तरह नहीं चलता। मैं गति के साथ चलता हूं। उन्होंने कहा कि उनके पास वही ऊर्जा है जो 40 साल पहले थी और एक दिन में 16 रैलियां भी कर सकते हैं।

Read this also:

महबूबाकामोदीपरतंज: अटलजीनेराजधर्मनिभा Jammu-Kashmir कोसंभाला, अबनेतागोडसेकाकश्मीरबनारहे

दोमहाशक्तियोंमेंबढ़ातनाव: US और Russia नेएकदूसरेकेडिप्लोमेट्सकोकियावापस