8वें वेतन आयोग से पेंशन कम्यूटेशन की 15 साल की अवधि घटाकर 11 साल करने की मांग की गई है। जानिए ₹35,000 बेसिक पेंशन पर ₹6.72 लाख के सीधे फायदे का पूरा कैलकुलेशन।

8th Pay Commission Pension Commutation: केंद्र सरकार के लाखों पेंशनर्स और कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और पेंशनर यूनियनों ने सरकार से मांग की है कि रिटायरमेंट के समय कम्यूट (बेची गई) की गई पेंशन को 15 साल के बजाय 10 से 12 साल (मुख्य रूप से 11 साल) में पूरी तरह बहाल किया जाए। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि 15 साल में पेंशन बहाली का मौजूदा नियम 4 दशक से भी ज्यादा पुराना है, जिसकी वजह से सरकार पेंशनर्स से मूल रकम और ब्याज से कहीं ज्यादा पैसा वसूल कर रही है। आइए समझते हैं कि कम्यूटेड पेंशन क्या है और 11 साल का नियम लागू होने पर एक पेंशनर को ₹6.72 लाख तक का फायदा कैसे होगा...

पेंशन कम्यूटेशन क्या है?

सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन कम्यूटेशन) रूल्स, 1981 के नियम 10A के तहत कोई भी केंद्रीय कर्मचारी रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का अधिकतम 40% हिस्सा एकमुश्त (Lump Sum) ले सकता है। एकमुश्त रकम मिलने के बदले में अगले 15 साल तक कर्मचारी की हर महीने की पेंशन से वह 40% हिस्सा काटा जाता है। 15 साल (180 महीने) पूरे होने के बाद पेंशनर को फिर से पूरी 100% पेंशन मिलने लगती है।

15 साल का नियम क्यों विवादों में है

संगठनों का कहना है कि सरकार जो एकमुश्त पैसा देती है, उसकी ब्याज समेत पूरी रिकवरी 10 से 11 साल में ही हो जाती है। इसके बावजूद अगले 4 से 5 साल तक पेंशन काटना बुजुर्ग पेंशनर्स के साथ अन्याय है।

किस संगठन ने कितने साल में बहाली की मांग रखी?

11 साल में बहाली: नेशनल काउंसिल ऑफ JCM (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF), फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स (FNPO) और भारत पेंशनर्स समाज ने 11 साल में बहाली की सिफारिश की है।

10 साल में बहाली: ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉईज फेडरेशन ने इसे घटाकर 10 साल करने की मांग की है।

12 साल में बहाली: इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 12 साल का सुझाव दिया है।

₹6.72 लाख के फायदे का कैलकुलेशन क्या है?

भारत पेंशनर्स समाज ने एक कैलकुलेशन के जरिए समझाया है कि 15 साल की जगह 11 साल का नियम बनने से पेंशनर्स को कितना बड़ा वित्तीय फायदा होगा। मान लीजिए मंथली बेसिक पेंशन ₹35,000 है। कम्यूट किया गया 40% हिस्सा ₹14,000 महीने का बनता है। हर महीने मिलने वाली घटी हुई पेंशन ₹21,000 प्रति माह होती है।

पैमानामौजूदा 15 साल का नियमप्रस्तावित 11 साल का नियमपेंशनर को सीधा फायदा
कटौती की कुल अवधि180 महीने (15 साल)132 महीने (11 साल)48 महीने (4 साल) कम कटौती
कुल काटी जाने वाली रक₹25.20 लाख₹18.48 लाख₹6.72 लाख की बचत
पूरी पेंशन बहाली की उम्र75 वर्ष की उम्र में71 वर्ष की उम्र में4 साल पहले 100% पेंशन शुरू

यानी 11 साल का नियम लागू होते ही 60 की उम्र में रिटायर हुए पेंशनर की 71 वर्ष की उम्र में ही पूरी पेंशन शुरू हो जाएगी और उनके बैंक खाते में कटने से बचे ₹6,72,000 का लाभ मिल सकती है।

40 साल पुराने फॉर्मूले में बदलाव क्यों जरूरी है?

NC-JCM और भारत पेंशनर्स समाज के अनुसार, 1980 के दशक के मुकाबले आज देश की वित्तीय और जनसांख्यिकीय स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। 1986 में बैंक ब्याज दरें 12% से 13% हुआ करती थीं, जो अब घटकर 6% से 7% के दायरे में आ गई हैं। कम ब्याज दर के कारण लोन की रिकवरी तेजी से पूरी होती है। बेहतर मेडिकल सुविधाओं के कारण लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी (औसत उम्)र बढ़ी है, लेकिन पुराने कम्यूटेशन टेबल को आज के वास्तविक रिस्क पैरामीटर्स के आधार पर अपडेट नहीं किया गया है। फॉर्मूले के अनुसार, अगर 61 साल का पेंशनर ₹100 की मंथली पेंशन कम्यूट करता है, तो उसे ₹9,833 एकमुश्त मिलते हैं। 10 साल में उसकी पेंशन से ₹12,000 कट जाते हैं, जिससे मूल और वाजिब ब्याज पूरा वसूल हो जाता है।

आगे क्या होगा?

कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सेंट्रल सिविल सर्विसेज रूल्स, 1981 के नियम 10A की समीक्षा करने और नए वित्तीय डेटा के आधार पर कम्यूटेशन टेबल को संशोधित करने का औपचारिक अनुरोध किया है। जब तक 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता और केंद्र सरकार इसे आधिकारिक तौर पर अधिसूचित नहीं करती, तब तक मौजूदा 15 साल का नियम ही लागू रहेगा।