Nepal में हिमनदीय बाढ़ में 1,000 से अधिक मौतों के बाद Sikkim ने अलर्ट बढ़ाया. NDMA ने 40 उच्च-खतरे वाले स्थल और 7 ‘हाई रिस्क’ झीलें चिन्हित कीं. Shako Chu पर 20–40 मीटर जलस्तर घटाने, Dolma Sampang पर रिटेंशन स्ट्रक्चर और Gurudongmar पर सेफ्टी वॉल जैसे उपाय प्रस्तावित; मॉनिटरिंग भी बढ़ाई गई.
Sikkim Glacier Flood: पड़ोसी नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी हिमनदीय बाढ़ के बाद सिक्किम ने ग्लेशियल झीलों से आने वाली अचानक बाढ़ के खतरे को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य में ऐसी 40 हिमनदीय झीलों की पहचान की गई है, जिनसे भविष्य में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इनमें से 7 झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन झीलों की स्थिति को समझने और खतरे को कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और निगरानी का काम तेज किया जा रहा है।
40 झीलों में 16 की हुई पहचान, 13 अभी बाकी
अधिकारियों के अनुसार, चिन्हित 40 संवेदनशील झीलों में से 16 का वर्गीकरण किया जा चुका है, जबकि 13 झीलों को अभी वर्गीकृत किया जाना बाकी है। वर्गीकृत झीलों में 7 को उच्च जोखिम वाली पाया गया है। 16 प्राथमिक संवेदनशील झीलों में से 13 का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन भी पूरा हो चुका है। इनमें से अधिकतर झीलें समुद्र तल से करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। सिक्किम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव Sandeep Tambe के मुताबिक, अध्ययन के दौरान झील की गहराई, पानी की मात्रा, झील के किनारे जमा मिट्टी-पत्थरों की मजबूती और हिमस्खलन तथा भूस्खलन से जुड़े खतरों की जांच की गई।
सबसे संवेदनशील झीलों के लिए तीन बड़ी योजनाएं
राज्य सरकार ने सबसे ज्यादा खतरे वाली झीलों से संभावित नुकसान को कम करने के लिए तीन प्रमुख योजनाओं पर काम शुरू किया है। पहली योजना Shako Chu झील से जुड़ी है। यहां करीब 2.7 करोड़ घन मीटर पानी एक कमजोर मिट्टी-पत्थर की प्राकृतिक दीवार के पीछे जमा है। योजना के तहत सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों की मदद से झील का जलस्तर करीब 20 से 40 मीटर तक कम करने का प्रस्ताव है। इस प्रक्रिया में करीब 80 लाख घन मीटर पानी नियंत्रित तरीके से बाहर निकालने की योजना है। इससे अगर प्राकृतिक दीवार टूटती है तो नीचे की ओर आने वाले पानी के दबाव और मात्रा को कम किया जा सकेगा।
South Lhonak क्षेत्र में बाढ़ की ताकत रोकने की तैयारी
दूसरी योजना South-North Lhonak झील समूह से जुड़ी है। इसके तहत करीब 24 किलोमीटर नीचे स्थित Dolma Sampang में पत्थरों से मजबूत सुरक्षा ढांचा बनाने की संभावना पर अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अचानक आने वाली बाढ़ के पानी की रफ्तार और ताकत को कम करना है, ताकि नीचे बसे ज्यादा संवेदनशील इलाकों तक पानी का असर कम पहुंचे अधिकारियों के मुताबिक, Dolma Sampang का करीब 300 हेक्टेयर क्षेत्र 2023 में South Lhonak झील से आई बाढ़ के दौरान पानी की रफ्तार कम करने में मददगार रहा था।
Gurudongmar झील के लिए सुरक्षा दीवार का प्रस्ताव
तीसरी योजना Gurudongmar झील परिसर से जुड़ी है। यहां झील के पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालने के लिए प्राकृतिक मिट्टी-पत्थर की दीवार वाले हिस्से पर सुरक्षा दीवार बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य झील की धार्मिक और पर्यावरणीय अहमियत को प्रभावित किए बिना अचानक बाढ़ के खतरे को कम करना है।
ऊंचाई पर मौजूद झीलों पर लगातार नजर
सिक्किम अब संवेदनशील हिमनदीय झीलों की निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। Shako Chu, Kerang और Dolma Sampang में स्वचालित निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं। इसके अलावा मौसम की उन परिस्थितियों पर नजर रखने के लिए डॉप्लर मौसम रडार लगाने के स्थान तलाशे जा रहे हैं, जो हिमस्खलन या भूस्खलन जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सिक्किम में 400 से अधिक हिमनदीय झीलें हैं। इनमें से 16 को मौजूदा आकलन कार्यक्रम में बेहद संवेदनशील माना गया है।
2023 की South Lhonak बाढ़ ने बढ़ाई सतर्कता
सिक्किम में हिमनदीय झीलों को लेकर मौजूदा तैयारियों की एक बड़ी वजह अक्टूबर 2023 की South Lhonak बाढ़ है। झील के टूटने के बाद Teesta नदी के जलस्तर में अचानक तेज बढ़ोतरी हुई थी। इस घटना में जान-माल का भारी नुकसान हुआ था और कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे भी प्रभावित हुए थे। इसके बाद राज्य में हिमनदीय झीलों की निगरानी और संभावित खतरे को कम करने पर ज्यादा जोर दिया गया।
सिर्फ सिक्किम नहीं, पूरे हिमालय पर मंडरा रहा खतरा
हिमनदीय झीलों से अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा सिर्फ सिक्किम तक सीमित नहीं है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश समेत भारतीय हिमालय के कई हिस्से इस जोखिम से प्रभावित हो सकते हैं। हिमाचल प्रदेश में 67 संवेदनशील हिमनदीय झीलों की पहचान की गई है, जबकि उत्तराखंड में 13 झीलों को संभावित बाढ़ के खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है।
नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया है कि ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद हिमनदीय झीलों की निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करना कितना जरूरी है। सिक्किम की नई तैयारियां इसी बढ़ते खतरे से निपटने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही हैं।
