भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के बाद मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज है। जानिए 2014 से अब तक कितने मंत्रियों ने पद छोड़ा, किन वजहों से कुर्सी गई और संविधान प्रधानमंत्री को क्या अधिकार देता है।

भाजपा की कमान संभालने के बाद नितिन नवीन ने नई टीम तैयार कर ली है। इसके साथ ही दिल्ली की सियासत में एक पुरानी चर्चा फिर तेज हो गई है, क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की टीम में बड़ा बदलाव करने वाले हैं? हालांकि अभी कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मोदी सरकार के पिछले तीन कार्यकाल का इतिहास बताता है कि मंत्रिमंडल में बदलाव कोई नई बात नहीं है।

पहली मोदी सरकार में कई मंत्रियों की गई कुर्सी

2014 से 2019 के बीच सबसे बड़े फेरबदल जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में हुए। जुलाई 2016 में पांच राज्य मंत्रियों को हटाया गया, जबकि इसके बाद नजमा हेपतुल्ला और जीएम सिद्धेश्वर ने भी इस्तीफा दिया। इस दौर में कुल सात मंत्री सरकार से बाहर हुए।

सितंबर 2017 में छह और मंत्रियों ने पद छोड़ा। इनमें कलराज मिश्र, बंडारू दत्तात्रेय, राजीव प्रताप रूडी, फग्गन सिंह कुलस्ते, संजीव बालियान और महेंद्र नाथ पांडे शामिल थे। इसके अलावा एम. वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने, मनोहर पर्रिकर के गोवा लौटने और अन्य राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी मंत्री पद खाली हुए।

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दूसरी मोदी सरकार में सबसे बड़ा बदलाव

2019 से 2024 के कार्यकाल में 7 जुलाई 2021 का कैबिनेट फेरबदल सबसे अहम रहा। इस दौरान 12 मंत्रियों ने इस्तीफा दिया, जिनमें छह कैबिनेट मंत्री थे। रविशंकर प्रसाद, हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे बड़े नाम भी इसमें शामिल रहे।

इसके बाद भी हरसिमरत कौर बादल, मुख्तार अब्बास नकवी, आरसीपी सिंह समेत कई मंत्रियों ने अलग-अलग राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियों में पद छोड़ा। 2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और रेणुका सिंह ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया।

तीसरे कार्यकाल में अब तक क्या हुआ?

9 जून 2024 को शुरू हुई तीसरी मोदी सरकार में 30 कैबिनेट मंत्रियों समेत कुल 72 मंत्री शामिल हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक कोई आधिकारिक कैबिनेट फेरबदल नहीं हुआ है, लेकिन तीन मंत्रियों ने पद छोड़ा है। जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद इस्तीफा हुआ, जबकि धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2026 में शिक्षा मंत्रालय से इस्तीफा दिया।

मंत्री को हटाने का अधिकार किसके पास?

संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं। व्यवहार में प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति मंत्री को पद से हटा सकते हैं। कोई गैर-सांसद भी मंत्री बन सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना होता है। मंत्रिपरिषद का आकार भी सीमित है। संविधान के अनुसार केंद्र में मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

यानी अगर मोदी कैबिनेट में फेरबदल होता है, तो यह सिर्फ चेहरों का बदलाव नहीं होगा। इसके पीछे राजनीतिक समीकरण, राज्यों का प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक प्रदर्शन और आने वाली चुनावी रणनीति जैसे कई पहलू अहम हो सकते हैं।

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