जब तक चलते हैं ओलंपिक खेल तब तक जलती रहती है मशाल रिले, क्या आप जानते हैं इसके पीछे की कहानी?

वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलंपिक का मशाल उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को होगा। परंपरानुसार किस खिलाड़ी के हिस्से में यह गौरव के क्षण हैं, यह उसी पल दुनिया भी जान पाएगी। आपको बता दें कि ओलंपिक में पहली बार मशाल 1928 में जलाया गया था और यह पूरे ओलंपिक के दौरान जलती रही। 

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वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलंपिक का मशाल उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को होगा। परंपरानुसार किस खिलाड़ी के हिस्से में यह गौरव के क्षण हैं, यह उसी पल दुनिया भी जान पाएगी। आपको बता दें कि ओलंपिक में पहली बार मशाल 1928 में जलाया गया था और यह पूरे ओलंपिक के दौरान जलती रही। हालांकि ओलंपिक मशाल रिले की शुरूआत 1936 में किया गया था। 20 जुलाई 1936 को ग्रीस के धावक कॉन्स्टेंटिन कोंडिलिस ने हाथों में मशाल लेकर ओलंपिया को छोड़ा और यहीं से एक परंपरा शुरू हो गई। पहले मशाल रिले में 12 दिन लगे थे और 3075 किलोमीटर का सफर इस मशाल ने पूरा किया। आठवें ओलंपिक से शुरू हुई मशाल रिले आज भी जारी है। हर ओलंपिक के पहले ग्रीस से मशाल रिले शुरू होता है। यह विभिन्न रूट्स से होते हुए आयोजक देश में पहुंचता है। उद्घाटन समारोह में इसी मशाल से lighting of the cauldron की परंपरा निभाई जाती है। मशाल की लौ पूरे ओलंपिक के दौरान जलती रहती है। 1996 की अटलांटा ओलंपिक में लौ प्रज्जवलन का वह क्षण काफी भावुक था जब पार्किंसंस से पीडि़त गोल्ड मेडलिस्ट मुक्केबाज मुहम्मद अली ने कांपते हाथों से लौ प्रज्जवलित किया था। समारोह को देख रहे हर दर्शक के आंखों को नम कर गया था वह क्षण।

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