महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने मुंबई से रायगढ़ तक तबाही मचा दी। इमारत गिरी, श्री बल्लालेश्वर मंदिर में बाढ़ का पानी घुसा, रेलवे ट्रैक डूबे, भूस्खलन और ट्रैफिक जाम से जनजीवन ठप। क्या महाराष्ट्र में संकट अभी और गहराएगा? वीडियो में देखिए पूरा नजारा।
मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र इस समय एक ऐसी मानसूनी आफत से जूझ रहा है, जिसने पूरी राज्य व्यवस्था और जनजीवन को घुटनों पर ला दिया है। सोमवार को भी आसमान से बरसती आफत ने थमने का नाम नहीं लिया। मुंबई के कंक्रीट के जंगलों से लेकर रायगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक, हर तरफ सिर्फ पानी का साम्राज्य और तबाही के खौफनाक मंजर दिखाई दे रहे हैं। कहीं भरभराकर बहुमंजिला इमारतें जमींदोज हो रही हैं, तो कहीं सदियों पुराने मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। मौसम विभाग (IMD) की लगातार आ रही चेतावनियों के बीच पूरी मायानगरी और उसके पड़ोसी जिले इस वक्त एक अभूतपूर्व आपातकाल का सामना कर रहे हैं।

भांडुप वेस्ट का वो खौफनाक मंजर: जब ताश के पत्तों की तरह ढह गई निर्माणाधीन इमारत
सोमवार को मुंबई के भांडुप वेस्ट इलाके में उस समय अफरातफरी और दहशत फैल गई, जब लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के दबाव को न झेल पाने के कारण एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल: हादसे के तुरंत बाद के विजुअल्स रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं, जहाँ चारों तरफ सिर्फ कंक्रीट का मलबा, मुड़े हुए सरिये और धूल का गुबार नजर आ रहा है। स्थानीय प्रशासन और राहत बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। हालांकि, इस हादसे में कितने लोग दबे या घायल हुए हैं, इसकी सटीक जानकारी अभी जुटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इस घटना ने मानसून के दौरान शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
अष्टविनायक धाम में घुसा बाढ़ का पानी: गर्भगृह तक डूबा, इतिहास में पहली बार ऐसा संकट!
मुंबई से दूर रायगढ़ जिले के सुधागढ़ तालुका से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने श्रद्धालुओं को हैरान कर दिया। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध अष्टविनायक तीर्थ स्थलों में से एक, श्री बल्लालेश्वर मंदिर पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुका है। पहाड़ों पर हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश के कारण मंदिर के पूर्वी हिस्से से बहने वाली एक स्थानीय धारा (नदी) का जलस्तर अचानक कई फीट ऊपर उठ गया।

देखते ही देखते उफनता हुआ मटमैला पानी मंदिर परिसर को चीरते हुए अंदर घुस गया। इस समय मंदिर का विशाल असेंबली हॉल पानी में पूरी तरह डूब चुका है और बाढ़ का पानी भगवान के गर्भगृह के भीतर तक पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में सन्नाटा और सस्पेंस बना हुआ है।
पटरियों पर समंदर का कब्जा: नालासोपारा-विरार रूट ठप, थमीं लोकल की रफ्तारें
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें इस समय बेबस नजर आ रही हैं। नालासोपारा और विरार स्टेशनों के बीच की पटरियां पूरी तरह अदृश्य हो चुकी हैं। रेलवे ट्रैक पर कई फीट तक पानी जमा हो गया है, जिससे इस रूट पर ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। जो ट्रेनें चल भी रही हैं, वे घंटों की देरी से रेंग रही हैं, जिसके कारण लाखों कामकाजी लोग स्टेशनों पर फंसे हुए हैं। बदहाल सड़कों और डूबी हुई पटरियों के बीच मुंबई का पूरा परिवहन तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है।
पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 'परम सन्नाटा' और मरीन ड्राइव पर उफनता काल
सड़क मार्ग की बात करें तो स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है। भारी बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के सीधे खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे और पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर दोनों तरफ के ट्रैफिक को अगले आदेश तक पूरी तरह लॉक कर दिया गया है। हाईवे पर वाहनों की मील लंबी कतारें लगी हैं और चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा पसरा है।

| प्रभावित क्षेत्र | वर्तमान स्थिति | प्रशासन की कार्रवाई |
| पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे | भूस्खलन के कारण पूरी तरह ब्लॉक | ट्रैफिक दोनों तरफ से रोका गया |
| नालासोपारा-विरार ट्रैक | पटरियां पानी में पूरी तरह डूबीं | कई ट्रेनें रद्द, भारी देरी |
| मरीन ड्राइव (तट) | खतरनाक ऊंची लहरें और हाई टाइड | पर्यटकों के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध |
| उजानी बांध | लाइव स्टोरेज नेगेटिव स्तर पर | पानी छोड़ने पर रोक, निगरानी जारी |
इसी बीच, मुंबई के मशहूर मरीन ड्राइव से सामने आए वीडियो में समंदर की विशालकाय और उफनती हुई लहरें कंक्रीट के तटों को बेरहमी से पीटती दिख रही हैं। हाई टाइड के इस खौफनाक मंजर को देखते हुए पुलिस ने पूरे तटीय इलाके को सील कर दिया है।
मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी: लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा और 'लॉकडाउन' जैसी पाबंदियां
बिगड़ते हालातों को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीश ने खुद कमान संभाली है। उन्होंने जनता से बेहद सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि लोग बाढ़ के दूषित पानी के संपर्क में आने से बचें, क्योंकि इससे लेप्टोस्पायरोसिस जैसी जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के सभी स्कूलों और कॉलेजों में एहतियातन छुट्टी घोषित कर दी है। निवासियों को साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि जब तक कोई बेहद जरूरी काम न हो, वे अपने घरों से बाहर कदम न रखें और समंदर के किनारों से कोसों दूर रहें। आने वाले 24 घंटे महाराष्ट्र के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं।


