RBI New EMI Rules: मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप EMI पर खरीदा है? RBI के नए नियमों के तहत EMI डिफॉल्ट होने पर कंपनियां डिवाइस लॉक कर सकती हैं। जानिए 30 दिन, 60 दिन के नियम, 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले बदलाव और ग्राहकों को मिलने वाले मुआवजे की पूरी जानकारी।

अगर आपने मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप ईएमआई पर खरीदा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिफॉल्ट करने वाले ग्राहकों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के तहत, तय शर्तों के पूरा होने पर लोन देने वाली कंपनियां डिवाइस के कुछ फीचर्स पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगा सकेंगी। हालांकि, ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी कई अहम प्रावधान किए गए हैं। इन नियमों को अब 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।

30 दिन की देरी के बाद ही होगी कार्रवाई

RBI के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, लोन देने वाली कंपनी केवल तभी डिवाइस पर कोई प्रतिबंध लगा सकती है, जब ग्राहक की ईएमआई कम से कम 30 दिन तक बकाया हो और उसे पहले औपचारिक नोटिस भेजा जा चुका हो।

यदि भुगतान में 30 से 60 दिन की देरी होती है, तो कंपनी डिवाइस के कुछ फीचर्स पर सीमित पाबंदियां लगा सकती है। हालांकि, इस दौरान ग्राहक की आउटगोइंग कॉल सुविधा बंद नहीं की जा सकती। वहीं, यदि ईएमआई 60 दिन से अधिक समय तक बकाया रहती है, तो लोन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार डिवाइस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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ग्राहकों को राहत देने वाले नियम भी लागू

RBI ने साफ किया है कि लोन देने वाली कंपनियां किसी भी स्थिति में इनकमिंग कॉल, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर को ब्लॉक नहीं कर सकतीं। साथ ही ऐसी कोई भी पाबंदी नहीं लगाई जा सकती, जिससे ग्राहक अपने रोजगार या जरूरी कामों के लिए डिवाइस का इस्तेमाल ही न कर सके।

इसके अलावा, लोन देने वाले संस्थानों और उनकी थर्ड-पार्टी सर्विस कंपनियों को डिवाइस निर्माता (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म से आवश्यक प्रमाणन लेना होगा। उन्हें ग्राहक के मोबाइल में मौजूद निजी डेटा जैसे कॉन्टैक्ट्स, मैसेज, कॉल लॉग, फोटो या लोकेशन हिस्ट्री तक पहुंचने की अनुमति नहीं होगी।

पैसा चुकाते ही हटेगी पाबंदी, देरी पर मिलेगा मुआवजा

RBI के नए नियमों के अनुसार, ग्राहक द्वारा बकाया राशि जमा करने के एक घंटे के भीतर डिवाइस से सभी प्रतिबंध हटाना अनिवार्य होगा।

यदि किसी ग्राहक के डिवाइस पर गलत तरीके से पाबंदी लगा दी जाती है या भुगतान के बाद उसे समय पर अनलॉक नहीं किया जाता, तो संबंधित लोनदाता को हर घंटे 250 रुपये का मुआवजा देना होगा। हालांकि, यह मुआवजा संबंधित लोन की कुल राशि से अधिक नहीं हो सकता।

RBI का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य लोन वसूली की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि ग्राहकों की निजता, संचार और जरूरी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित न हो।

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