India Foreign Policy: New York Times के विश्लेषण में माना गया कि PM Modi के विदेश दौरे भारत की अर्थव्यवस्था और छवि के लिए फायदेمند हैं। अगस्त 2025 से अब तक 20 देशों की यात्राएं, EU FTA पर हस्ताक्षर, जर्मनी, फ्रांस, UK के साथ अहम सौदे और 2047 तक टॉप 5 शिप बिल्डर्स बनने का लक्ष्य शामिल है।
Narendra Modi Foreign Visits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार विदेश दौरों को लेकर देश में भले ही राजनीतिक बहस होती रही हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीति को लेकर तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है कि मोदी की विदेश यात्राओं ने भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत अब किसी एक ताकत पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप के टैरिफ के बाद भारत ने बदली रणनीति
अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों में उस समय तनाव बढ़ा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर भारी शुल्क लगाया और रूस से तेल खरीदने को लेकर भी नई दिल्ली पर दबाव बढ़ाया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में संघर्ष और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई।
ऐसे माहौल में भारत ने अपनी विदेश नीति में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करने पर जोर दिया। फ्रांस, जापान, कनाडा और यूरोप समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
20 देशों का दौरा, 13 देशों के नेता भारत पहुंचे
अगस्त 2025 से अब तक प्रधानमंत्री मोदी करीब 20 देशों की आधिकारिक यात्राएं कर चुके हैं, जबकि 13 देशों के शीर्ष नेता भारत का दौरा कर चुके हैं। इन यात्राओं का फोकस सिर्फ राजनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी रहा।
हालिया उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरे को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। शंघाई सहयोग संगठन की बैठकों के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा और रूस के साथ रणनीतिक संबंधों पर चर्चा भारत की प्राथमिकताओं में रही।
यूरोप से रक्षा और व्यापार तक कई बड़े समझौते
प्रधानमंत्री के विदेश दौरों के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते सामने आए हैं। जर्मनी के साथ पनडुब्बी तकनीक और रक्षा सहयोग, फ्रांस के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा शिक्षा और वीजा से जुड़े सहयोग पर जोर दिया गया। ब्रिटेन के साथ व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कई क्षेत्रों में शुल्क कम करने की दिशा में कदम उठाए गए।
यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी भारत की आर्थिक कूटनीति की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। लंबे समय से अटके इस समझौते में दोनों पक्षों ने व्यापार बढ़ाने के लिए कई रियायतों पर सहमति बनाई। इससे भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में पहुंच के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
रक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर बढ़ा जोर
भारत की विदेश नीति अब केवल पारंपरिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रह गई है। रक्षा तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जहाज निर्माण और युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार के अवसर प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गए हैं।
नॉर्वे के साथ रोजगार से जुड़े सहयोग और दक्षिण कोरिया के साथ जहाज निर्माण में साझेदारी बढ़ाने की कोशिश इसी दिशा का हिस्सा है। भारत ने 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य भी सामने रखा है।
अमेरिका के दबाव के बीच दूसरे साझेदारों पर भरोसा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका के साथ संबंधों में आई खटास ने भारत को अपनी साझेदारियों में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है। भारत अब फ्रांस, जापान, कनाडा और यूरोपीय देशों जैसी अलग-अलग शक्तियों के साथ रिश्तों को मजबूत कर रहा है, ताकि किसी एक देश के फैसले का भारतीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर बहुत ज्यादा असर न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नीति किसी एक खेमे में जाने के बजाय अपने हितों के अनुसार अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश है।
क्या मोदी की विदेश नीति बदल रही है भारत की तस्वीर?
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों का असर केवल समझौतों और बैठकों तक सीमित नहीं माना जा रहा। भारत रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में नए साझेदार तलाश रहा है। ट्रंप प्रशासन के दबाव के बीच भारत का यह रुख बताता है कि नई दिल्ली वैश्विक राजनीति में अपने विकल्प खुले रखना चाहती है।
आने वाले वर्षों में इन समझौतों से भारत को कितना आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलता है, यह उनके जमीन पर लागू होने के बाद स्पष्ट होगा। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम से इतना जरूर संकेत मिलता है कि भारत अपनी विदेश नीति को अधिक बहुपक्षीय और अपने राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
