ईरान द्वारा अरब के मुस्लिम देशों पर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर इस्लामिक देश भड़क गए हैं। 12 इस्लामिक देशों ने रियाद बैठक में ईरान को सख्त चेतावनी दी। संयुक्त बयान में हमले रोकने, मिलिशिया समर्थन बंद करने और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने को कहा गया है।
Muslim World on Iran: मिडिल-ईस्ट में जारी जंग थमनी नजर नहीं आ रही है। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद से मुस्लिम वर्ल्ड में बेहद नाराजगी देखी जा रही है। कई देशों ने तेहरान को तुरंत हमले रोकने की सख्त चेतावनी दी है। सऊदी अरब के रियाध में प्रमुख अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किये और UAE के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
12 इस्लामिक देशों की ईरान को सख्त चेतावनी
बैठक के बाद 12 मुस्लिम देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से तुरंत हमले रोकने को कहा। इन देशों ने जोर देकर कहा कि ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNGC) के प्रस्ताव 2817 (2026) का पालन करना चाहिए। इस प्रस्ताव में सभी तरह के हमलों को तुरंत बंद करने की मांग की गई है।
उकसावे वाली कार्रवाई और मिलिशिया समर्थन रोकने की मांग
बयान में कहा गया कि ईरान को पड़ोसी देशों के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी या उकसावे वाली कार्रवाई तत्काल बंद करनी चाहिए। साथ ही अरब देशों में मिलिशिया को समर्थन, फंडिंग और हथियार देना भी तुरंत रोकने की मांग की गई। इन देशों का कहना है कि ईरान अपने हितों के लिए यह सब कर रहा है, जो अन्य देशों के हितों के खिलाफ है।
समुद्री सुरक्षा पर भी जताई चिंता
अरब के मुस्लिम देशों ने ईरान से कहा कि वह Strait of Hormuz में अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बाधित करने की कोशिश न करे। इसके अलावा बाब अल-मंदाब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने से भी बचने की चेतावनी दी गई। बैठक में ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई। बताया गया कि इन हमलों में आवासीय क्षेत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ऑयल प्लांट, फैक्ट्रियां, हवाई अड्डे, आवासीय इमारतें और दूतावासों पर हमले किए गए।
आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर
तमाम मुस्लिम देशों के मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि हर देश को अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा का अधिकार है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे हमलों को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। बैठक के अंत में सभी देशों ने इस मुद्दे पर लगातार चर्चा और समन्वय बनाए रखने की बात कही। इसका उद्देश्य स्थिति पर नजर रखना, साझा रणनीति बनाना और अपनी सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाना है, ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।


