नवरात्र: बंगाल में सिंदूर खेला की रस्म, जानें दशमी के दिन क्यों मनाया जाता है ये उत्सव

वीडियो डेस्क। नवरात्र का त्यौहार पूरे देश में अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है। 9 दिन तक मां की उपासना, व्रत और उत्सव मनाए जाते हैं। घर घर में देवी मां पूजी जाती हैं। 9 दिन तक मां की आराधना की जाती है और फिर मां दुर्गा को विदा किया जाता है। बंगाल में नवरात्रि के मौके पर अलग ही माहौल रहता है। 

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वीडियो डेस्क। नवरात्र का त्यौहार पूरे देश में अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है। 9 दिन तक मां की उपासना, व्रत और उत्सव मनाए जाते हैं। घर घर में देवी मां पूजी जाती हैं। 9 दिन तक मां की आराधना की जाती है और फिर मां दुर्गा को विदा किया जाता है। बंगाल में नवरात्रि के मौके पर अलग ही माहौल रहता है। नवरात्र के अंतिम दिन दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। यहां दशहरे के दिन मां दुर्गा को महिलाएं सिंदूर अर्पित करती हैं। जिसे सिंदूर खेला की रस्म के तौर पर जाना जाता है। बंगाली महिलाओं के लिए सिंदूर खेला एक बड़ी और विशेष रस्म हैं। मान्यता है कि मां को विदाई देने के साथ महिलाएं सिंदूर अर्पित कर मां से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेती हैं। पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श कर उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगा महिलाओं पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। महिलाएं मां दुर्गा को खुश करने के लिए वहां पारंपरिक धुनुची नृत्य करती हैं। 

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