रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का राज्यपाल रमेन डेका ने शुभारंभ किया। गणेश वंदना, कलाकारों का सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण रहीं।
रायपुर। रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 का सोमवार को भव्य आगाज हुआ। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने महाराजा चक्रधर सिंह के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह सिर्फ कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। 14 से 23 सितंबर तक रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले इस समारोह में देश और प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी।
41वां चक्रधर समारोह: राज्यपाल ने कलाकारों का किया सम्मान
समारोह के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले, पद्मश्री श्री अनुज शर्मा सहित अन्य कलाकारों और कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
राज्यपाल ने कहा कि चक्रधर समारोह महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और उनकी दूरदृष्टि को याद करने का अवसर है। रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की महत्वपूर्ण धरोहर भूमि है। यहां के रायगढ़ घराने के कथक ने देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से ज्यादा महत्व कला को दिया। उन्होंने कलाकारों को संरक्षण दिया और संगीत, नृत्य तथा साहित्य को आम लोगों के जीवन से जोड़ने का काम किया। उनकी कृतियां ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी कला और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
राज्यपाल ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने अपनी साधना से यह साबित किया कि कला किसी एक स्थान या केंद्र की मोहताज नहीं होती। जहां निरंतर साधना होती है, वही जगह कला का तीर्थ बन जाती है। आज रायगढ़ की पहचान संगीत, घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और नृत्य की भाव-भंगिमाओं से जुड़ी है।
रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है चक्रधर समारोह
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चक्रधर समारोह अब केवल कोई शासकीय या संस्थागत आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक धड़कन बन चुका है। देश के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलना इसकी खासियत है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
उन्होंने युवाओं से परंपरा के साथ नवाचार को जोड़कर कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ, करमा और आदिवासी नृत्य-लोकगीत प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है और चक्रधर समारोह इसका जीवंत उदाहरण है।
विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी: राज्यपाल रमेन डेका
राज्यपाल ने कहा कि विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखना भी जरूरी है। रायगढ़ औद्योगिक विकास के लिए जाना जाता है, लेकिन कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी इसकी अपनी खास पहचान है। पिछले वर्ष समारोह ने 40 वर्ष पूरे किए और अब 41वां आयोजन नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समारोह सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनते हैं और कला को समाज से जोड़ते हैं। कला और संस्कृति केवल पहचान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति दे सकती हैं।
डिजिटल युग में भी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ाव पिछड़ापन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और ताकत है। चक्रधर समारोह अतीत को याद करने के साथ उस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
महाराजा चक्रधर सिंह के ग्रंथों का संरक्षण जरूरी: देवेंद्र प्रताप सिंह
राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने 41वें चक्रधर समारोह के अवसर पर सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राज्यपाल रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति के लिए आभार जताते हुए कहा कि उनके आगमन से समारोह की गरिमा और बढ़ी है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह की गौरवशाली परंपरा रही है कि इसका शुभारंभ राज्यपाल के करकमलों से होता है। श्री सिंह ने बताया कि महाराजा चक्रधर सिंह का जन्म 19 अगस्त 1905 को हुआ था। उन्होंने ऐसे समय भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के संरक्षण का काम किया, जब कई सांस्कृतिक परंपराएं अपने मूल स्वरूप से दूर होती जा रही थीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत और कला की वह परंपरा, जो मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों, मांगलिक अवसरों और जनजीवन से जुड़ी रही है, उसे मूल स्वरूप में बचाए रखने में महाराजा चक्रधर सिंह का योगदान उल्लेखनीय है। वे केवल शासक नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाएं और उनके द्वारा सृजित ग्रंथ भारतीय संगीत एवं कला जगत की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण, अध्ययन और व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को समझ सकें।
उन्होंने बताया कि महाराजा चक्रधर सिंह की महत्वपूर्ण रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण एवं प्रकाशन का विषय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी रखा है। प्रधानमंत्री ने इसमें विशेष रुचि दिखाई है। श्री सिंह ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इन अमूल्य ग्रंथों के प्रकाशन की दिशा में केंद्र सरकार महत्वपूर्ण पहल करेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार भारतीय संस्कृति, कला और गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार काम कर रही हैं। महाराजा चक्रधर सिंह ने जिस उद्देश्य से भारतीय कला और संस्कृति की महान परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया, उसे आगे बढ़ाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
चक्रधर समारोह रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को दे रहा नई पहचान: राधेश्याम राठिया
लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। महाराजा चक्रधर सिंह ने संगीत और नृत्य के क्षेत्र में रायगढ़ को जो समृद्ध विरासत दी, उसे आगे बढ़ाने में यह समारोह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह को लगातार नई ऊंचाइयों तक ले जाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नगर निगम महापौर श्री जीवर्धन चौहान ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आयोजन समिति, मीडिया और रायगढ़वासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की कला-संस्कृति की विशिष्ट पहचान है और इसे और ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
संस्कृति समाज की आत्मा, कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति: कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने समारोह में उपस्थित राज्यपाल, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और कला प्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, अधिकारी-कर्मचारियों, तकनीकी टीम, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों और कला प्रेमी नागरिकों के सहयोग के लिए आभार जताया।
कलेक्टर ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति। चक्रधर समारोह रायगढ़ की इसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से समारोह कला और संस्कृति के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल, सभापति श्री डिग्री लाल साहू, श्री गुरूपाल भल्ला, श्री श्रीकांत सोमावार, श्री सुभाष पाण्डेय, श्री विकास केडिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, सहायक कलेक्टर श्री गोकुल आर.के. सहित अन्य गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, कला-संस्कृति से जुड़े लोग और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
गणेश वंदना से शुरू हुई 41वें चक्रधर समारोह की पहली शाम
41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 की पहली शाम रामलीला मैदान में गणेश वंदना के साथ शुरू हुई। श्री वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने गणेश वंदना प्रस्तुत की, जिससे समारोह का वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद गायन और वादन की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीमती प्रियंका साहू ने हारमोनियम पर संगत की। कुमारी सुनीता तिवारी, कुमारी ईश्वरी गुप्ता, कुमारी शुभांगी साहू, श्री चवल कुमार पटेल, श्री वेदप्रकाश आदित्य और श्री बसंत यादव ने गायन प्रस्तुत किया।
वाद्य संगीत में श्री देवलाल देवांगन ने पखावज, श्री शान्तनु पटेल ने तबला, श्री किशोर बारीक ने बाँसुरी और कुमारी शगुफ्ता बानो ने वायलिन वादन किया। श्री आनन्ददास महंत ने घुंघरू वादन के जरिए प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया।
कार्यक्रम का निर्देशन श्रीमती प्रियंका साहू ने किया, जबकि श्री सुरेश कुमार चन्देल संयोजक रहे। कलाकारों की सधी हुई प्रस्तुतियों ने समारोह की पहली शाम को सुर और ताल से यादगार बना दिया। रामलीला मैदान में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।


