एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक नई न्यूक्लियर डील की अपनी ज़िद छोड़ने को तैयार थे. इसके लिए उन्होंने एक शर्त रखी थी, जिसका सीधा संबंध होरमुज़ की खाड़ी से था.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ईरान के साथ एक नई परमाणु डील को लेकर अपनी ज़िद छोड़ने के लिए तैयार थे. लेकिन इसके लिए उनकी एक बड़ी शर्त थी - कि ईरान होरमुज़ की खाड़ी (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दे।
यह खुलासा उस रणनीति की ओर इशारा करता है जिसे ट्रंप प्रशासन पर्दे के पीछे तैयार कर रहा था. रिपोर्ट बताती है कि अगर ईरान यह शर्त मान लेता, तो ट्रंप इसे पश्चिम एशिया में अपनी एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश करते. यानी एक तीर से दो निशाने साधने की पूरी तैयारी थी।
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जीत के ऐलान की तैयारी में थे ट्रंप?
रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में अपनी 'जीत' का ऐलान करने के लिए ज़मीन तैयार कर रहे थे. होरमुज़ की खाड़ी का खुलना उनके लिए एक ऐसा मौका होता, जिसे वह अपनी कामयाबी बताकर भुना सकते थे. यह कदम ईरान पर दबाव की उनकी नीति का सफल नतीजा माना जाता।
इस पूरी कवायद का मकसद साफ था. एक तरफ ईरान को अहम समुद्री रास्ते को खोलने के लिए मजबूर करना और दूसरी तरफ न्यूक्लियर डील की बातचीत से पीछे हटकर यह दिखाना कि उन्होंने ईरान को झुका दिया. हालांकि, यह सब कुछ उस रिपोर्ट के दावों पर आधारित है, जिसमें इस योजना का ज़िक्र किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन लगातार ईरान पर एक बेहतर और ज़्यादा सख्त परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहा था. ऐसे में इस डील की ज़िद को छोड़ने की बात अपने आप में काफी अहमियत रखती है. यह दिखाता है कि उस वक्त पश्चिम एशिया में व्यापारिक और सामरिक तौर पर अहम होरमुज़ की खाड़ी को खुलवाना ट्रंप के लिए कितनी बड़ी प्राथमिकता थी।
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