जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में बच्चों ने कला और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया तथा विशेषज्ञों से नई तकनीकें सीखीं।

रायपुर। बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सकारात्मक छवि को नए अंदाज में सामने लाने के उद्देश्य से जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला बच्चों के लिए खास अनुभव साबित हुई। कार्यशाला में बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और अपनी कल्पनाओं को रंगों और रेखाओं के माध्यम से कैनवास पर उतारा। बच्चों की रचनाओं में बस्तर की संस्कृति, प्रकृति और उनकी अपनी सोच साफ दिखाई दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में सीखने और कुछ नया बनाने का उत्साह देखने को मिला।

कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बारीकियां सीखीं

कार्यशाला में देश के अलग-अलग राज्यों से आए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला की बुनियादी तकनीकों से परिचित कराया। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी अच्छे चित्र की शुरुआत एक सही आकार और संतुलित सर्किल से होती है। इसके बाद उन्होंने बच्चों को रफ स्केच तैयार करने, आउटलाइन बनाने, रंगों के सही उपयोग और चेहरे के भावों को प्रभावशाली तरीके से चित्रित करने की तकनीक समझाई। प्रशिक्षण को आसान और रोचक बनाने के लिए हर चरण को सरल भाषा में समझाया गया।

कला प्रशिक्षण से बढ़ा छात्रों का आत्मविश्वास

स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने कहा कि कार्यशाला में मिले प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने बताया कि पहले वे केवल सामान्य चित्र बनाते थे, लेकिन अब उन्हें कार्टून और कैरिकेचर बनाने की नई तकनीकों की जानकारी मिली है, जिससे कला के प्रति उनकी रुचि और मजबूत हुई है।

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से आसान हुई चित्रकला

सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राएं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने बताया कि पहले उन्हें चित्र बनाना शुरू करने का सही तरीका समझ नहीं आता था। लेकिन कार्यशाला में मिले चरणबद्ध मार्गदर्शन के बाद अब वे आसानी से स्केच और कार्टून तैयार कर पा रही हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मिली छोटी-छोटी तकनीकों ने चित्रकला को काफी सरल बना दिया है।

बच्चों की कल्पनाशीलता को मिली नई उड़ान

सेजेस नानगुर की छात्राएं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने कहा कि वरिष्ठ कलाकारों के साथ सीधे सीखने का अवसर उनके लिए बेहद प्रेरणादायक रहा। छात्राओं ने बताया कि इस तरह की कार्यशालाएं न केवल नई कला तकनीकों से परिचित कराती हैं, बल्कि रचनात्मक सोच को भी नई दिशा देती हैं। इससे भविष्य में कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिलता है।

बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान

‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला केवल बच्चों को चित्रकला सिखाने तक सीमित नहीं रही। इसका उद्देश्य कला के माध्यम से बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और सकारात्मक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ बस्तर की नई तस्वीर देश और दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नया विस्तार मिलेगा।