तेलंगाना के नलगोंडा में 10वीं के 2 छात्रों ने अपनी स्कूल प्रिंसिपल की हत्या कर दी। वे लग्जरी लाइफस्टाइल चाहते थे और प्रिंसिपल द्वारा फिजूलखर्ची पर डांटे जाने से नाराज थे। उन्होंने चाकू से 27 वार कर प्रिंसिपल को मार डाला।
तेलंगाना: क्या आज के बच्चों में इतनी क्रूरता भर गई है कि वे अपने गुरु की ही जान ले लें? तेलंगाना के नलगोंडा जिले में हुई एक घटना ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया है। यहां 10वीं क्लास में पढ़ने वाले दो नाबालिग लड़कों ने सिर्फ एक लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए अपनी ही स्कूल प्रिंसिपल को बेरहमी से मार डाला।
क्या है ये पूरा मामला?
नलगोंडा जिले के कोंडमल्लेपल्ली में एक स्कूल की प्रिंसिपल थीं कल्लु रूपा रेड्डी। 11 अगस्त को उनकी अपने ही घर में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जब पुलिस ने इस मर्डर केस की जांच शुरू की, तो ऐसे सच सामने आए जिसने सबके होश उड़ा दिए। ये हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसी स्कूल के 10वीं में पढ़ने वाले दो नाबालिग छात्रों ने की थी।
ये दोनों छात्र हॉस्टल के एक ही कमरे में रहते थे। उन्हें महंगा आईफोन, बाइक और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने का जुनून सवार था। इसके लिए वे सोशल मीडिया पर 'जल्दी पैसा कैसे कमाएं' जैसे तरीके खोज रहे थे। प्रिंसिपल रूपा रेड्डी को जब उनके इन फिजूलखर्चों के बारे में पता चला, तो उन्होंने छात्रों को सुधारने की कोशिश की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वे नहीं सुधरे तो उनके माता-पिता से शिकायत कर देंगी। बस यही बात इन छात्रों को नागवार गुजरी।
27 बार चाकू से गोदा!
प्रिंसिपल को अपने रास्ते का कांटा मानकर छात्रों ने उन्हें खत्म करने का प्लान बनाया। करीब एक हफ्ते तक उनके घर की रेकी की। CCTV कैमरों से बचने के लिए उन्होंने नकाब और दस्ताने पहने और घर में पीछे के दरवाजे से घुसे। जैसे ही प्रिंसिपल ने उन्हें पहचाना, उन्होंने चाकुओं से उन पर ताबड़तोड़ 27 वार किए और उन्हें बेरहमी से मार डाला। इसके बाद वे घर में रखे कैश और मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए।
इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को सिर्फ एक सुराग मिला। मरने से कुछ पल पहले रूपा रेड्डी अपनी सास से फोन पर बात कर रही थीं। उनका आखिरी शब्द था 'बाबू'। उस स्कूल में छात्रों को प्यार से 'बाबू' कहने का रिवाज था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने करीब 80 लोगों से पूछताछ की और आखिरकार दोनों छात्रों को पकड़ लिया।
कैसे पकड़े गए?
पुलिस ने जब इन छात्रों को रोककर तलाशी ली, तो उनके पास से 1.54 लाख रुपये कैश मिला। हैरानी की बात यह थी कि उस कैश में 500 रुपये के तीन नोटों पर खून के धब्बे लगे थे! इतना ही नहीं, उन्होंने लूटे हुए पैसों में से 60 हजार रुपये खर्च करके एक नया आईफोन भी खरीद लिया था। प्रिंसिपल की हत्या की यह घटना सिर्फ एक क्राइम नहीं है। यह आज के बच्चों में बढ़ती लालच, सोशल मीडिया के बुरे असर और नैतिक मूल्यों की कमी की तरफ भी इशारा करती है। यह घटना माता-पिता के लिए एक चेतावनी है कि वे बच्चों को मोबाइल देने से पहले यह जरूर देखें कि वे उसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।
