पिछले कुछ दिनों से विधायक दिलीप रावत के नाराज होने की खबरें चल रही थीं। वे लगातार कैबिनेट मंत्री हरक सिंह के खिलाफ मोर्चा भी खोले हैं। इस बीच, दिलीप के कांग्रेस नेताओं के संपर्क में होने की बात सामने आई, जिसे उन्होंने शुक्रवार को सिरे से नकार दिया और इसे विरोधियों की साजिश बताया। 

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में उतरने से पहले प्रत्याशियों और दावेदारी को लेकर खासी भिड़ंत देखी जा रही है। सत्ताधारी भाजपा से हर कोई टिकट के लिए लाइन में खड़ा देखा जा रहा है, ऐसे में सिटिंग विधायकों को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए खासा पसीना बहाना पड़ रहा है। कुछ इसी तरह घमासान देखने को मिल रहा है लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र में। यहां टिकट को लेकर सिटिंग विधायक महंत दिलीप रावत की बैचेनी बढ़ गई है। दरअसल, रावत 2012 से इस सीट से चुनाव जीत रहे हैं। इस बार धामी सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत ने अपनी पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं के लिए यहां से टिकट की दावेदारी की है। 

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लैंसडौन से विधायक दिलीप रावत ने अब हरक सिंह रावत पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि हम बीजेपी के सच्चे सिपाही हैं और मेरी एक ही पार्टी और एक ही विधानसभा सीट है। उन्होंने आगे जोड़ा कि मेरे पास एक की धर्मपत्नी है। बहुतों के पास बहुत सारे विकल्प हो सकते हैं। बता दें कि हरक सिंह रावत कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। दिलीप ने इस बयान के जरिए ये संदेश देने की कोशिश की है कि हरक सिंह रावत के लिए विकल्प काफी हैं, लेकिन उनके लिए कोई विकल्प नहीं है।

कांग्रेस में जाने की चर्चाओं को नकारा
पिछले कुछ दिनों से विधायक दिलीप रावत के नाराज होने की खबरें चल रही थीं। वे लगातार कैबिनेट मंत्री हरक सिंह के खिलाफ मोर्चा भी खोले हैं। इस बीच, दिलीप के कांग्रेस नेताओं के संपर्क में होने की बात सामने आई, जिसे उन्होंने शुक्रवार को सिरे से नकार दिया और इसे विरोधियों की साजिश बताया। विधायक दिलीप रावत का कहना था कि भाजपा उनका अकेला परिवार है, उनके पास एक ही विकल्प है भाजपा। कहीं और जाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। जहां तक उनकी दावेदारी का प्रश्न है तो इसका भी एकमात्र विकल्प लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र ही है।

टिकट देने से पहले जानना चाहिए पृष्ठभूमि
विधायक रावत ने कहा कि वह राजनीति में परिवारवाद के विरुद्ध नहीं हैं। लेकिन, ये जरूर देखा जाना चाहिए कि जिसे टिकट दिया जा रहा है, उसकी राजनीति में पृष्ठभूमि और योगदान क्या है। उसने पार्टी और समाज के लिए क्या-क्या काम किए, इन सबका आकलन भी किया चाहिए। सिर्फ परिवार के आधार पर ही टिकट देना ठीक नहीं कहा जा सकता है।

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