मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की तैयारी तेज है। सरकार दूध संकलन, नई डेयरी समितियों, डिजिटल मॉनिटरिंग और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर फोकस करेगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार ने डेयरी क्षेत्र की गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आय और आर्थिक स्थिति मजबूत करने के प्रयासों की समीक्षा की।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (MPCDF) और प्रदेश के दुग्ध संघों का कार्यभार संभालने के बाद राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को डेयरी विकास से जुड़े कामों में तेजी लाने और तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
MP Dairy News: प्रदेश में 2000 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनीं
बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में करीब 2 हजार नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों से प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का फोकस गांवों में दुग्ध सहकारी समितियों का नेटवर्क बढ़ाने, दूध का संकलन बढ़ाने और किसानों-पशुपालकों को डेयरी कारोबार से जोड़ने पर है। इसके जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश भी की जा रही है।
MP में बढ़ा दुग्ध संकलन, दूध उत्पादकों को भुगतान भी बढ़ा
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में दुग्ध संकलन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां रोजाना 8.73 लाख किलोग्राम दूध का संकलन हो रहा था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 9.66 लाख किलोग्राम प्रतिदिन पहुंच गया। वर्ष 2026-27 में जुलाई तक रोजाना 9.75 लाख किलोग्राम दूध के संकलन की जानकारी दी गई।
बैठक में इसे प्रदेश में 27 प्रतिशत की वृद्धि के रूप में बताया गया। हालांकि दिए गए आंकड़ों के आधार पर संकलन की अवधि और वृद्धि के आंकड़ों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना होगा। दुग्ध उत्पादकों को किए जाने वाले भुगतान में भी बढ़ोतरी की जानकारी दी गई। वर्ष 2024-25 में दूध उत्पादकों को 1,477 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,780 करोड़ रुपये हो गया।
Dairy Cooperative: 2028-29 तक 3827 नई समितियां बनाने का लक्ष्य
मध्यप्रदेश में दुग्ध सहकारिता का दायरा बढ़ाने की योजना पर भी बैठक में चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अब तक 1,926 दुग्ध सहकारी समितियां गठित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 801 ऐसी समितियों को दोबारा सक्रिय किया गया है, जो पहले निष्क्रिय थीं। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक प्रदेश में 3,827 अतिरिक्त दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य तय किया है। अगले पांच वर्षों में कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियां स्थापित करने की भी योजना है। इसका उद्देश्य गांव स्तर पर दूध का संकलन बढ़ाना और ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों को सहकारी डेयरी व्यवस्था से जोड़ना है।
Gwalior-Jabalpur Dairy Union को NDDB से मिला लोन
डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की ओर से ग्वालियर और जबलपुर दुग्ध संघों को ऋण भी उपलब्ध कराया गया है। ग्वालियर दुग्ध संघ को दूध के संकलन और प्रसंस्करण के लिए 470 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है। वहीं जबलपुर दुग्ध संघ को इसी उद्देश्य से 500 लाख रुपये का ऋण मिला है। इस राशि का इस्तेमाल दूध संकलन और प्रोसेसिंग से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
Dairy Sector में डिजिटल मॉनिटरिंग और पूरी वैल्यू चेन के डिजिटलीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने डेयरी क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं। विपणन गतिविधियों से जुड़े मैदानी कर्मचारियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही पूरी डेयरी वैल्यू चेन को डिजिटल बनाने पर भी जोर है। दूध के संकलन से लेकर प्रसंस्करण, वितरण और बिक्री तक की प्रक्रिया में डिजिटल व्यवस्था लागू करने की योजना है। इससे कामकाज की निगरानी आसान होने के साथ व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। दूध के साथ घी, दही और छाछ की बिक्री बढ़ी, नए पार्लर खोलने की तैयारी
बैठक में दूध के अलावा डेयरी उत्पादों की बिक्री में हुई बढ़ोतरी पर भी चर्चा हुई। घी, दही और छाछ जैसे उत्पादों की मांग बढ़ने को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में नए डेयरी पार्लर आवंटित करने के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उपभोक्ताओं तक डेयरी उत्पादों की सीधी पहुंच बढ़ाने के साथ दुग्ध संघों के कारोबार का विस्तार करने में भी मदद मिल सकती है।
Dairy Cooperative में माइक्रो ATM और महिला सदस्यता पर फोकस
दुग्ध सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में समितियों के जरिए वित्तीय लेन-देन को आसान बनाने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा एमपीसीडीएफ को दुग्ध सहकारी समितियों में महिलाओं की सदस्यता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि डेयरी सहकारिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है।
पशुपालकों की आय बढ़ाने और MP को मिल्क कैपिटल बनाने पर जोर
पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में दूध का उत्पादन और संकलन बढ़ाने के साथ पशुपालकों को डेयरी अर्थव्यवस्था से ज्यादा मजबूती से जोड़ना है। इसके लिए नई समितियों का गठन, पुरानी समितियों को सक्रिय करना, दूध संकलन बढ़ाना, प्रोसेसिंग सुविधाओं को मजबूत करना और बिक्री नेटवर्क का विस्तार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इन गतिविधियों की गति बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र से जुड़े तय लक्ष्यों पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए सहकारी डेयरी नेटवर्क और डिजिटल व्यवस्था को भी अहम आधार बनाया जा रहा है।


