ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती, पशुपालन, डेयरी, सिंचाई, कृषि ऋण राहत और हाईटेक नर्सरी परियोजना की घोषणा की।
भोपाल/ग्वालियर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 जुलाई को ग्वालियर में आयोजित उन्नत कृषि विषयक संभागीय कार्यशाला में हिस्सा लिया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने किसानों से सीधा संवाद किया और कृषि के साथ पशुपालन को आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बहुफसली खेती, प्राकृतिक खेती और आधुनिक पशुपालन को अपनाकर आय के कई स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से ग्वालियर के खुरैरी और जहांगीरपुर में बनने वाली अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन के प्रथम चरण का रिमोट के माध्यम से भूमिपूजन भी किया। साथ ही उद्यानिकी, मत्स्य पालन और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को हितलाभ वितरित किए।
MP को पांच साल में दुग्ध उत्पादन में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में प्रदेश को इस क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित सांची दुग्ध संघ को लगातार सहायता दी जा रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
सिंचाई रकबा 50 लाख हेक्टेयर पहुंचा, अब 100 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में जहां केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि चंबल-पार्वती-कालीसिंध और केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओं से यह लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। इन परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार भी व्यक्त किया।
किसानों को कृषि ऋण चुकाने के लिए मिलेगा पूरे साल का समय
मुख्यमंत्री ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि अब उन्हें 31 मार्च तक कृषि ऋण जमा करने की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार ने किसानों को ऋण चुकाने के लिए पूरे वर्ष का समय देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के दौरान सरकार खेती, पशुपालन और किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए लगातार नए फैसले ले रही है।
गौ संरक्षण और देशी नस्ल संवर्धन पर सरकार का विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौ माता को कभी आवारा नहीं माना जा सकता। इसी सोच के साथ राज्य सरकार गौ संरक्षण और देशी नस्ल की गायों के संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में निराश्रित गायों के लिए संचालित पुरानी खिड़क प्रणाली समाप्त कर दी गई है और अब बड़े स्तर पर गौशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तर्ज पर इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर जैसे शहरों में भी बड़ी गौशालाएं विकसित की जा रही हैं।
प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने साझा किए सफलता के अनुभव
कार्यशाला में कई प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक और जैविक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने सभी किसानों को मंच पर बुलाकर उनका सम्मान और उत्साहवर्धन किया। ग्वालियर जिले के बिलौआ निवासी किसान प्राण सिंह माथुर ने बताया कि वे प्राकृतिक खेती के माध्यम से सफल खेती कर रहे हैं। उन्होंने अमरूद की "बिलौआ-22" और "बिलौआ-रेड" जैसी नई किस्में विकसित की हैं, जिन्हें वैज्ञानिक मान्यता और पेटेंट भी मिल चुका है। उन्होंने अब तक 50 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया है। इसी प्रकार देवरा गांव के किसान बृजेंद्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपनाई है। उनकी पत्नी को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पांच पुरस्कार मिल चुके हैं।
समन्वित कृषि प्रणाली और बहु-स्तरीय खेती मॉडल का लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई और बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण भी किया। इस मॉडल में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एक साथ जोड़ा गया है। इसमें एक गतिविधि से निकलने वाला अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए उपयोगी संसाधन बनता है, जिससे लागत कम होती है और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार होते हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बांटे हेलमेट, सड़क सुरक्षा का दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा अभियान के तहत लगभग 50 लोगों को हेलमेट वितरित किए। उन्होंने सभी से हेलमेट पहनकर वाहन चलाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।
एकीकृत कृषि मॉडल और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में भी हुए शामिल
कृषि विश्वविद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री ने समन्वित कृषि प्रणाली के तहत तैयार बहुउद्देश्यीय तालाब का अवलोकन किया। तालाब में दाना डालते ही बतखें उनके पास आ गईं। इस मॉडल में मुर्गी पालन, मछली पालन और बतख पालन को एक ही संरचना में वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा गया है। मुर्गियों के चूजों की बीट तालाब में गिरती है, जिसे मछलियां और बतखें भोजन के रूप में उपयोग करती हैं। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और अतिरिक्त आय सुनिश्चित होती है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत आम का पौधा लगाया और प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।


