छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर रायपुर में व्यापक मंथन हुआ। धार्मिक और सामाजिक संगठनों समेत विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण पर भी चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में गठित समिति ने धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विभिन्न आयोगों, निगमों और मंडलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उनके सुझाव लिए।

संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों की भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से गठित समिति प्रदेश में व्यापक जनसंवाद कर रही है। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े शामिल हैं।

विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर एक समान नियमों की दिशा में कदम

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म, जाति या पंथ से अलग सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान और न्यायसंगत कानूनी ढांचा तैयार करना है। बैठक में महिलाओं को संपत्ति और वैवाहिक अधिकारों में समानता देने तथा विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों से पैदा होने वाली जटिलताओं को कम करने जैसे मुद्दों पर भी सुझाव सामने आए। प्रस्तावित व्यवस्था में मौखिक तलाक जैसी कुछ प्रथाओं और असमानता पैदा करने वाले नियमों को लेकर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई संगठनों की भागीदारी

रायपुर में हुई बैठक में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक वर्गों की भागीदारी देखने को मिली। विश्व हिंदू परिषद, मुस्लिम समाज, क्रिश्चियन समाज और गुरुद्वारा कमेटी के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे। इसके अलावा महिला आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य अल्पसंख्यक आयोग, राज्य नीति आयोग, खाद्य आयोग और अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। समिति का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों की राय को शामिल कर एक व्यापक और व्यावहारिक प्रारूप तैयार करना बताया गया है।

जनजातीय परंपराओं के संरक्षण पर भी फोकस

छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना में जनजातीय समुदायों की विशेष भूमिका है। ऐसे में प्रस्तावित सुधारों का स्थानीय जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका संवेदनशीलता के साथ आकलन करने की बात कही गई है। UCC समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में फील्ड स्टडी, जनसंवाद और ऑनलाइन माध्यमों से लोगों की राय जुटा रही है।

रायपुर की यह बैठक इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि अलग-अलग धार्मिक, सामाजिक और जनजातीय समुदायों से मिले सुझावों को अंतिम प्रारूप में किस तरह शामिल किया जाएगा। फिलहाल छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर मंथन का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सरकार एक पारदर्शी व सर्वसमावेशी कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।