Mahant Swami Maharaj Biography: पेरिस के एफिल टावर बंद होने, महिला स्टाफ विवाद के बीच BAPS सुर्खियों में है। इस बीच जानिए BAPS गुरु महंत स्वामी महाराज की पूरी कहानी। पढ़ाई, शुरुआती जीवन, योगीजी महाराज से मुलाकात और BAPS के छठे गुरु बनने तक का पूरा सफर पढ़ें।
Mahant Swami Maharaj Life Story: महंत स्वामी महाराज का नाम आज BAPS स्वामीनारायण संस्था की आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख संतों में लिया जाता है। हाल ही में एफिल टावर महिला स्टाफ विवाद मामले में BAPS और महंत स्वामी महाराज का नाम सुर्खियों में आया। बता दें कि महंत स्वामी महाराज की पहचान सिर्फ एक धार्मिक गुरु के तौर पर नहीं है। उनका जीवन एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने पढ़ाई में उत्कृष्टता हासिल की, कृषि की पढ़ाई की और फिर आध्यात्मिक मार्ग को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्तमान में वे BAPS के छठे आध्यात्मिक गुरु और दुनिया भर में संस्था के आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। जानिए BAPS गुरु महंत स्वामी महाराज की लाइफ स्टोरी, एजुकेश, फैमिली और संत बनने तक की कहानी।
महंत स्वामी महाराज: जबलपुर में जन्म, नाम रखा गया केशव
महंत स्वामी महाराज का जन्म 13 सितंबर 1933 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में मनिभाई नारायणभाई पटेल और दहिबेन के घर हुआ। उनका बचपन का नाम विनुभाई था। जन्म के कुछ समय बाद BAPS के संस्थापक शास्त्रीजी महाराज जबलपुर पहुंचे और उन्होंने बालक को आशीर्वाद देकर उसका नाम केशव रखा। हालांकि परिवार में उन्हें प्यार से वीनू ही कहा जाता था। उनके पिता मूल रूप से गुजरात के आनंद के रहने वाले थे और कारोबार के सिलसिले में जबलपुर आकर बसे थे। वीनुभाई ने शुरुआती पढ़ाई जबलपुर में की और बाद में आनंद लौटकर कृषि महाविद्यालय से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उनकी तार्किक सोच और तेज बुद्धि की काफी चर्चा थी।
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योगीजी महाराज से मुलाकात ने बदल दी जिंदगी
उनके जीवन का निर्णायक मोड़ 1951-52 के आसपास आया, जब उनका संपर्क योगीजी महाराज से हुआ। योगीजी महाराज के व्यक्तित्व, सरलता और निस्वार्थ प्रेम ने वीनुभाई को गहराई से प्रभावित किया। धीरे-धीरे उनका झुकाव सांसारिक जीवन से हटकर साधु जीवन की ओर बढ़ने लगा। 1957 में उन्होंने पार्षद दीक्षा लेकर ‘वीनू भगत’ के रूप में सेवा शुरू की। इसके बाद वे योगीजी महाराज के साथ रहने लगे और उनकी यात्राओं, पत्र-व्यवहार तथा विभिन्न सेवाओं में सहयोग करने लगे।
1961 में बने साधु, फिर मिला ‘महंत स्वामी’ नाम
साल 1961 में गढ़डा में आयोजित एक बड़े धार्मिक समारोह के दौरान योगीजी महाराज ने 51 शिक्षित युवाओं को भगवती दीक्षा दी। इसी अवसर पर वीनू भगत को साधु दीक्षा मिली और उनका नाम स्वामी केशवजीवनदास रखा गया। इसके बाद उन्हें मुंबई के दादर मंदिर में साधुओं का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। इसी वजह से वे आगे चलकर ‘महंत स्वामी’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
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प्रामुख स्वामी महाराज के साथ छह दशक की सेवा
1971 में योगीजी महाराज के देहावसान के बाद महंत स्वामी महाराज ने प्रामुख स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में अपनी सेवाएं जारी रखीं। उन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी यात्रा की और सत्संग, युवा गतिविधियों, धार्मिक आयोजनों तथा BAPS की विभिन्न परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रवचनों में आध्यात्मिक जीवन के साथ अनुशासन, नशामुक्ति, परिवार और अच्छे संस्कार जैसे विषयों पर भी जोर दिया जाता रहा है।
2012 में सामने आया उत्तराधिकारी का नाम
महंत स्वामी महाराज के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 20 जुलाई 2012 को आया। प्रामुख स्वामी महाराज ने एक पत्र के माध्यम से उन्हें अपने बाद BAPS के गुरु और अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया था। यह निर्णय उनके देहावसान के बाद 2016 में सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाया गया। 13 अगस्त 2016 को प्रामुख स्वामी महाराज के देहावसान के बाद महंत स्वामी महाराज ने BAPS की गुरु परंपरा की जिम्मेदारी संभाली। आज वे संस्था के छठे आध्यात्मिक गुरु के रूप में दुनिया भर में अनुयायियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनका जीवन शिक्षा, सेवा, साधना और गुरु-परंपरा के प्रति समर्पण की ऐसी यात्रा है, जिसने उन्हें जबलपुर के वीनूभाई से महंत स्वामी महाराज तक पहुंचाया।
