ओलंपिक में दूसरी बार मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली पी वी सिंधु के बारे में क्या आप जानते हैं ये बातें?

वीडियो डेस्क। विश्व चैंपियन पीवी सिंधू ने टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक कर इतिहास रच दिया है।  पीवी सिंधु ओलिंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी हैं। उन्होंने पांच साल पहले रियो में सिल्वर मेडल जीता था। देश की इस बेटी के उस ऐतिहासिक पल की हर कोई तरीफ कर रहा है जब पीवी सिंधु ने मेडल जीत भारत की झोल में डाला था। 

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वीडियो डेस्क। विश्व चैंपियन पीवी सिंधू ने टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक कर इतिहास रच दिया है। पीवी सिंधु ओलिंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी हैं। उन्होंने पांच साल पहले रियो में सिल्वर मेडल जीता था। देश की इस बेटी के उस ऐतिहासिक पल की हर कोई तरीफ कर रहा है जब पीवी सिंधु ने मेडल जीत भारत की झोल में डाला था। पीवी सिंधु का नाम आज हर किसी की जुबान पर हैं। हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। पीवी सिंधु को भले ही खेल विरासत में मिले हों लेकिन इस मेडल इस कामयाबी के पीछे है पीवी सिंधु की कड़ी मेहनत। पुसरला वेंकट सिंधु ये पीवी सिंधु का पूरा नाम है। उनका जन्म 5 जुलाई 1995 को पीवी रमना और पी विजया के घर हुआ था, उनके माता-पिता दोनों ही एथलीट थे - राष्ट्रीय स्तर पर दोनों वॉलीबॉल खिलाड़ी थे, इसलिए पीवी सिंधु की खेलों में रुचि अपने पिता से विरासत में ही मिली है। उनके पिता को वास्तव में वॉलीबॉल के खेल में उनके योगदान के लिए 2000 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया है। पीवी सिंधु ने 8 साल की उम्र में ही खुद को बैडमिंटन के लिए तैयार कर लिया था। लगभर 12 साल तक, उनके पिता उन्हें पुलेला गोपीचंद की एकेडमी में ले जाने के लिए सुबह 3 बजे उठाते थे जहां से उन्होंने बैडमिंटन का प्रशिक्षण लिया था। सिंधु 120 किमी रोजना सफर तय करती थी और इसके बाद ट्रेनिंग में पसीना बहाती थीं। पीवी सिंधु 14 साल की उम्र में इंटरनेशनल सर्किट में दाखिल हो गई थीं। 16 साल की उम्र में वे पहली बार ऑल इंग्लैंड ओपन में खेलीं। इसके बाद धीरे-धीरे सिंधु सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं। वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में पांच मेडल जीतने वाली भारत की इकलौती खिलाड़ी हैं। इस टूर्नामेंट में उन्होंने दो कांस्य, दो रजत और एक गोल्ड जीता है। पीवी सिंधु 2018 और 2019 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली महिला खिलाड़ियों में शामिल हुई थीं। फरवरी 2019 में सिंधु ने चीनी स्पोर्ट्स ब्रांड ली निंग के साथ चार साल का करार किया था। यह करार 50 करोड़ रुपये का था यह बैडमिंटन इतिहास की सबसे बड़ी डील मे से एक थी। 

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