अयोध्या राम मंदिर जमीन घोटाला फिर सुर्खियों में! संजय सिंह ने SIT को 11 दस्तावेज सौंपे, करोड़ों की जमीन डील पर सवाल उठे। FIR न होने पर बढ़ा सस्पेंस, जांच से क्या बड़ा राज खुलेगा? 

लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर मचे देशव्यापी सियासी घमासान के बीच एक बहुत बड़ा मोड़ सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह गुरुवार सुबह ठीक 11 बजे लखनऊ स्थित एसआईटी (SIT) अध्यक्ष विजय विश्वास पंत के कार्यालय पहुंचे। महज 12 मिनट तक चली इस बेहद गोपनीय और अहम मुलाकात में संजय सिंह ने जमीन घोटाले से जुड़े 11 ऐसे दस्तावेज सौंपे हैं, जिसने जांच एजेंसी की टेबल पर हड़कंप मचा दिया है। दफ्तर से बाहर निकलते ही सांसद ने तीखे तेवर अपनाते हुए सवाल दागा कि जब पैसे की बरामदगी और चोरी के तमाम साक्ष्य मिल चुके हैं, तो अब तक कोई जेल क्यों नहीं गया और एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं हुई?

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12 मिनट की वो मीटिंग: एसआईटी के सामने खुले चंदे की 'डकैती' के पन्ने

संजय सिंह ने दावा किया है कि वह सीधे अयोध्या प्रशासन और सरकारी अभिलेखों के ओरिजिनल कागज लेकर आए हैं, जिसके बाद आरोपियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने पॉइंटवार उन 11 सबूतों का ब्योरा मीडिया के सामने रखा, जो सीधे तौर पर करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ और चंदे के पैसे की 'डकैती' की ओर इशारा करते हैं:

  • 5 मिनट में साढ़े 18 करोड़ का खेल: सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने हरीश-कुसुम पाठक से जो जमीन खरीदी, उसे महज 5 मिनट बाद ही साढ़े 18 करोड़ रुपये में राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों खरीद-बिक्री में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषि कुमार उपाध्याय गवाह बने थे।
  • 41 लाख की जमीन 2 करोड़ में: इसी तरह 41.60 लाख रुपये की बाजार मूल्य वाली एक अन्य जमीन को सीधे 2 करोड़ रुपये में ट्रस्ट के खाते से खरीदा गया।
  • भतीजे से चंपत राय का कनेक्शन: तत्कालीन भाजपा मेयर के भतीजे दीपनारायण ने पहले 20 लाख में एक जमीन खरीदी और महज 7 महीने बाद उसे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बेच दिया। एक अन्य मामले में 14 मई 2020 को दीपनारायण को दान में मिली जमीन को चंपत राय ने 1 करोड़ रुपये में खरीदा।
  • 9 करोड़ की जमीन 55 करोड़ में: 16 नवंबर 2023 को 9 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को रिकॉर्ड 55.47 करोड़ रुपये में ट्रस्ट के नाम ट्रांसफर किया गया।
  • नजूल की जमीन का महा-घोटाला: सबसे सनसनीखेज सुराग 2 अप्रैल 2024 की डील का है, जहां 2.92 करोड़ की जमीन चंपत राय को 24 करोड़ रुपये में बेची गई। संजय सिंह ने कहा कि खुद अयोध्या के एसडीएम (SDM) ने लिखित में दिया है कि यह 'नजूल' की सरकारी जमीन है, जिसे न तो खरीदा जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है।

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'प्रभु श्रीराम की पादुका और हार भी गायब': दानपात्र में सेंधमारी का सनसनीखेज दावा

इस मर्डर-लाइक मिस्ट्री और स्कैम में केवल जमीनों का ही खेल नहीं है, बल्कि रामलला के मुख्य दानपात्र में भी बड़ी सेंधमारी के आरोप लगे हैं। सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में लगातार चोरियां हो रही हैं और मामले को दबाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कभी दो किलो चांदी, तो कभी आठ किलो चांदी चोरी होने की बातें सामने आ रही हैं। हद तो तब हो गई जब प्रभु श्रीराम का मुख्य हार और उनकी पवित्र पादुकाएं (जिनकी चौदह वर्ष तक भरत जी ने सेवा की थी) तक चोरी हो जाने के दावे किए जा रहे हैं। पैसे की बरामदगी होने के बावजूद पुलिस की यह रहस्यमयी खामोशी कई बड़े सवाल खड़े करती है।

इस्तीफे की अफवाहें और शंकराचार्य का तीखा वार: 'जो चोरी करे, वही जांच कैसे करे?'

गुरुवार सुबह से ही सोशल मीडिया (एक्स) पर एक और सस्पेंस गहरा गया जब कई पत्रकारों और इन्फ्लुएंसर्स ने दावा किया कि चंदा गबन के आरोपों के बीच घिरे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग लाल बागड़ा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और अफवाह करार देते हुए इस्तीफे की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: "वही चोरी करे और वही जांच भी करे, यह अनोखा फॉर्मूला कहां से आया है? जब उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार खुद वहां की व्यवस्था में पहले से शामिल हैं, तो उनकी बनाई एसआईटी से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यह जांच कमेटी के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है।"

6 साल पहले ऑडिट फर्म ने पकड़ी थी चोरी, अब 3 रसूखदारों पर लटकी तलवार

एसआईटी सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी यह भी मिली है कि साल 2020 में ट्रस्ट के गठन के कुछ ही महीनों बाद एक निजी ऑडिट फर्म ने ऑडिट के दौरान दान प्रबंधन, वित्तीय निगरानी और आभूषणों के रिकॉर्ड में भारी प्रशासनिक खामियों व गड़बड़ियों की लिखित चेतावनी दी थी। लेकिन ट्रस्ट के बड़े चेहरों ने वित्तीय रिपोर्टिंग की उन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और कोई सुधार नहीं किया।

अब चारों तरफ से घिरी एसआईटी की टीम इस भूमि खरीद के दौरान जमीनों के मूल्यांकन के आधार, बाजार मूल्य और भुगतान प्रक्रियाओं के राजस्व रिकॉर्ड खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक, बहुत जल्द एसआईटी इस महा-घोटाले से सीधे जुड़े 3 बेहद रसूखदार लोगों को समन भेजकर आमने-सामने पूछताछ करने की तैयारी में है, जिसके बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक की सियासत में बड़ा भूचाल आना तय माना जा रहा है।

सबूतों का पहाड़ या सिर्फ आरोप?

फिलहाल मामला आरोपों, दस्तावेजों और दावों के बीच उलझा हुआ है। एक तरफ संजय सिंह का दावा है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जिनसे कई बड़े खुलासे हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट और उससे जुड़े लोग सभी आरोपों को खारिज कर रहे हैं। अब सबकी नजर एसआईटी की जांच और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि वही तय करेगी कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप है या फिर वास्तव में किसी बड़े वित्तीय घोटाले की परतें खुलने वाली हैं।