सुरक्षा के लिए हेलमेट को हर 3-5 साल में बदलें, भले ही वह बाहर से ठीक दिखे। समय के साथ इसकी अंदरूनी बनावट कमजोर हो जाती है। एक्सीडेंट होने पर या ढीला हो जाने पर इसे तुरंत बदलना अनिवार्य है।

बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट सबसे ज़रूरी सेफ्टी गियर है। लेकिन अक्सर लोग एक ही हेलमेट सालों-साल इस्तेमाल करते रहते हैं। अगर बाहर से कोई खरोंच या टूट-फूट न दिखे, तो उन्हें लगता है कि हेलमेट बिल्कुल सेफ है। लेकिन हेलमेट की सेफ्टी सिर्फ बाहरी लुक देखकर तय नहीं होती। समय के साथ हेलमेट की अंदरूनी पैडिंग, लाइनिंग और दूसरे पार्ट्स कमजोर पड़ जाते हैं। इससे हेलमेट सिर पर ठीक से फिट नहीं होता और उसकी सुरक्षा करने की क्षमता कम हो जाती है। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की SHARP सेफ्टी स्कीम भी यही सलाह देती है कि हेलमेट को आमतौर पर 3 से 5 साल में बदल देना चाहिए।

पांच साल बाद बदलना ही सुरक्षित है

अगर आपका हेलमेट पांच साल से ज़्यादा पुराना हो गया है, तो उसे बदलने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। अगर आप हेलमेट रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं, तो शायद इसे और भी जल्दी बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है। इस्तेमाल के साथ अंदर की पैडिंग सिकुड़ जाती है और हेलमेट ढीला हो जाता है। इससे एक्सीडेंट के समय सिर को पूरी सुरक्षा नहीं मिल पाती। हालांकि, हर हेलमेट की लाइफ एक जैसी नहीं होती। इसलिए हेलमेट बनाने वाली कंपनी के निर्देशों और उस पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग डेट को ज़रूर चेक करें।

एक्सीडेंट होने पर तुरंत बदलें

अगर आप हेलमेट पहनकर किसी एक्सीडेंट का शिकार हुए हैं, तो उसे दोबारा इस्तेमाल न करें, भले ही बाहर से कोई बड़ा डैमेज न दिख रहा हो। टक्कर की वजह से इसके अंदर के सेफ्टी पार्ट्स को ऐसा नुकसान पहुंच सकता है जो आंखों से दिखाई नहीं देता। किसी सख्त सतह पर हेलमेट के गिरने से भी उसकी सेफ्टी पर असर पड़ सकता है। SHARP स्कीम चेतावनी देती है कि बाहर से कोई निशान न दिखने पर भी अंदर का स्ट्रक्चर डैमेज हो सकता है।

पैडिंग ढीली हो गई है? ध्यान दें

अगर हेलमेट आपके सिर पर पहले की तरह टाइट फिट नहीं हो रहा है, तो यह संकेत है कि इसे बदलने का समय आ गया है। पैडिंग का ढीला होना, चिन स्ट्रैप (ठोड़ी वाली पट्टी) का खराब होना या हेलमेट का सिर पर हिलना जैसी बातों को नज़रअंदाज़ न करें। हेलमेट की सेफ्टी के लिए सही फिटिंग सबसे ज़रूरी चीज़ों में से एक है। चाहे हेलमेट कितना भी महंगा क्यों न हो, अगर वो सिर पर ठीक से फिट नहीं होता, तो एक्सीडेंट के समय ज़रूरी सुरक्षा नहीं दे पाएगा।

नए हेलमेट में मिलती हैं ज़्यादा सुविधाएं

पुराना हेलमेट बदलने से न सिर्फ आपकी सेफ्टी बढ़ती है, बल्कि सफर का आराम भी बेहतर होता है। नए मॉडल्स में बेहतर वेंटिलेशन (हवा आने-जाने की जगह), हल्के डिज़ाइन और अच्छी पैडिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। अगर हेलमेट का वाइज़र (सामने का शीशा) घिस गया है या उस पर बहुत ज़्यादा खरोंचें हैं, तो उसे भी बदल देना चाहिए। SHARP के मुताबिक, वाइज़र पर पड़ी खरोंचें रात में सामने से आ रही गाड़ियों की रोशनी में देखने में दिक्कत पैदा कर सकती हैं।

पैसे बचाने के लिए सेफ्टी से समझौता न करें

पैसे बचाने के लिए सेफ्टी से समझौता न करें। हेलमेट सिर्फ एक एक्सेसरी नहीं है। एक्सीडेंट के समय यह आपके सिर और दिमाग को गंभीर चोट से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए, सिर्फ इसलिए कि आपका पुराना हेलमेट देखने में अच्छा है, उसे सालों तक इस्तेमाल करने से बचें। 5 साल से पुराना हेलमेट, एक्सीडेंट में डैमेज हुआ हेलमेट, या ढीला हो चुका हेलमेट बदलना ही सबसे सुरक्षित फैसला है। नया हेलमेट खरीदते समय सही फिट, आराम और सेफ्टी स्टैंडर्ड को प्राथमिकता दें और कंपनी के निर्देशों का पालन करें।