Engineers Day 2026 : CM यादव ने इंजीनियर दिवस पर अधोसंरचना विकास में तकनीक व नवाचार पर जोर दिया। सड़क निर्माण हेतु CSIR-एम्प्री व PWD के बीच MOU हुआ। सरकारी भवन भी ग्रीन बिल्डिंग तकनीक के अनुरूप विकसित किए जाएंगे।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। इंजीनियरों की भूमिका केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपनी तकनीकी क्षमता और नवाचार के जरिए प्रदेश के विकास को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की प्राचीन संरचनाओं में भी इंजीनियरिंग, कला और कौशल का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले इंजीनियरों और सेवानिवृत्त अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
CSIR-AMPRE और PWD के बीच हुआ MOU
समारोह के दौरान सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल और मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच अधोसंरचना निर्माण के लिए एमओयू किया गया। इसे अपनी तरह का पहला प्रयोग बताया गया है। इसके तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट के माध्यम से सड़क निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि इस साझेदारी के जरिए सीमेंट की जरूरत कम करने वाली तकनीक से कंक्रीट सड़क निर्माण की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बनने वाले सरकारी भवनों को ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी के अनुरूप विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
'इंजीनियर में मुझे इंजन शब्द का आभास होता है'
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंजीनियर शब्द सुनते ही उन्हें 'इंजन' का आभास होता है। इंजन का अर्थ है अपनी पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करना। उन्होंने कहा कि इंजीनियर भी अपनी प्रतिभा, अनुभव और तकनीकी ज्ञान के जरिए विकास की गति को आगे बढ़ाते हैं।
उन्होंने महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को याद करते हुए कहा कि उन्होंने इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ देश के लिए कई महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण किया। उनकी प्रत्येक रचना उनकी दूरदृष्टि और सोच को दर्शाती है।
प्राचीन भारत की इंजीनियरिंग का भी किया उल्लेख
सीएम ने कहा कि भारत में हजारों साल पुरानी ऐसी संरचनाएं मौजूद हैं, जो हमारे पूर्वजों की कला और तकनीकी कौशल की गवाही देती हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर मंदिर और देश की कई ऐतिहासिक संरचनाएं आज भी इंजीनियरिंग और कला का अद्भुत उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की पहली संसद के निर्माण में भी मध्य प्रदेश के मुरैना क्षेत्र से प्रेरणा ली गई थी। वहीं, आजादी के बाद बने दूसरे संसद भवन के लिए विदिशा जिले के पास स्थित बिजासन मंदिर की वास्तुकला से प्रेरणा लिए जाने का उल्लेख भी उन्होंने किया।
तकनीक के साथ नवाचार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार को जोड़कर अधोसंरचना विकास को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसी ऐतिहासिक विभूतियों का स्मरण करते हुए कहा कि इनसे सुशासन, वीरता, टीम भावना और दूरदृष्टि की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग अपने स्तर पर फंड जुटाकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है, जो एक महत्वपूर्ण पहल है। सीएसआईआर-एम्प्री और लोक निर्माण विभाग के बीच हुआ एमओयू भी अधोसंरचना क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार हमेशा नवाचारी विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोक निर्माण विभाग देश के सर्वश्रेष्ठ विभागों में अपनी पहचान बनाएगा।
'समस्या का समाधान निकालना ही इंजीनियरिंग'
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश में विकास की तस्वीर बदलने में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों का टीम वर्क महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन सबसे महत्वपूर्ण हैं।
राकेश सिंह ने बताया कि पिछले नौ महीनों में प्रदेश के करीब 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप भोपाल में इंजीनियरों की ट्रेनिंग के लिए संस्थान शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सरकारी भवनों को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक के अनुरूप विकसित किया जाएगा। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के कई नवाचारों को देश के अन्य राज्यों ने भी अपनाया है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता हमारी पहचान, नवाचार हमारी शक्ति, तकनीक हमारा भविष्य और विकसित मध्य प्रदेश हमारा संकल्प है।
एमपीआरडीसी करेगा करीब 2 लाख करोड़ के कार्य
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि एमपीआरडीसी अगले एक वर्ष में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की लागत के कार्य करेगा। वहीं, एमपीआरडीसी द्वारा लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की लागत के कार्य पूरे किए जा चुके हैं।


