Kyrgyzstan Yurt: किर्गिस्तान के पहाड़ों में बसे ये गोल-सफेद घर आखिर कैसे चलते हैं? जानिए यर्ट यानी Boz Ui की अनोखी परंपरा और खानाबदोश जीवन की दिलचस्प कहानी।

Kyrgyz Yurt House: दूर-दूर तक फैले पहाड़, हरे-भरे चरागाह और उनके बीच नजर आते गोल-गोल सफेद घर...पहली नजर में लगेगा जैसे किसी फिल्म का सीन हो। लेकिन मध्य एशिया के देश Kyrgyzstan में यह आज भी जीवन का हिस्सा है। यहां पहाड़ी इलाकों में आपको ऐसे परिवार मिल जाएंगे जो मौसम और पशुओं के चरने की जगह के हिसाब से अपना ठिकाना बदलते हैं और उनके साथ चलता है उनका पारंपरिक घर- यर्ट। किर्गिज भाषा में इसे Boz Ui कहते हैं। यह कोई नॉर्मल टेंट नहीं, बल्कि लकड़ी के ढांचे और ऊनी फेल्ट से बना ऐसा पोर्टेबल घर है, जिसे जरूरत के मुताबिक खोला, ले जाया और फिर दूसरी जगह खड़ा किया जा सकता है।

1. आखिर घर लेकर घूमने की जरूरत क्यों पड़ती है?

किर्गिस्तान का बड़ा हिस्सा पहाड़ी है और यहां पारंपरिक पशुपालक समुदायों का जीवन मौसम के साथ बदलता रहा है। गर्मियों में परिवार अपने घोड़ों, भेड़ों और दूसरे पशुओं के साथ ऊंचे जेलू (Jailoo) यानी पहाड़ी चरागाहों की ओर जाते हैं। ऐसे जीवन में एक जगह स्थायी मकान बनाना हमेशा सुविधाजनक नहीं होता। पशुओं के लिए अच्छी घास जहां मिले, परिवार कुछ समय के लिए वहां डेरा डाल देता है। इसलिए ऐसा घर चाहिए था जिसे छोड़ना न पड़े और साथ भी ले जाया जा सके। यर्ट इसी जरूरत से जुड़ा समाधान है। इसका ढांचा अलग-अलग हिस्सों में खुल जाता है और फेल्ट की परतों को भी समेटकर ले जाया जा सकता है।

2. यर्ट दिखने में गोल ही क्यों होता है?

यर्ट की सबसे पहली पहचान उसका गोल आकार है। इसकी दीवारें लकड़ी की जालीदार संरचना यानी Kerege से बनती हैं। ऊपर की तरफ घुमावदार लकड़ी की छड़ें यानी Uuk छत का ढांचा तैयार करती हैं और सबसे ऊपर एक गोल लकड़ी का छल्ला होता है, जिसे Tunduk कहा जाता है। यह डिजाइन सिर्फ देखने में सुंदर नहीं है। गोल संरचना में कोने नहीं होते और इसका पूरा ढांचा एक-दूसरे से जुड़े हिस्सों के सहारे खड़ा रहता है। ऊपर का Tunduk प्रकाश और हवा के लिए भी खास है। यही Tunduk किर्गिज कल्चर में बेहद खास प्रतीक है और इसकी आकृति देश के राष्ट्रीय ध्वज पर भी दिखाई देती है।

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3. सफेद कपड़ा आखिर किस चीज का बना होता है?

यर्ट की बाहरी परत आमतौर पर फेल्ट की होती है, जिसे ऊन से तैयार किया जाता है। यही मोटी परत यर्ट को मौसम से बचाने में मदद करती है। किर्गिस्तान जैसे पहाड़ी इलाकों में दिन और रात के तापमान में काफी अंतर होता है। ऐसे में फेल्ट की परत घर के अंदर के वातावरण को आरामदायक बनाए रखने में मदद करती है। यानी यर्ट की खूबी केवल यह नहीं कि इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है, बल्कि इसकी सामग्री भी उस जीवनशैली के अनुकूल विकसित हुई जिसमें इसे इस्तेमाल किया जाता था।

4. इसे बनाने में सिर्फ एक शख्स की मेहनत नहीं होती

यर्ट अपने आप में एक पूरा पारंपरिक शिल्प है। इसके निर्माण से जुड़े कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवारों और कारीगरों के बीच आगे बढ़ते रहे हैं। लकड़ी के ढांचे और दूसरे हिस्सों को तैयार करने की परंपरागत जिम्मेदारियां अलग-अलग कारीगर निभाते हैं, जबकि फेल्ट और सजावटी हिस्सों को तैयार करने में भी विशेष पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल होता है। इसलिए एक यर्ट सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की कारीगरी और सामुदायिक ज्ञान का परिणाम है।

5. यर्ट के अंदर भी हर जगह का अपना महत्व है

बाहर से देखने पर यर्ट एक गोल कमरा जैसा दिखाई देता है, लेकिन पारंपरिक यर्ट के भीतर जगहों का विभाजन भी तय माना जाता रहा है। दरवाजे के सामने वाला हिस्सा यानी Tor सम्मानित स्थान माना जाता है। यहां मेहमानों और परिवार के बुजुर्गों के बैठने की परंपरा रही है। यर्ट के अलग-अलग हिस्सों का संबंध परिवार, घरेलू काम और पशुपालन से जुड़ी वस्तुओं से भी रहा है। इस तरह यर्ट के भीतर की व्यवस्था भी घुमंतू समाज की सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं को दर्शाती है।

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6. क्या आज भी लोग सच में यर्ट में रहते हैं?

हां, लेकिन आज पूरा किर्गिस्तान यर्ट में नहीं रहता। शहरों और गांवों में स्थायी घर सामान्य हैं। फिर भी कुछ परिवार-पशुपालक समुदाय मौसम के हिसाब से पहाड़ी चरागाहों की ओर जाते समय यर्ट का इस्तेमाल करते हैं।