सभी मोबाइल फोन में साइबर सिक्योरिटी एप 'संचार साथी' को प्री-इंस्टॉल करने के दूरसंचार विभाग (DoT) के आदेश पर विवाद बढ़ने के बाद  केंद्र सरकार की सफाई आई। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ये कंपलसरी नहीं है। चाहे तो यूजर इसे डिलीट कर सकते हैं।

Sanchar Saathi App: भारत में बिकने वाले सभी फोन में 'संचार साथी' ऐप पहले से इंस्टॉल करने को लेकर दूरसंचार विभाग के आदेश पर भारी हंगामे के बीच, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सफाई दी है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर मोबाइल फोन यूजर्स इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो उनके पास इस ऐप को डिलीट करने का ऑप्शन होगा।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

संचार साथी ऐप कंपलसरी नहीं

नए निर्देशों पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा, “संचार साथी ऐप कंपलसरी नहीं है। अगर आप इसे अपने फोन में रखना चाहते हैं, तो रखें। अगर आप इसे डिलीट करना चाहते हैं, तो हटा दें। हर किसी को इस ऐप के बारे में जागरूक करना हमारा कर्तव्य है। उदाहरण के लिए जब आप फोन खरीदते हैं, तो कई ऐप्स पहले से इंस्टॉल रहते हैं। गूगल मैप्स भी आता है। अब, अगर आप गूगल मैप्स इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो इसे डिलीट कर दें।”

Scroll to load tweet…

संचार साथी ऐप के बारे में फैली गलतफहमियां दूर करना जरूरी

मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को सरकार के निर्देश के पीछे का कारण समझाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, हम संचार साथी ऐप के बारे में फैली गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि यह कस्टमर की सुरक्षा का मामला है। अगर आप इसे रजिस्टर नहीं करना चाहते, तो न करें। लेकिन देश में हर कोई अब भी यह नहीं जानता कि उसे फ्रॉड से बचाने के लिए एक ऐप है। इसलिए यह जानकारी फैलाना हमारी जिम्मेदारी है।

विपक्ष ने जताया जासूसी का अंदेशा

बता दें कि कांग्रेस ने फोन बनाने वालों को केंद्र के निर्देशों के कारण संभावित प्राइवेसी रिस्क का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस के सीनियर नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि यह कदम असंवैधानिक से भी कहीं आगे है। उन्होंने X पर कहा, प्राइवेसी का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 में दिए गए जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का एक जरूरी हिस्सा है। कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने संचार साथी को "स्नूपिंग ऐप" कहा। उन्होंने कहा, यह मजाकिया है। नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है। यह सिर्फ टेलीफोन पर जासूसी करने के बारे में नहीं है। कुल मिलाकर, वे इस देश को हर तरह से तानाशाही में बदल रहे हैं।" वहीं, शिवसेना (UBT) की राज्यसभा MP प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र का यह कदम "एक और BIG BOSS सर्विलांस मोमेंट" है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, वे हमारी प्राइवेट फोटो और वीडियो पर जासूसी करना चाहते हैं।

जो सच देखना ही नहीं चाहते, उन्हें हम नहीं दिखा सकते

विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा, अपोजिशन वाले बेसब्री से एक मुद्दे की तलाश में है। गलतफहमियों को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है। मैं वही कर रहा हूं। विपक्ष हमसे पूछ रहा है कि हम फ्रॉड कैसे रोकेंगे और जब हम आम नागरिक को संचार साथी दे रहे हैं, तो वे कह रहे हैं कि यह (जासूसी टूल) पेगासस है। हम उन लोगों को सच नहीं दिखा सकते जो इसे देखना नहीं चाहते।