Bihar IAS Transfer List: बिहार सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल में दर्जनों IAS अधिकारियों का तबादला कर दिया है। गरिमा लोहिया को दरभंगा का नगर आयुक्त बनाया गया है, जबकि श्रेया श्री को खगड़िया जिला परिषद का DDC-सह-CEO नियुक्त किया गया है।

Bihar IAS Transfer: बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दर्जनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में राज्य के कई विभागों, नगर निगमों और जिला परिषदों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है।

अहम पदों पर हुईं नई नियुक्तियां

इस बड़े फेरबदल के तहत ट्रेनिंग से लौटे अफसरों को भी अहम फील्ड पोस्टिंग दी गई है। 2023 बैच की IAS अधिकारी गरिमा लोहिया को दरभंगा नगर निगम का नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) बनाया गया है। वहीं, अनिरुद्ध पांडे को पूर्णिया नगर निगम के नगर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कई जिलों को मिले नए DDC-सह-CEO

कई अधिकारियों को जिलों में ग्रामीण विकास की अहम जिम्मेदारी दी गई है। 2022 बैच की IAS अधिकारी श्रेया श्री को खगड़िया जिला परिषद का उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी (DDC-cum-CEO) बनाया गया है। इसी तरह, तुषार कुमार को मधुबनी जिला परिषद और आकांक्षा आनंद को रोहतास (सासाराम) जिला परिषद का DDC-सह-CEO नियुक्त किया गया है।

सचिवालय और दूसरे अहम पद

सचिवालय और विभागों में भी कई अहम बदलाव हुए हैं। प्रद्युम्न सिंह यादव को पटना में उद्योग विभाग के तहत खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय का निदेशक बनाया गया है। वहीं, अंजलि शर्मा को समाज कल्याण विभाग में संयुक्त निदेशक का प्रभार सौंपा गया है। कृष्णा गुप्ता को परिवहन विभाग के साथ-साथ निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में संयुक्त महानिरीक्षक की दोहरी जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा, बेगूसराय में रोहित कर्मा, जहानाबाद में विजय कुमारी चौधरी और कटिहार में डॉ. कुंवर मेहरी को जिला परिषदों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी गई हैं।

CM ने गिनाईं सुशासन की उपलब्धियां

इससे पहले, 22 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया था कि सुशासन को प्राथमिकता देने के चलते ही 'सहयोग' कार्यक्रम शुरू किया गया था। मुख्यमंत्री के तौर पर अपने शुरुआती दिनों में कई नागरिकों ने उनसे शिकायतें की थीं।

इसके बाद, हर अर्जी का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी सिस्टम बनाया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब तक मिली 6,42,000 अर्जियों में से 96% को 30 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा के अंदर सुलझा लिया गया है। लापरवाही बरतने या समय-सीमा का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ऑटोमेटिक सस्पेंशन का भी प्रावधान किया गया है।