वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन, लेकिन टेंशन में चीन? ये है असली वजह
Venezuela Crisis China Impact: वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन के बाद दुनिया में हलचल है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी का कई देशों ने विरोध किया है, जिसमें चीन सबसे आगे है। ऐसे में सवाल आखिर बीजिंग के लिए वेनेजुएला इतना खास क्यों है? जानिए सच...

वेनेजुएला, चीन के लिए खास क्यों है?
दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ले जाने के बाद से ही सवाल उठ रहा है कि अब चीन का क्या होगा? क्योंकि, वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन ही है। हालांकि, फिलहाल बीजिंग को तुरंत कोई बड़ा झटका लगता नहीं दिख रहा, लेकिन आने वाले महीनों में तस्वीर बदल सकती है। यही कारण है कि चीन इस कार्रवाई का विरोध करने वालों में सबसे आगे नजर आ रहा है।
अभी चीन को कितना नुकसान?
भले ही अमेरिका के कदम से वेनेजुएला में हालात तनावपूर्ण हो गए हों, लेकिन चीन के पास इस वक्त एक बड़ा 'बफर' मौजूद है। दरअसल, करोड़ों बैरल प्रतिबंधित तेल पहले से समुद्र में टैंकरों में जमा है। तेल बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, चीन और मलेशिया के पास समुद्र में करीब 8.2 करोड़ बैरल तेल स्टोरेज में है। इसमें एक बड़ा हिस्सा वेनेजुएला का तेल है, जबकि बाकी ईरान से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि अभी चीन को सप्लाई अचानक बंद होने का डर नहीं सता रहा।
वेनेजुएला का तेल इतना खास क्यों है?
वेनेजुएला का कच्चा तेल थोड़ा अलग किस्म का होता है। यह भारी और ज्यादा सल्फर वाला तेल है, जिसका इस्तेमाल खासतौर पर बिटुमिन बनाने में होता है। बिटुमिन वही चीज है, जिससे सड़कें और बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट बनते हैं। चीन की छोटी रिफाइनरियां, जिन्हें आम बोलचाल में 'टीपॉट रिफाइनर' कहा जाता है, इस तेल को इसलिए पसंद करती हैं, क्योंकि यह सस्ते दाम पर मिलता रहा है।
तेल बाजार अभी क्या संकेत दे रहा है?
तेल बाजार फिलहाल ज्यादा घबराया हुआ नहीं दिख रहा। शंघाई में बिटुमिन के दाम थोड़े बढ़े जरूर हैं, लेकिन अब भी पिछले चार साल के निचले स्तर के आसपास बने हुए हैं। इसका साफ मतलब है कि अभी सप्लाई की कमी नहीं है। ट्रेडर्स यह भी मान रहे हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो फ्यूल ऑयल जैसे विकल्पों से कुछ हद तक कमी पूरी की जा सकती है।
चीन के लिए आगे कहां फंस सकता है पेंच?
जानकारों का मानना है कि असल खतरा अभी नहीं, बल्कि आने वाले समय में है। मादुरो की गिरफ्तारी से पहले ही अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल जहाजों पर सख्ती बढ़ा दी थी। अब जब ट्रंप साफ कह चुके हैं कि तेल सेक्टर पर प्रतिबंध जारी रहेंगे, तो चीन के लिए नई दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
अमेरिका के प्लान से बढ़ी चीन की चिंता
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कह दिया है कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल उद्योग को रीबिल्ड करेगा और अमेरिकी कंपनियां इसमें अगुवाई करेंगी। इस बयान के बाद चीन की सरकारी तेल कंपनियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं, जो सालों से वेनेजुएला में निवेश और दावे करती आई हैं। अगर अमेरिकी कंपनियों का दबदबा बढ़ता है, तो चीन को या तो नए सप्लायर ढूंढने होंगे या फिर राजनीतिक स्तर पर कड़ा सौदा करना पड़ेगा। फिलहाल समुद्र में जमा तेल चीन को कुछ वक्त की राहत जरूर दे रहा है। लेकिन अगर वेनेजुएला से सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो चीन को भारी तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर होना पड़ेगा, लागत बढ़ सकती है, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट महंगे हो सकते हैं।
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