Jaspal Rana death : कौन थे भारत के दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा जिनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर? मनु भाकर से लेकर ममता बनर्जी राणा के जाने से क्यों हैं दुखी?

कोलकाता: भारत के महान शूटर और कोच जसपाल राणा के निधन से पूरे खेल जगत में शोक की लहर है। जिस खिलाड़ी ने देश को 9 गोल्ड मेडल जिताए हैं आज वह दिग्गज प्लेयर हमारे बीच नहीं रहा। राणा के निधन से ना सिर्फ खेल बल्कि, राजनीतिक लोग और बॉलीवुड के सितारे भी दुखी हैं। इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गहरा दुख जताया है।

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भारत के सबसे कामयाब शूटरों में से एक थे राणा

भारत के सबसे कामयाब शूटरों में से एक, राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। मई के आखिर में सीने में तकलीफ के बाद हाल ही में उनकी स्टेंट प्रक्रिया हुई थी। उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बता दें कि जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 बार गोल्ड मेडल जीते थे। 

ममता बनर्जी से मनु भाकर तक दुखी

  • ममता बनर्जी ने X पर भारतीय खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति बताया और उनके परिवार व समर्थकों के प्रति अपनी संवेदनाएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा महान भारतीय शूटर के निधन से बेहद दुखी हैं, जिन्होंने डबल ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर को तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
  • उन्होंने लिखा, "महान शूटिंग चैंपियन और कोच जसपाल राणा के निधन से गहरा दुख हुआ। एशियाई खेलों के गोल्ड मेडलिस्ट, उन्होंने मनु भाकर को ओलिंपिक में कामयाबी के लिए तैयार किया। उनका जाना भारतीय खेल के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके परिवार, बिरादरी और समर्थकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।

स्टार शूटर मनु भाकर के कोच थे राणा

  • इससे पहले, स्टार शूटर मनु भाकर ने अपने पूर्व कोच और भारतीय शूटर जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने इसे 'कभी न भरने वाली क्षति' बताया और सोशल मीडिया पर एक इमोशनल श्रद्धांजलि शेयर की।
  • X पर शेयर की गई एक पोस्ट में, भाकर ने राणा के साथ कई तस्वीरें शेयर कीं। राणा ने एक एथलीट के तौर पर उनके विकास के अहम दौर में उनके शूटिंग करियर को संवारने में खास भूमिका निभाई थी।
  • भाकर ने लिखा, "कभी न भरने वाली क्षति," जो इस महान शूटर और कोच की मौत के बाद उनके सदमे और दुख को दिखाता है।
  •  उनका रिश्ता शूटिंग रेंज से कहीं बढ़कर था, जो भरोसे और मेंटरशिप पर बने एक गहरे व्यक्तिगत बंधन को दिखाता था।
  • मनु ने शुक्रवार को Olympics.com को बताया, "मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है। यह एक अविश्वसनीय खबर है। मैं इसे समझ नहीं पा रही हूं। वह सिर्फ मेरे कोच, मेंटर या गाइड नहीं थे, बल्कि एक ऐसे दोस्त भी थे जो मुझे ज्यादातर लोगों से बेहतर समझते थे।"
  • राणा के मार्गदर्शन में, मनु ने अपना आत्मविश्वास फिर से हासिल किया और पेरिस 2024 में एक ही ओलिंपिक में दो मेडल जीतने वाली आजादी के बाद की पहली भारतीय बनीं।
  • मनु ने याद करते हुए कहा, "कई बार वह सख्त होते थे, और कई बार वह सिर्फ सुनते थे। वह हमेशा मुझसे सर्वश्रेष्ठ चाहते थे, भले ही मैं उस समय यह नहीं समझ पाती थी। अब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो उनके सिखाए हर सबक का एक मकसद था।"
  • लमनु ने कहा, "जब हमने फिर से एक साथ काम करना शुरू किया, तो ऐसा लगा जैसे घर वापस आ गई हूं। उन्हें पता था कि मैं कब आत्मविश्वास में हूं, कब घबराई हुई हूं और कब मुझे सहारे की जरूरत है। उन्होंने हमेशा मुझमें से सर्वश्रेष्ठ बाहर निकालने का एक तरीका ढूंढ लिया।"