भारत में भगवान श्रीकृष्ण के 20 प्रसिद्ध मंदिर अलग-अलग स्वरूपों और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। जानिए उनकी मान्यता और विशेषता।
Lord Krishna Temples: भगवान श्रीकृष्ण को कहीं बाल गोपाल के रूप में पूजा जाता है, कहीं बांके बिहारी, कहीं द्वारकाधीश, तो कहीं श्रीनाथजी और जगन्नाथ के रूप में। यही वजह है देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद भगवान कृष्ण के मंदिरों की अपनी अलग धार्मिक पहचान और मान्यता है। मथुरा-वृंदावन को कृष्ण की बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है, तो द्वारका में उन्हें राजा के रूप में पूजा जाता है। उडुपी, गुरुवायूर और नाथद्वारा जैसे तीर्थ भी कृष्ण भक्ति की अलग-अलग परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। आइए जानते हैं 20 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों के बारे में।
1. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा
मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है। भगवान कृष्ण का जन्म यहीं कंस के कारागार में हुआ था। इसलिए कृष्ण जन्मभूमि का दर्शन भक्तों के लिए खास महत्व रखता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन होता है।
2. बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन
वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर भगवान कृष्ण का बांके बिहारी स्वरूप है। यहां कृष्ण को बाल और मनमोहक स्वरूप में पूजा जाता है। ब्रज की कृष्ण भक्ति परंपरा में इस मंदिर का विशेष स्थान है।
3. द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका
गुजरात के द्वारका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण के राजा स्वरूप से जुड़ा है। इसे जगत मंदिर भी कहा जाता है और यह चार धाम में शामिल द्वारका तीर्थ का मुख्य केंद्र है।
4. प्रेम मंदिर, वृंदावन
प्रेम मंदिर राधा-कृष्ण की भक्ति को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर है। यहां भगवान कृष्ण की अलग-अलग लीलाओं को दिखाया गया है। राधा-कृष्ण प्रेम और भक्ति की भावना इस मंदिर की प्रमुख विशेषता मानी जाती है।
5. श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा
राजस्थान के नाथद्वारा में भगवान कृष्ण के श्रीनाथजी स्वरूप की पूजा होती है। श्रीनाथजी को गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले कृष्ण के स्वरूप से जोड़ा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है।
6. गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर
जयपुर का गोविंद देव जी मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इस मंदिर की विशेष धार्मिक महत्ता है। यहां भगवान के दर्शन और आरती की परंपरा भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
7. राधा रमण मंदिर, वृंदावन
वृंदावन का राधा रमण मंदिर कृष्ण के राधा रमण स्वरूप को समर्पित है। वैष्णव परंपरा में इसे अत्यंत पवित्र मंदिर माना जाता है। यहां भगवान कृष्ण की सेवा और पूजा की प्राचीन धार्मिक परंपराएं आज भी निभाई जाती हैं।
8. राधा वल्लभ मंदिर, वृंदावन
यह मंदिर राधा-कृष्ण भक्ति की विशेष परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां राधा को भक्ति में विशेष स्थान प्राप्त है और कृष्ण को राधावल्लभ स्वरूप में पूजा जाता है।
9. कृष्ण-बलराम मंदिर, वृंदावन
वृंदावन का कृष्ण-बलराम मंदिर भगवान कृष्ण और बलराम को समर्पित है। यहां हरिनाम संकीर्तन और कृष्ण भक्ति की वैष्णव परंपरा विशेष रूप से दिखाई देती है।
10. उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक का उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर भगवान कृष्ण की अनोखी पूजा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान कृष्ण के दर्शन एक विशेष खिड़की से किए जाते हैं, जिसे कनकना किंडी कहा जाता है। यह मंदिर उडुपी की वैष्णव परंपरा का प्रमुख केंद्र है।
11. गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर, केरल
केरल का गुरुवायूर मंदिर भगवान कृष्ण के प्रमुख दक्षिण भारतीय तीर्थों में गिना जाता है। यहां कृष्ण को बाल स्वरूप में पूजा जाता है और मंदिर की पूजा परंपराएं खास मानी जाती हैं। इसे दक्षिण की द्वारका भी कहते हैं।
12. जगन्नाथ मंदिर, पुरी
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की पूजा होती है। पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धाम में शामिल है और यहां भगवान की भक्ति का विशाल धार्मिक स्वरूप देखने को मिलता है।
13. द्वारकाधीश मंदिर, कांकरोली
राजस्थान के कांकरोली में स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को द्वारकाधीश स्वरूप में समर्पित है। वैष्णव परंपरा में यह मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
14. गोपीनाथ मंदिर, वृंदावन
वृंदावन के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में गोपीनाथ मंदिर भी शामिल है। यहां भगवान कृष्ण को गोपीनाथ स्वरूप में पूजा जाता है। ब्रज की भक्ति परंपरा में गोपीनाथ नाम कृष्ण की गोपियों और ब्रज से जुड़ी लीलाओं की याद दिलाता है।
15. जुगल किशोर मंदिर, वृंदावन
यमुना के किनारे स्थित जुगल किशोर मंदिर राधा-कृष्ण की भक्ति से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है। वृंदावन के प्राचीन मंदिरों की धार्मिक परंपरा में इसका विशेष स्थान माना जाता है।
16. राधा दामोदर मंदिर, वृंदावन
राधा दामोदर मंदिर में भगवान कृष्ण को दामोदर स्वरूप में पूजा जाता है। ‘दामोदर’ नाम कृष्ण की उस बाल लीला से जुड़ा है जिसमें माता यशोदा ने उन्हें रस्सी से बांधा था। इसलिए कृष्ण की बाल लीलाओं में आस्था रखने वाले भक्तों के लिए यह मंदिर खास महत्व रखता है।
17. इस्कॉन मंदिर, दिल्ली
दिल्ली का इस्कॉन मंदिर राधा-कृष्ण और कृष्ण-बलराम की भक्ति का प्रमुख केंद्र है। यहां भगवद्गीता और कृष्ण भक्ति से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम तथा संकीर्तन होते हैं।
18. इस्कॉन मायापुर, पश्चिम बंगाल
मायापुर गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यहां कृष्ण भक्ति और हरिनाम संकीर्तन की विशेष परंपरा देखने को मिलती है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां कृष्ण नाम का संकीर्तन और पूजा करने आते हैं।
19. रणछोड़राय मंदिर, डाकोर
गुजरात के डाकोर में भगवान कृष्ण को रणछोड़राय स्वरूप में पूजा जाता है। ‘रणछोड़’ नाम भगवान कृष्ण की उस लीला से जुड़ा है जब उन्होंने युद्धभूमि से हटकर एक विशेष रणनीतिक भूमिका निभाई। यह गुजरात का प्रमुख कृष्ण तीर्थ है।
20. वेणुगोपाल स्वामी मंदिर, मैसूर
कर्नाटक के वेणुगोपाल स्वामी मंदिर में भगवान कृष्ण के बांसुरी बजाने वाले स्वरूप के दर्शन होते हैं। ‘वेणुगोपाल’ नाम ही कृष्ण की बांसुरी और गोपाल स्वरूप से जुड़ा है। कृष्ण की मधुर भक्ति परंपरा में इस स्वरूप का विशेष महत्व है।
कृष्ण के अलग-अलग स्वरूप, एक ही भक्ति
इन मंदिरों की सबसे खास बात यह है कि हर जगह भगवान कृष्ण की भक्ति का स्वरूप थोड़ा अलग दिखाई देता है। मथुरा में वे जन्मभूमि के कान्हा हैं, वृंदावन में बांके बिहारी और गोपीनाथ हैं, नाथद्वारा में श्रीनाथजी हैं, द्वारका में द्वारकाधीश और उडुपी में बाल कृष्ण।


